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संतान की कामना और स्वस्थ लंबी उम्र की कामना के लिए बछ बारस व्रत का उत्सव

बीकानेर 11‍ सितंबर 2023, दिन सोमवार को गोवत्स द्वादशी या वसु बारस का पर्व मनाया जा रहा है। धार्मिक मान्यतानुसार बछ बारस/ गोवत्स द्वादशी व्रत पुत्र की लंबी आयु के लिए रखा जाता है। प्रतिवर्ष भाद्रपद कृष्‍ण द्वादशी को यह पर्व मनाया जाता हैं।
गौ माता को समर्पित यह पर्व भाद्र मास में कृष्ण पक्ष की द्वादशी तिथि को मनाया जाता है। कहीं-कहीं इसे बछ बारस भी कहा जाता है। इस दिन बछड़े वाली गाय की पूजा करने के साथ गौ रक्षा का संकल्प भी किया जाता है।
पुराणों में गौ के अंग-प्रत्यंग में देवी-देवताओं की स्थिति का विस्तृत वर्णन प्राप्त होता है। पद्म पुराण के अनुसार गाय के मुख में चारों वेदों का निवास हैं। उसके सींगों में भगवान शिव और विष्णु सदा विराजमान रहते हैं। गाय के उदर में कार्तिकेय, मस्तक में ब्रह्मा, ललाट में रुद्र, सीगों के अग्र भाग में इन्द्र, दोनों कानों में अश्विनीकुमार, नेत्रों में सूर्य और चंद्र, दांतों में गरुड़, जिह्वा में सरस्वती, अपान (गुदा) में सारे तीर्थ, मूत्र स्थान में गंगा जी, रोमकूपों में ऋषि गण, पृष्ठभाग में यमराज, दक्षिण पार्श्व में वरुण एवं कुबेर, वाम पार्श्व में महाबली यक्ष, मुख के भीतर गंधर्व, नासिका के अग्रभाग में सर्प, खुरों के पिछले भाग में अप्सराएं स्थित हैं।
इस व्रत में द्विदलीय अन्न का प्रयोग किया जाता है। इस दिन गाय का दूध, दही, गेहूं और चावल खाना निषेध है। बाजरे की ठंडी रोटी खाएं। इस दिन अंकुरित मोठ, मूंग, चने आदि ग्रहण करें और इन्हीं से बना प्रसाद चढ़ाएं।

यह व्रत संतान की कामना एवं उसकी सुरक्षा के लिए किया जाने वाला व्रत है। इस दिन गाय-बछड़ा और बाघ-बाघिन की मूर्तियां बना कर उनकी पूजा की जाती है। व्रत के दिन शाम को बछड़े वाली गाय की पूजा कर कथा सुनने के बाद ही प्रसाद ग्रहण किया जाता है।

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