


बीकानेर, 11 जुलाई। साधुमार्गी जैन संघ के आचार्य, उत्क्रांति प्रदाता, आगमज्ञाता आचार्य श्री रामलालजी, उपाध्याय प्रवर राजेश मुनि के सान्निध्य में जैनाचार्य की जन्मभूमि, चातुर्मास स्थल पर देशनोक में शनिवार को करीब 38 मुनियों व 42साध्वीवृंद तथा सैकड़ों श्रावक-श्राविकाओं की साक्षी में प्रतापगढ़ की मुमुद्वु अदिति (जिया) चिप्पड़ की भगवती दीक्षा ग्रहण करेंगी।
देशनोक मेंं आचार्यश्री रामलालजी के चातुर्मास कमेटी के अध्यक्ष बैंगलूर प्रवासी, देशनोक निवासी शांति लाल सांड ने बताया कि शुक्रवार को मुमुक्षु अदिति का वरघोड़ा, (शोभायात्रा) जैन जवाहर मंडल देशनोक रवाना होकर विभिन्न मार्गों से होते हुए जैन जवाहर मंडल के प्रांगण पहुंचा । शोभायात्रा में शामिल श्रावक-श्राविकाएं आचार्य रामलालजी, उपाध्याय प्रवर राजेश मुनि के साथ मुमुक्षु के जयकारे लगा रहे थे। जगह-जगह मुमुक्षु का अभिनंदन किया गया।
चातुर्मास कमेटी के अध्यक्ष एस.एल. सांड ने बताया कि मुमुक्षु के साथ उनके माता पिता अनिता व आशीष चिपड़ का साधुमार्गी जैन संघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष नरेन्द्र गांधी, महामंत्री सुरेश बच्छावत, पूर्व अध्यक्ष सुन्दर लाल दुग्गड़, नवरतन, राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष राजेश बच्छावत, गौतम रांका तथा देशनोक संघ के पदाधिकारियों ने अभिनंदन किया। अभिनंदन पत्र का वाचन विमल भूरा ने किया। मुमुक्षु का परिचय अहिंसा प्रचारक महेश नाहटा ने दिया। नाहटा ने बताया कि मुमुक्षु के हर्षित मुनि, भुआ मर्यादाश्रीजी व पूर्वीश्रीजी सांसारिक चाचा व भुआएं है। प्रतापगढ़ के इस परिवार में यह चौथी दीक्षा है। अपने अभिनंदन अवसर पर मुमुक्षु ने कहा कि यह मेरा नहीं भगवान महावीर और आचार्य रामलालजी महाराज के आदर्शों, सिद्धान्तों का अभिनंदन है। संयम व वैराग्य तथा जिन शासन का अभिनंदन है। मुमुक्षु अदिति शनिवार को चतुर्विद संघ की साक्षी में आचार्यश्री रामलालजी से सुबह प्रवचन स्थल पर भागवती दीक्षा ग्रहण करेंगी। देशनोक में दीक्षा की साक्षी बनने के लिए देश के विभिन्न इलाकों से बड़ी संख्या में श्रावक-श्राविकाएं देशनोक पहुंचे है।
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श्राविकाओं का सास बहू संबोधि आज
चातुर्मास में धर्म व तप की साधना करें-गणिवर्य मेहुल प्रभ सागर
बीकानेर,11 जुलाई। गच्छाधिपति आचार्य प्रवर श्री जिन मणि प्रभ सूरीश्वरजी महाराज की आज्ञानुवर्ती गणिवर्य श्री मेहुल प्रभ सागर म.सा., मंथन प्रभ सागर, बाल मुनि मीत प्रभ सागर, बीकानेर की साध्वी दीपमाला श्रीजी व शंखनिधि के सान्निध्य में शनिवार को श्राविकाओं का सास बहू संबोधि शिविर व रविवार को बच्चों का धर्म-आध्यात्म व ज्ञान शिविर ढढ्ढा कोटड़ी में दोपहर ढाई से साढ़े तीन बजे तक आयोजित किया जाएगा। सुबह प्रवचन सुबह नौ बजे से दस बजे तक नियमित चलेंगे।
गणिवर्य मेहुल प्रभ सागर महाराज ने प्रवचन में शुक्रवार को प्रवचन में कहा कि चातुर्मास में धर्म व तप की साधना, आराधना करें। परमात्म वाणी व जिनवाणी की बात मानने, जप, तप, स्वाध्याय व ध्यान, साधना आराधना व भक्ति करने से शारीरिक व मानसिक रोग,शोक व संताप दूर होते है। उन्होंने कहा कि अपनी दृष्टि को बदले, सृष्टि में अपने आप परिवर्तन आ जाएगा। जिन शासन में उपवास, एकासना, आयम्बिल, तेला आदि तपस्याओं के शारीरिक महत्व को अनादिकाल पूर्व ही बता दिया था, जापान आदि देशो के विद्वानों ने शोध से उपवास आदि को प्रमाणिक माना है।
गणिवर्य ने कहा कि जैन धर्म व दर्शन को मानने तथा अनशन, उपवास, ऊनोदरी तप, वृतिसंक्षेप तप, रसेन्द्रीय के त्याग से चिकित्सक के पास जाना नहीं पड़ेगा। छोटे-छोटे त्याग कर हम अनेक बीमारियों से बच सकते है। पेट को खाने से रेस्ट देकर हम बैड रेस्ट से बच सकते है।
सुगनजी महाराज का उपासरा ट्रस्ट व अखिल भारतीय खरतरगच्छ युवा परिषद की बीकानेर इकाई के संयुक्त तत्वावधान में चल रहे चातुर्मास में शुक्रवार को शांति लाल बैद व पुष्पा देवी सेठिया ने तेले की तपस्या पूर्ण की। तपस्या की अनुमोदना श्री संघ की ओर से की गई। एकासना, आयम्बिल आदि की तपस्याएं चल रही है।













