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ओरण को डीम्ड फॉरेस्ट बनाने का किया विरोध, यदि यह आदेश वापस नहीं लिया तो किया जाएगा आंदोलन
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*राजस्थान के 26 जिलों के प्रतिनिधि हुए शामिल, ओरण को डीम्ड फॉरेस्ट बनाने का किया विरोध, यदि यह आदेश वापस नहीं लिया तो किया जाएगा आंदोलन।*

               गौचर ओरण संरक्षक संघ राजस्थान के प्रदेश उपाध्यक्ष कानसिंह निर्बाण ने बताया कि राजस्थान सरकार द्वारा पूरे राजस्थान की औरण भूमियों को डीम्ड फॉरेस्ट घोषित करने और इससे जनमानस पर पड़ने वाले प्रभावों पर चर्चा करने हेतु, गौचर औरण संरक्षक संघ राजस्थान की संभाग स्तरीय बैठक का आयोजन सिंवांची गेट गौशाला के नंदीशाला प्रांगण, केरू फांटा के पास आयोजित किया गया । दीप प्रज्वलन और अतिथियों के स्वागत सत्कार के बाद कार्यक्रम की शुरुआत मुख्य अतिथि पूर्व मंत्री देवीसिंह भाटी और क्षेत्र के विभिन मठों के संतों के सानिध्य में शुरू हुई संत श्री लालपुरी जी महाराज, संत श्री स्वरूपानंद जी महाराज , संत श्री प्रेमाराम जी महाराज, संत श्री मुलपुरी जी महाराज के सानिध्य में कार्यक्रम शुरूआत हुई  कार्यक्रम की अध्यक्षता गणेश भंडारी, अध्यक्ष सिंवांची गेट गौशाला ने की, निर्मल बरडिया विशिष्ट अतिथि थे ।
       अपने स्वागत उद्बोधन में नटवर थानवी ने गौचर, औरण की अवधारणा पर विस्तार से चर्चा करते हुए बताया कि किस प्रकार समाज के लोग ने इन भूमियों को सुरक्षित रख रखा है।
      संघ के महामंत्री प्रकाश व्यास ने कार्यक्रम की रूपरेखा पर प्रकाश डालते हुए बताया कि वर्तमान में जिस तरह से गोचर औरण का दुरुपयोग कर रहे हैं, सरकारें इस जमीन का आवंटन कर रही है, वह बहुत ही गलत है । वरिष्ठ अधिवक्ता मोतीसिंह राजपुरोहित और मानवेंद्र सिंह भादरिया ने विभिन्न कानूनी पहलुओं की जानकारी दी । गौचर औरण को किन किन प्रावधानों के अंतर्गत बचाया जा सकता है, उसकी जानकारी भी दी ।
     गोचर ओरण संघ के संगठन महामंत्री सुरजमालसिंह नीमराना बताया कि संघ की स्थापना का उद्देश्य गोचर ओरण संरक्षक के लिए एकांकी रूप में कार्य करने वाले लोगों को संकलित करके पूरे राजस्थान में गोचर, ओरण, आगौर, देवबनी, मंदिर माफी की भूमि को बचाने का संयुक्त प्रयास करना है।
     इस अवसर पर गौ ग्राम सेवा संघ के प्रदेश अध्यक्ष ललित दाधीच और गोचर ओरण संघ के कार्यकारी अध्यक्ष निर्मल बरडिया ने संगठन के बारे में, संगठन के उद्देश्यों के बारे में, अब तक किए गए कार्यक्रमों की जानकारी दी ।
      कार्यक्रम की मुख्य अतिथि पूर्व मंत्री राजस्थान सरकार श्री देवीसिंह भाटी ने कहा कि ओरण को डीम्ड फॉरेस्ट में नहीं बदला जावे, इसके लिए हमें कड़ा संघर्ष करना पड़ेगा। हम लोगों ने आपत्तियां तो दर्ज करवा दिये, परंतु मात्र आपत्ति से बात नहीं बनेगी, हमें सड़कों पर उतरना पड़ेगा, इसके लिए पूरे राजस्थान में जन जागरण चलाया जावे और वन विभाग के इस आदेश का कड़ा विरोध किया जावे। उन्होंने लोगों को संगठन को मजबूत करने की राय दी, गौचर औरण को कैसे मुक्त किया जा सकता है, विभिन्न स्तरों पर क्या कारवाई आवश्यक है, जन चेतना कैसे जागृत हो सकती है, राजनैतिक और प्रशासनिक स्तर पर क्या कठिनाइयां आ सकती है, पर जोर दिया । हर गांव के जागरूक लोगों को गौचर औरण मुक्ति में आगे आने का आह्वान किया । श्री भाटी ने सिंवांची गेट गौशाला की भव्य नंदीशाला के निर्माण में अपना योगदान देने वाले पूर्व मुख्य अभियंता मोहनलाल जैन का साफा पहनाकर सम्मान किया और गौशाला अध्यक्ष गणेश भंडारी का भी बहुमान किया ।
    कार्यक्रम में जुगतसिंह करनोत, आईवीर सिंह पातावत, बृजमोहन चारण,लोकमित्र, हरनारायण सोनी, ललित जैन, हेमंत सिंघवी, वासुदेव देपावत, बालूराम परबतसर, आदि वक्ताओं ने भी अपने विचार रखे । कार्यक्रम के अंत में नंदीशाला सचिव प्रदीप खिंवसरा ने धन्यवाद ज्ञापित किया । मंच संचालन श्याम चौबीसा ने किया । सम्मेलन में, प्रेम सिंह गुमांडा राजेंद्र सिंह किल्चु,मोहन सिंह बागोड, ओमपाल सिंह प्रताप सिंह राठौड़ चंदवीर सिंह, ईश्वर जी ईश्वर बागला बूंदी, महावीर सिंह राठौड़ टोंक, खेमराज यादव कोटा, देवी सिंह चौहान डूंगरपुर शैलेंद्र शर्मा उदयपुर ललित जैन, रंजीत जैन हेमंत सिंघवी,सहित सैकड़ों लोग उपस्थित रहे ।

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Gordhan Soni

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