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मैं बोल-सुन नहीं सकता, पर सरकार ने सुन ली मेरी आपसी सहमति से खाता विभाजन के साथ हुई शुद्धि, घर बैठे मिला दोहरा लाभ ,

रामस्नेहा अब आगे भी पढ़ सकेगी
शिविर के दौरान मिला पालनहार योजना का लाभ

मैं बोल-सुन नहीं सकता, पर सरकार ने सुन ली मेरी
आपसी सहमति से खाता विभाजन के साथ हुई शुद्धि, घर बैठे मिला दोहरा लाभ

बीकानेर। प्रशासन गांवों के संग अभियान के तहत लूणकरणसर के ढाणी पांडूसर में आयोजित शिविर के दौरान लालचंद, राजेंद्र, देवीलाल तथा श्रवण पुत्रगण मानाराम नाई ढाणी पांडसर के खसरा नंबर 162/1 की 39 बीघा भूमि का आपसी सहमति से खाता विभाजन करवाने के लिए शिविर प्रभारी के सामने उपस्थित हुए। सह-खातेदारों में से एक लालचंद मूक-बधिर होने के कारण सुन और बोल नहीं सकता था। ऐसे में उसने लिखित में खाता विभाजन के लिए निवेदन किया। उपखंड अधिकारी तथा शिविर प्रभारी ने तहसीलदार लूणकरणसर को आवश्यक कार्रवाई के लिए निर्देशित किया, जिसकी अनुपालन में तहसीलदार ने शिविर स्थल पर ही मौजूद हल्का पटवारी को खाता विभाजन प्रस्ताव तैयार करने के निर्देश दिए। इस दौरान जानकारी मिली कि जमाबंदी में उक्त सह-खातेदारों की बहनों गीता और यशोदा का नाम भी दर्ज था जबकि दोनों बहनों ने फरवरी 2021 में ही हक त्याग कर दिया था।
मूक-बधिर लालचंद ने अपने हक की लिखकर सहमति दी, लेकिन इसकी खुशी उसकी आंखों पर साफ झलक रही थी। उसके सभी भाइयों ने सरकार द्वारा आयोजित किए जा रहे इस अभियान की भरपूर प्रशंसा की और कहा कि आपसी सहमति से खाता विभाजन और शुद्धि दोनों एक साथ और एक ही दिन में हो जाने से उनको उनको बड़ा लाभ हुआ है। अब वे अपनी-अपनी भूमि का सुधार करवाकर केसीसी और पीएम किसान जैसी योजनाओं का लाभ उठा सकेंगे।

रामस्नेहा अब आगे भी पढ़ सकेगी
शिविर के दौरान मिला पालनहार योजना का लाभ

बीकानेर। जांगलू में रहने वाली रामस्नेहा अब अपनी पढ़ाई जारी रख सकेगी। एक साल पहले किडनी खराब होने के कारण पिता रामनिवास की मृत्यु हो जाने के बाद उसके पढ़ पाने का सपना धूमिल हो गया था। लेकिन राज्य सरकार द्वारा आयोजित प्रशासन गांवों के संग अभियान उसके जीवन में नई रोशनी लाया। पांचू पंचायत समिति के जांगलू गांव में शिविर लगा तो रामस्नेहा की माँ पुष्पा सरकार से मदद की उम्मीद के साथ पहुंची। शिविर में मौजूद सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग के अधिकारी ने पुष्पा को पालनहार योजना की जानकारी दी और शिविर के दौरान ही इसके लिए आवेदन करते हुए, इसकी स्वीकृति जारी कर दी। हाथ में स्वीकृति पत्र आते ही पुष्पा की आंखों में बच्चों के सुनहरे भविष्य की संभावना दिखने लगी। उसने सरकार का आभार जताया और कहा कि दो बच्चों की पालनहार के रूप में प्रतिमाह मिलने वाले दो हजार रुपये बच्चों को आगे पढा पाने में मददगार साबित होंगे।

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