*औपनिवेशिक प्रभाव लील रहा है हमारी भाषाः डॉ. ब्रजरतन जोशी*
*बीकानेर, 1 सितंबर।* स्वतंत्रता के सात दशकों बाद भी हमारा समाज औपनिवेशिक प्रभाव और दबाव से मुक्त नहीं हो पाया है। यह प्रभाव आज भी हमारी भाषा और प्रशासन पर स्पष्ट रूप से दिखाई देता है, जिससे हमारी मातृभाषा और हिंदी का महत्व घटता जा रहा है। यह विचार प्रसिद्ध कवि और आलोचक डॉ. ब्रजरतन … Read more