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दुर्गा शंकर आचार्य मेमोरियल ट्रस्ट ने किया पौधारोपण,,,,

दुर्गा शंकर आचार्य मेमोरियल ट्रस्ट समय-समय पर परोपकार हेतु कार्य करता रहा है जिसमें चिड़ियों को बचाने हेतु मिट्टी के “चिड़िया महल” लगाना, पॉलिथीन मुक्त समाज हेतु कपड़े के थैलों का वितरण करना और पर्यावरण संरक्षण हेतु समय-समय पर पौधारोपण करने के कार्यों के साथ-साथ अनेक सामाजिक कार्यों का संपादन करना प्रमुख है। इसी कड़ी में वर्षा ऋतु में दुर्गा शंकर आचार्य मेमोरियल ट्रस्ट ने स्थानीय जीवणनाथ जी की बगीची में पौधारोपण किया। बगीची में मुख्य रूप से बेलपत्र और राजस्थान के राज्य वृक्ष खेजड़ी जिसे शमी भी कहा जाता है के पौधों को रोपित किया गया।
ट्रस्ट की संस्थापिका सुधा आचार्य ने बताया की शमी जिसे खेजड़ी भी कहा जाता है यह वही वृक्ष है जिसको संरक्षित करने हेतु राजस्थान की अमृता देवी ने 1730 में 363 सैनिकों सहित बलिदान दिया था और तभी से यह कहावत भी प्रचलित हो गई “सिर साठै रूंख बचे, तो भी सस्तो जाण”।
सुधा आचार्य ने बताया कि शमी वृक्ष के पत्ते भगवान शिव, मां दुर्गा और गणेश को अति प्रिय होते हैं साथ ही शनि वृक्ष की पूजा हमें शनि के प्रकोप से बचाती है।
इसी प्रकार बेलपत्र का बहुत आध्यात्मिक महत्व है इसे बिल्व पत्र भी कहा जाता है जो भगवान शिव को अत्यंत प्रिय है श्रावण मास में बेलपत्र को श्रद्धापूर्वक शिवार्पित किया जाता है।
पौधारोपण में शिवजी,दुर्गा, कनक, गुंजन, सुनीलजी,रामजी, राजपाल जी, यशपाल जी आदि ने भी सक्रिय सहयोग किया

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दिलीप गुप्ता

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