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शिव-पार्वती विवाह में जमकर झूमें शिवगण,कथा स्थल हुआ शिवमय
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बीकानेर। श्रीराम कथा समिति के तत्वाधान में सीताराम भवन में चल रही 9 दिवसीय शिव पुराण कथा के छठे दिन वृन्दावन से पधारे महाराज भरत शरण ने कहा कि शिव पुराण कथा श्रवण व शिव भक्ति के लिए पहले अहंकार दूर करना होगा। क्योकि जब तक अहंकार होता है तक भोलनाथ प्रसन्न नहीं होते है। जिस प्रकार आदि देव महादेव को भोलेनाथ कहा जाता है उसी उनको भक्त भी भोले पसंद है। जब तक अहंकार दूर नहीं होगा तब तक शिव की भक्ति प्राप्त होना कठिन है। महाराजश्री ने कहा कि जहां पर सूक्ष्म दृष्टि होती है। वहां विघ्न नहीं होता है और जहां विघ्न बाधा न हो तो वहीं ऋद्धि-सिद्धि और शुभ लाभ का सदैव आगमन होता है।सत्कर्म करने के साथ मानव को अपने मोक्ष की तैयारी भी इसी जीवन में करना चाहिए। उन्होंने कहा कि धार्मिक कथाओं में जो जीवन जीने का पाठ पढ़ाया है,उसे आत्मसात कर मनुष्य अपना जीवन जीता है तो उसे किसी भी प्रकार के कठिन समय में भी परेशान नहीं होना पड़ता है। वह समय भी उसका हंसते खेलते गुजर जाता है। मानव की प्रवृति पर कहा कि मानव के वल अपना स्वार्थ देखता है और फिर दूसरों का कोई ध्यान नहीं देता,इसलिए उसका मन लोभ लालच में उलझता जाता है। इससे पहले कन्हैयालाल सारड़ा,घनश्याम सारड़ा,शारदा देवी,संजय मून्दड़ा,भावना,ओम प्रकाश लोहाटी,सौरभ व राजा चांडक ने विधि विधान से पोथी पूजन करवाया। कथा में वाद्य यंत्रों पर सोनू बाबा,विष्णु तिवारी तथा बंटी महाराज ने शानदार भजनों की प्रस्तुति दी। संपूर्ण पंडाल को भक्ति पूर्ण भाव से वातावरण बनाया। इस अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु कथा का श्रवण करने पहुंचे और अंत में महा आरती कर प्रसाद वितरण भी किया।


शिव पार्वती विवाह में जमकर नाचे शिवगण व श्रद्धालु
कथा के दौरान शिव-पार्वती विवाह की झांकी का दृश्य मनोरम रहा। शिव की बारात में न के वल शिव के गण बल्कि उपस्थित श्रद्धालु भी जमकर नाचे। मंत्रोचारण के साथ शिव-पार्वती का विवाह सम्पन्न हुआ। संजय मून्दड़ा ने शिव,भावना मून्दड़ा पार्वती,घनश्याम सारड़ा विष्णु,मोहित चांडक इन्द्रदेव,विष्णु चांडक नारद व खुश चांडक नंदी की भूमिका निभाई।

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Prakash Samsukha

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