मुश्किल में सोनू सूद:BMC का एक्टर पर आरोप- नोटिस को नजरअंदाज कर रिहायशी इमारत को होटल बनाया; पुलिस में शिकायत दर्ज
लॉकडाउन के दौरान जरूरतमंदों के मददगार बनकर चर्चा में आए एक्टर सोनू सूद मुश्किलों में फंसते नजर आ रहे हैं। बृहनमुंबई नगर निगम (BMC) ने उन पर एक 6 मंजिला रिहायशी इमारत को होटल में तब्दील करने का आरोप लगाया है। इस संबंध में जुहू पुलिस स्टेशन में शिकायत भी दर्ज कराई गई है। […]
कोरोना पर सुनवाई:सुप्रीम कोर्ट ने सरकार से पूछा- मरकज मामले से क्या सबक लिया, किसान आंदोलन भी तब्लीगी जमात न बन जाए
दिल्ली के निजामुद्दीन इलाके में तब्लीगी जमात के आयोजन से कोरोना फैलने के मामले में गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। चीफ जस्टिस एस ए बोबडे की बेंच ने सरकार से पूछा कि मरकज मामले से क्या सबक लिया? कहीं किसान आंदोलन भी तब्लीगी जमात जैसा न बन जाए, क्योंकि कोरोना फैलने का डर […]
अमेरिका में बुधवार को जो कुछ हुआ, उसे उपराष्ट्रपति माइक पेंस ने ‘देश के लोकतांत्रिक इतिहास का काला दिन’ करार दिया। यह तो तय है कि राष्ट्रपति डेमोक्रेट पार्टी के जो बाइडेन ही बनेंगे। मोटे तौर पर देखें तो बाइडेन की जीत 3 नवंबर को चुनाव वाले दिन ही तय हो गई थी। 14 नवंबर को इलेक्टोरल कॉलेज की वोटिंग के बाद इस पर एक और मुहर लगी। 6 जनवरी को बाइडेन की जीत की संवैधानिक पुष्टि होनी थी। ऐसे में सवाल यह कि जब सब तय था तो बवाल क्यों हुआ? आखिर दुनिया का सबसे पुराना लोकतंत्र कलंकित क्यों हुआ? इसका एक ही जवाब है- डोनाल्ड ट्रम्प की जिद। आइए 5 पॉइंट में यह पूरा विवाद समझते हैं… 1. चुनाव से पहले क्या हुआ? राष्ट्रपति ट्रम्प रिपब्लिकन और बाइडेन डेमोक्रेट पार्टी के कैंडिडेट थे। कोरोनावायरस को संभालने में ट्रम्प की नाकामी मुख्य मुद्दा बनी। ट्रम्प महामारी को मामूली फ्लू तो कभी चीनी वायरस बताते रहे। 3 लाख से ज्यादा अमेरिकी मारे गए। लाखों बेरोजगार हो गए। अर्थव्यवस्था चौपट होने लगी। ट्रम्प श्वेतों को बरगलाकर चुनाव जीतना चाहते थे, क्योंकिभेदभाव का आरोप लगाकर अश्वेत उनसे पहले ही दूर हो चुके थे।
अमेरिका में बुधवार को जो कुछ हुआ, उसे उपराष्ट्रपति माइक पेंस ने ‘देश के लोकतांत्रिक इतिहास का काला दिन’ करार दिया। यह तो तय है कि राष्ट्रपति डेमोक्रेट पार्टी के जो बाइडेन ही बनेंगे। मोटे तौर पर देखें तो बाइडेन की जीत 3 नवंबर को चुनाव वाले दिन ही तय हो गई थी। 14 नवंबर […]