बीकानेर, 16 अगस्त। अखिल भारतीय साधुमार्गी जैन संघ के हुक्म संघ के नवम पट्टधर आचार्य प्रवर 1008 रामलालजी म.सा.,व उपाध्याय प्रवर राजेश मुनि के चातुर्मास (समर्पण महोत्सव-2026) के स्थल छबीली घाटी के सेवा सदन व गंगाशहर मार्ग के आदिनाथ भवन में रविवार को साधुमार्गी जैन प्रोफेशनल फोरम (एस.पी.एफ) दो दिवसीय शिविर संपन्न हुआ। शिविर में देश के विभिन्न इलाकों से आए विभिन्न क्षेत्रों के प्रोफेशनल्स व बुद्धिजीवियों ने हिस्सा लिया।
साधुमार्गी प्रोफेशनल फोरम (एस.पी.एफ) की राष्ट्रीय संयोजक पूना की वरिष्ठ श्राविका वर्षा कुदाल ने बताया कि समापन सत्र में अतिथि वक्ता भारत सरकार आयुष मंत्रालय से सम्बद्ध राष्ट्रीय होम्योपैथी कमीशन की संवैधानिक निकाय बोडी के चेयरपर्सन देशनोक मूल के दिल्ली प्रवासी डॉ. तारकेश्वर जैन (सांड), उदयपुर के करियर काउंसलर व शिक्षाविद विनीत बयां तथा जयपुर के अक्षय नाहर थे। डॉ.तारकेश्वर जैन ने कहा कि भगवान महावीर के सिद्धान्तों व आचार्य रामलाल जी आदि चरित्र आत्माओं के जीवन आदर्शों से प्रेरणा लें। अनेकांत के सिद्धांत को अंगीकार करते हुए अर्जित धन को संघ, समाज व देश के लिए विसर्जित करें। अपनी सोच को विस्तृत, कार्य-व्यवहार में शालीनता, समझ का उपयोग करते हुए समता व संयम भावना के साथ कार्य करें। सही सोच के साथ सही दिशा में आगे बढ़ने से सार्थक परिणाम आयंगे। अपने आप पर भरोसा रखे तथा इंसानियत को सवोपरि रखते हुए दीन ईमान कार्य करें।
शिविर की राष्ट्रीय संयोजक श्रीमती कुदाल ने बताया कि साधुमार्गी प्रोफेशनल फोरम भारत और विदेशों में साधुमार्गी परिवार के प्रोफेशनल श्रावक-श्राविकाओं को जोड़ता हैं। यह समुदाय सहयोग, नवाचार और परस्पर समर्थन पर आधारित है, जिससे एक ऐसा नेटवर्क बनता है जहां प्रोफेशनल्स एक दूसरे से जुड़ सकते हैं, ज्ञान सांझा कर सकते है और एक साथ प्रगति करसकते हैं। भविष्य की ओर देखते हुए, हम व्यक्तित्व विकास को प्रोत्साहित करने, नए अवसरों को अपनाने और एक जीवंत और सहायक प्रोफेशनल समुदाय का निर्माण जारी रखने के लिए प्रतिबद्धता को साकार कर सकते है। दो दिवसीय शिविर में इंदौर के रत्नेश जैन ने ए.आई. की खूबियां,कमियां व उपयोगिता पर तथा देशनोक मूल के भीलवाड़ा प्रवासी मोहित भूरा, सूरत के रोहन मेहता व सिद्धार्थ नाहटा ने विभिन्न सत्रों के अपने विचार व्यक्त किए।
प्रतिभागियों ने आचार्यश्री, उपाध्याय श्री व अन्य चरित्र आत्माओं के दर्शन वंदन किए तथा साध्वी इहिताश्री जी का सानिध्य प्राप्त किया। साध्वी जी ने कहा कि जो हम सोचते, बोलते वो ही जीवन में घटित होता है। सकारात्मक सोच व अच्छे चिंतन मनन के साथ प्रोफेशनल को कार्य व्यवहार करना चाहिए। अतिथियों व प्रतिभागियों को वरिष्ठ श्रावक सुशील बैद, वरिष्ठ श्राविका वर्षा कुदाल ने स्मृति चिन्ह से सम्मानित किया। शिविर में साधुमार्गी जैन सेवा समिति के कार्याध्यक्ष सुरेन्द्र कुमार दस्सानी, अध्यक्ष कन्हैयालाल बैद, मंत्री सुरेश बच्छावत, संरक्षक व सह मंत्री व शिविर प्रभारी नवीन कोठारी, समता युवा संघ के मंत्री अरिहंत बांठिया, अलका डागा, रौनक गुलगुलिया व सुमित सेठिया तथा अहिंसा प्रचारक महेश नाहटा आदि ने भागीदारी निभाई।
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भगवान नेमीनाथ के जीवन आदर्शों पर संगीतमय
नाटक में प्रभु भक्ति
बीकानेर, 16 अगस्त। जैन श्वेताम्बर खरतरगच्छ की साध्वी श्री मुक्तांजनाश्री आदिठाणा पांच के सान्निध्य में श्री सुगनजी महाराज का उपासरा ट्रस्ट के तत्वावधान में रविवार को नाहटा चौक के कुशल भवन में जैन धर्म के 22 वें तीर्थंकर प्रभु श्री नेमिनाथ के जन्म कल्याणक महोत्सव पर संगीतमय नाटक का मंचन किया गया। नाटक में 50 से अधिक बालक-बालिकाओं व श्रावक-श्राविकाओं ने पात्रता निभाई। श्राविका ट्विंकल नाहटा ने प्रभु भक्ति के गीतों की प्रस्तुतियां दी।
नाटक में भगवान नेमिनाथ की परम सौभाग्य माता शिवादेवी एवं पिता राजा समुद्र विजय की पात्रता निभाने का लाभ सुश्रावक ज्ञान चंद सेठिया एवं सुश्राविका श्रीमती सुमन देवी सेठिया, मंत्री का गौरव ने प्राप्त किया है। भगवान नेमीनाथ यादव कुल के भगवान श्री कृष्ण के चचेरे भाई थे। विवाह के समय बारात में वध के लिए लाए गए पशुओं की चीत्कार सुनकर उनका मन द्रवित हो गया और उन्होंने उसी समय संसार त्याग कर संयम यानि दीक्षा ग्रहण की। उन्होंने गुजरात स्थित पवित्र गिरनाथ्र पर्वपर मोक्ष प्राप्त किया। उनका एक अरिष्टनेमि भी है।















