Bikaner Live

* हिंदी पत्रकारिता दिवस पर विशेष आयोजन -पत्रकार अगर भाषा से चूके, तो भरोसे से भी चूकेंगे – डॉ. आचार्य*

*पत्रकारिता पेशा ही है, लेकिन पेशे की लेकिन पेशेवर नेतीकता जरूरी : डॉ. नन्दकिशोर आचार्य*

*एडिटर्स एसोसिएशन ऑफ न्यूज पोर्टल बीकानेर तथा बीकानेर प्रौढ़ शिक्षण समिति के तत्वावधान मे मनाया हिन्दी दिवस*

बीकानेर प्रेस क्लब के नवनिर्वाचित पदाधिकारी का सम्मान
सामाजिक संस्थाओं से जुड़ी महिलाओं का सम्मान…..

*बीकानेर, 30 मई 2025।* पत्रकारिता निःसंदेह एक पेशा है, और इसमें कोई संकोच या शर्म की बात नहीं होनी चाहिए। लेकिन साथ ही उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि जैसे हर व्यवसाय में नैतिकता आवश्यक होती है, वैसे ही पत्रकारिता में भी पेशेवर नैतिकता की अनिवार्यता और प्रासंगिकता सबसे अधिक है। उन्होंने कहा कि पत्रकारिता केवल रोज़ी-रोटी का ज़रिया नहीं, बल्कि समाज के प्रति एक जवाबदेही है, जिसमें सच को बेझिझक कहने का साहस और भाषा की मर्यादा दोनों आवश्यक हैं। पेशे के रूप में पत्रकारिता तभी सार्थक मानी जाएगी जब उसमें ज्ञान, संवेदना और ईमानदारी की नींव पर खड़ा नैतिक बोध मौजूद हो। यह उद्गार आज डॉ नन्द किशोर आचार्य ने हिन्दी दिवस पर आयोजित “हमारा समय और हिन्दी पत्रकारिता” पर आयोजित संवाद कार्यक्रम मे कहे।

हिंदी पत्रकारिता दिवस के अवसर पर “हमारा समय और हिंदी पत्रकारिता” विषय पर संवाद कार्यक्रम का आयोजन बीकानेर एडिटर एसोसिएशन ऑफ न्यूज पोर्टल्स और बीकानेर प्रौढ़ शिक्षण समिति के संयुक्त तत्वावधान में हुआ। कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रख्यात साहित्यकार, कवि, समालोचक और चिंतक डॉ. नंदकिशोर आचार्य ने की, जबकि वरिष्ठ पत्रकार श्री हेम शर्मा मुख्य अतिथि और समिति की उपाध्यक्ष श्रीमती विभा बंसल विशिष्ट अतिथि रहीं। कार्यक्रम का संयोजन एसोसिएशन के अध्यक्ष आनंद आचार्य ने किया।

पत्रकारिता का उद्देश्य केवल सूचना देना नहीं, बल्कि समाज को सजग और सचेत बनाना है। पत्रकार वही बने, जिसके पास ज्ञान हो, और अगर ज्ञान नहीं है तो उसे पहले अर्जित करें। उन्होंने आगाह किया कि पत्रकारिता को किसी ‘बाज़ारू वाणी’ की तरह प्रयोग न करें, बल्कि उसे नैतिकता की कसौटी पर परखें और जिम्मेदारी के साथ निभाए!

वरिष्ठ पत्रकार श्री हेम शर्मा ने एक भावपूर्ण पत्र के माध्यम से पत्रकारिता के बदलते स्वरूप पर चिंता जताते हुए उपस्थित जनसमुदाय को एक सशक्त संदेश दिया। उन्होंने प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया से जुड़े सभी पत्रकारों को सावधान करते हुए कहा कि पत्रकारों को मात्र उपकरण बनने से स्वयं को बचाना होगा और पत्रकारिता को एक मिशन के रूप में अपनाना होगा,
हेम शर्मा ने कहा कि आज़ादी के बाद से 80 के दशक तक का समय भारतीय पत्रकारिता का स्वर्णिम काल रहा, जहां पत्रकारों ने शिक्षा, सामाजिक चेतना, औद्योगिक विकास और रेडियो क्रांति जैसे अनेक क्षेत्रों में ऐतिहासिक योगदान दिया। लेकिन 90 के दशक में पत्रकारिता में पतन की शुरुआत हुई, जब ‘पैकेजिंग पत्रकारिता’ का दौर आया—विज्ञापन और पैसे के बदले ख़बरें तय होने लगीं। यह लोकतंत्र के चौथे स्तंभ की नींव को झकझोरने वाला समय था।इस अवसर पर एडिटर्स एसोसिएशन ऑफ न्यूज पोर्टल बीकानेर तथा बीकानेर प्रौढ़ शिक्षण समिति के पदाधिकारियों ने बीकानेर प्रेस क्लब की नव निर्वाचित कार्यकारिणी अध्यक्ष कुशाल सिंह मेड़तिया, महासचिव विशाल स्वामी, कोषाध्यक्ष गिरिराज भादानी, सदस्य मुकुंद खंडेलवाल का माल्यार्पण कर शॉल, साफ, स्मृति चिह्न देकर सम्मान कीया गया।

कार्यक्रम के दौरान संचालक आनंद आचार्य ने संवाद के लिए मंच खोला। इसमें सुमित शर्मा, बुलाकी शर्मा, सुधा आचार्य, शिव कुमार सोनी और बलदेव रंगा ने पत्रकारिता से जुड़ी विभिन्न ज्वलंत समस्याओं और संभावनाओं पर विचार रखे। आभार ज्ञापन विशिष्ट अतिथि श्री गिरिराज मोहता द्वारा किया गया।

बुलाकी शर्मा, नीरज दैया, मुकेश व्यास, जी के नागपाल, भवानी, सोलंकी,गिरीश श्रीमाली, महेश शर्मा, योगेंद्र पुरोहित, उमेश आचार्य , महेश उपाध्याय लक्ष्मी नारायण चुरा, तलत रियाज, श्री मोहन आचार्य, विष्णु दत्त मारू, सुभाष पुरोहित, महेंद्र जोशी,अर्चना सक्सेना अलका परीक, , मोनिका रघुवंशी, सहित बड़ी संख्या मे गणमान्य जन ने शिरकत की।

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दिलीप गुप्ता

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