Bikaner Live

राष्ट्रीयता का  राष्ट्रीयकरण होना चाहिए

खाईं हंस-हंस के बदन पे गोलियां,…


वे ज़िंदा रहेंगे देखना, मरने के बाद भी…

घर घर में तिरंगा हो हर मन में गंगा हो

          राष्ट्रीय कवि चौपाल 581 वीं कड़ी स्वाधीनता दिवस 1  को समर्पित रही.. आज के कार्यक्रम की अध्यक्षता में डॉ हरिदास हर्ष मुख्य अतिथि में कर्नल हेम सिंह जी शेखावत, विशिष्ट अतिथि में इरशाद अजीज, वली मोहम्मद गौरी रजवी वली, सरदार अली परिहार आदि मंचासीन हुए, कार्यक्रम शुभारम्भ करते हुए रामेश्वर साधक ने स्व बौद्धिक में कहा कि हम स्वतंत्र हैं तो साहित्य परतंत्र क्यों? अर्थात पर-लेखन को स्व लेखन बताना, परतंत्रता दासता बांझपन ही तो है कार्यक्रम अध्यक्ष डॉ हरिदास ने अध्यक्षीय उद्बोधन में कहा कि राष्ट्रीयता का  राष्ट्रीयकरण होना चाहिए भारत हमारा प्राणों से प्यारा देश भक्ति गीत में राष्ट्रीयता का मर्म सार समझाया..मुख्य अतिथि कर्नल हेम सिंह जी ने कहा न कोई हमारा धर्म है न ही जात पात है, हम हिंदुस्तानी हमारा धर्म हिंदुस्तान है, विशिष्ट अतिथि इरशाद अजीज ने बताया कि मौलिकता के अभाव में साहित्यकार बैसाखी (पर रचना) आश्रित है, जबकि साहित्य जुनूनधारी कवि सरकार व समाज की सजगता में पर्मानेंट विपक्ष में रहता है, फिर सामयिक विषय पर “अपने वतन के वास्ते जिसने भी जांन दी, वे ज़िंदा रहेंगे देखना, मरने के बाद भी..” विशिष्ट अतिथि वली मोहम्मद गौरी रजवी वली ने  स्वाधीनता संदर्भ शानदार प्रस्तुति दी “तेरे साये में चली वो टोलियां, बोलती वो इंक़लाबी बोलियां। ख़ून से खेली जिन्होंने होलिया, खाईं हंस-हंस के बदन पे गोलियां,।। कैसे हम भूलें ‘वली’ वो दास्तां, ऐ तिरंगे-अज़्मत-ए-हिन्दोस्तां
कवि चौपाल प्रतिनिधि बतौर सरदार अली परिहार ने देश भ्रष्टाचारी नेताओं पर कड़ा प्रहार किया,.. इससे पूर्व कृष्णा वर्मा ने सरस्वती वंदना की जबकि अतिथियों के स्वागत में महेश बड़गुर्जर ने हो जी म्हारा धिन धिन मोटा भाग… शानदार गीत प्रस्तुति से सरस्वती सभा को सुरभित कर दिया
       डॉ कृष्ण लाल विश्नोई : आजादी री आ जोत जगी, आ कद जगी कठै जगी, आ जगती रैवे जगी जगी… बाबू बम चकरी : घर घर में तिरंगा हो हर मन में गंगा हो, बहे प्रेम सुधा सब में हर कोई चंगा हो… भानू प्रताप सिंह देशनोक : हुयो आपरेशन सिन्दूर आगाज़, पाक घणों किचरतो मूरली नाच्या द्वारका रा नाथ..  माजिद ख़ान गौरी  : मैं हिन्दू से हूं न मूसलमान से हूं, जो कुछ भी हूं इसी हिंदुस्तान से हूं ,.. कासिम बीकानेरी : मेरा ये दिल है लिख देना तू मेरी जान लिख देना,कफ़न के हर सिरे पर मेरे हिंदुस्तान लिख देना, शिव दाधीच बीकानेरी : लिखने को बहुत लिखा, भाषण शोर शराबे पर, शहीदों पर सम्मान लिखो तो कलम तुम्हारी सबसे बेहतर,… राजकुमार ग्रोवर  : जो चले गये हैं दुनियां से लौटकर फिर से नहीं आएंगे,उन शहीदों का भारत हम ही बनाएंगे..  कृष्णा वर्मा  :  नमन उन वीरों को,चलो फिर से वो नजारा याद करलें..  रामेश्वर साधक  : बोलो देवत्व सी दया… कवच सी सुरक्षा,मानवीय रूप में किसने किया..वे है भारत के वीर सपूत जिन्होंने, हंसते-हंसते “माँ भारती” के लिए बलिदान किया,.. पवन चड्ढ़ा : ऐ मेरे प्यारे वतन, ऐ मेरे बिछड़े चमन तुझ पर.. राधा किशन सोनी : जहां डाल-डाल पर सोने की चिड़िया करती है बसेरा..  सिराजुद्दीन भुट्टा : है ये मेरा प्यारा वतन देखिए, बहती है यहां गंगा जमुना की धारा देखिए

आज के कार्यक्रम में 20 साहित्य प्रस्तुतियां रही कार्यक्रम में महेश कुमार हर्ष, घनश्याम सौलंकी, केशव पारीक, लक्ष्मण राम, शिवराज सिंह विश्नोई, साकिर पत्रकार, भवानी सिंह शिवबाड़ी, नीबूवाल्या आदि कई गणमान्य साहित्यानुरागी उपस्थित रहे कार्यक्रम संचालन चुटिले शायराने रसीले अंदाज में बाबू बमचकरी ने किया

जय साहित्य जय साहित्यकार

Picture of Gordhan Soni

Gordhan Soni

खबर

http://

Related Post

error: Content is protected !!