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जैनाचार्य व मुनिवृंद कृतज्ञता समारोह में कार्यकर्ताओं का अभिनंदन

मेड़ता के लिए जैनाचार्य आदिठाणा का विहार आज

बीकानेर, 02 दिसम्बर। जैन श्वेताम्बर खरतरगच्छ संघ के जैनाचार्य जिन पीयूष सागर सूरीश्वर महाराज आदि ठाणा का कृतज्ञता समारोह का द्वितीय चरण सोमवार को रांगड़ी चौक में चातुर्मास में सेवाएं देने वाले कार्यकर्ता श्रावकों के अभिनंदन के बाद संपन्न हुआ।
जैनाचार्य मंगलवार को सुबह छह बजे नाहटा चौक के सुपार्सनाथ मंदिर के चल प्रतिष्ठा करवाने के बाद बाद वे अपने सहवृति 10 मुनियों के साथ मंगलवार को सुबह पौने दस बजे नाहटा चौक के आदिश्वरजी के मंदिर में दर्शन वंदन कर मेड़ता-ओस्तरा के लिए विहार करेंगे।
इससे पूर्व श्री सुगनजी महाराज का उपासरा ट्रस्ट के मंत्री रतन लाल नाहटा, श्री जिनेश्वर युवक परिषद के अध्यक्ष संदीप मुसरफ, मंत्री मनीष नाहटा आदि ने अखिल भारतीय खरतरगच्छ महासंघ के अध्यक्ष जयपुर के रिखब चंद जैन झारचूड़, गौरव सावनसुखा, प्रवीण डागा, संजय झाबक, जय कुमार पारख, विपिन मुसरफ व समाजसेवी विमल कोचर मुका भाईजी आदि का स्मृति चिन्ह आदि से अभिनंदन किया।
कृतज्ञता समारोह में जैनाचार्य जिन पीयूष सागर सूरीश्वरजी महाराज ने कहा कि चातुर्मास के बाद अपनी दृष्टि में परिवर्तन करें। दृष्टि से सृष्टि बदलती है। दृष्टि को देव, गुरु व धर्म के प्रति सकारात्मक बनाएं । विषय का विस्तार करते हुए बीकानेर के मुनि सम्यक रतन सागर महाराज ने कहा कि चातुर्मास काल में जैनाचार्य, मुनि व साध्वीवृंद धर्म-आध्यात्म के वाहन के चालक के रूप् में श्री संघ व समाज को सेवाएं देते है। चालक के साथ धर्म वाहन में सवार सभी श्रावक-श्राविकाओं का दायित्व रहता है कि वे भी सजग रहकर चिंतन, मनन करते धर्म आध्यात्म के मार्ग पर आगे बढ़े। उन्होंने बीकानेर चातुर्मास को अनुकरणीय व प्रेरणादायक बताया तथा कहा कि उनके सांसारिक पिता स्वर्गीय भीखम चंद बरड़िया सहित अनेक श्रावक-श्राविकाओं के शुभ भाव, श्री सुगनजी महाराज का उपासरा ट्रस्ट, श्री जिनेश्वर युवक परिषद, श्रीसंघ व श्रावक-श्राविकाओं, ज्ञान वाटिका के बच्चों का समर्पण ने ही वर्षावास को सफल किया है। उन्होंने आचार्यश्री, मुनि वृंद की ओर से चातुर्मास में धर्म-ध्यान, साधना-आराधना व देवगुरु की भक्ति में रही त्रुटि के लिए क्षमा याचना की।
कार्यक्रम में मुनि संवर रत्न, शाश्वत रतन, नूतन साध्वी कृतार्थ निधि श्रीजी ने चातुर्मास के संस्मरण सुनाते हुए चातुर्मास को ऐतिहासिक बताया। श्री सुगनजी महाराज का उपासरा ट्रस्ट के मंत्री रतन लाल नाहटा ने ट्रस्ट की ओर बीते वर्षों में जैनाचार्यों, मुनि व साध्वी वृंद के चातुर्मास का स्मरण दिलाया तथा जैनाचार्य जिन पीयूष सागर सूरीश्वरजी महाराज के वर्षावास के दौरान हुए कार्यक्रमों को अविस्मरणीय व ऐतिहासिक बताया।

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Gordhan Soni

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