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बीकानेर में विश्व बौद्धिक संपदा दिवस पर सेमिनार आयोजित

भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के केंद्रीय शुष्क बागवानी संस्थान, बीछवाल में विश्व बौद्धिक संपदा दिवस के अवसर पर एक दिवसीय सेमिनार का सफल आयोजन किया गया। कार्यक्रम में वैज्ञानिकों, शिक्षकों, विद्यार्थियों एवं युवा पेशेवरों सहित लगभग 70 प्रतिभागियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। सेमिनार का उद्देश्य नवाचार, अनुसंधान एवं तकनीकी विकास को बौद्धिक संपदा अधिकारों से जोड़ते हुए वैज्ञानिकों एवं शोधार्थियों को जागरूक करना था। कार्यक्रम मे प्रोफेसर सुजीत कुमार यादव, कृषि महाविधालय ने पेटेंट विषय पर विस्तृत व्याख्यान दिया। उन्होंने कहा कि कृषि एवं विज्ञान क्षेत्र में विकसित नई तकनीकों, फसल प्रजातियों, उपकरणों एवं प्रक्रियाओं को पेटेंट के माध्यम से संरक्षण देना समय की आवश्यकता है। उन्होंने शोधकर्ताओं से अपील की कि वे अपने नवाचारों को कानूनी सुरक्षा प्रदान कर देशहित में उपयोगी बनाएं। डॉ. यादव ने तकनीकों के पेटेंट, फसल किस्मों के संरक्षण, जियोग्राफिकल इंडिकेशन, ट्रेडमार्क तथा अन्य बौद्धिक संपदाको रजिस्टर करने के तरीकों को बताया।  अधिकारों पर विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने कहा कि कृषि उत्पादों और स्थानीय विशेषताओं को पहचान दिलाने में GI टैग और ट्रेडमार्क की महत्वपूर्ण भूमिका है।
इस अवसर पर एग्री इनोवेट इंडिया लिमिटेड के मुख्य कार्यकारी अधिकारी डॉ. प्रवीण मलिक ने तकनीकों के व्यवसायीकरण एवं तकनीकी हस्तांतरण पर विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि किसी भी नई तकनीक को उद्योगों तक पहुंचाने के लिए तकनीकी डिस्क्लोजर फार्म, मूल्यांकन, लाइसेंसिंग तथा टेक्नोलॉजी रेडीनेस लेवल जैसे महत्वपूर्ण चरणों से गुजरना पड़ता है। तकनिकियों का मूल्य निर्धारण इन्ही प्रक्रियाओ के द्वारा किया जाता है। इससे अनुसंधान प्रयोगशालाओं में विकसित तकनीकें किसानों और उद्यमियों तक प्रभावी रूप से पहुंच सकती हैं। संस्थान के निदेशक डॉ. जगदीश राणे ने विश्व बौद्धिक संपदा संगठन द्वारा वैश्विक स्तर पर किए जा रहे प्रयासों पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि बौद्धिक संपदा अधिकार नवाचारों को संरक्षण देने के साथ-साथ संस्थानों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने का माध्यम भी हैं। उन्होंने वैज्ञानिकों से आह्वान किया कि वे बागवानी क्षेत्र की विकसित तकनीकों एवं उन्नत प्रजातियों का पंजीकरण करवाकर उनके व्यवसायीकरण में योगदान दें, जिससे संस्थान को राजस्व प्राप्त हो सके। साथ ही उन्होंने विद्यार्थियों और युवा वैज्ञानिकों को अनुसंधान कार्यों में नवाचार की सोच विकसित करने का संदेश दिया। कार्यक्रम का स्वागत भाषण तकनीकी प्रबंधन इकाई के प्रभारी डॉ. धुरेन्द्र सिंह ने दिया। उन्होंने बताया कि संस्थान द्वारा अब तक लगभग 22 तकनीकों का लाइसेंस देकर सफल व्यवसायीकरण किया जा चुका है, जिससे बागवानी क्षेत्र में नई संभावनाएं विकसित हुई हैं। इस अवसर पर संस्थान के प्रधान वैज्ञानिक डॉ. डी.के. समादिया, डॉ. शिवराम मीणा, डॉ. बालूराम चौधरी,  एवं हनुमान राम चौधरी द्वारा तकनीकी विकास एवं बौद्धिक संपदा के क्षेत्र में किए जा रहे कार्यों की सराहना की गई। कार्यशाला के सफल आयोजन में डॉ. पवन कुमार, डॉ. पवन सिंह गुर्जर, डॉ. रूपचंद बलाई सहित अन्य वैज्ञानिकों ने सक्रिय सहयोग प्रदान किया।

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Gordhan Soni

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