आध्यात्मिक पर्व पर्युषण अमर बनने की प्रेरणा देता है-गणिवर्य मेहुल प्रभ सागर म.सा.














बीकानेर, 21 अगस्त। गणिवर्य श्री मेहुल प्रभ सागर म.सा., मंथन प्रभ सागर, बाल मुनि मीत प्रभ सागर, साध्वी दीपमाला श्रीजी व शंखनिधि के सान्निध्य शुक्रवार को पर्वाधिराज पर्युषण पर्व के तहत भद्रबाहू स्वामी द्वारा रचित जैन समाज के प्रमुख 45 आगमों में एक दशाश्रुत स्कंध के अंश ’’ कल्पसूत्र’ का वाचन विवेचन शुरू किया जाएगा।
दसानियों के चौक के प्रकाश चन्द्र, प्रदीप, लवलीन व विकास पारख के निवास से शुक्रवार सुबह कल्पसूत्र पोथोजी को ढढ्ढा कोटड़ी गाजे बाजे से लाया जाएगा। कल्पसूत्र पोथोजी के सम्मान में दस्साणी चौक के प्रकाश पारख निवास पर शुक्रवार रात साढ़े आठ बजे भक्ति संध्या का आयोजन होगा।
सुगनजी महाराज का उपासरा ट्रस्ट, अखिल भारतीय खरतरगच्छ युवा परिषद की बीकानेर इकाई की ओर से सकल श्रीसंघ के सहयोग से आयोजित चातुर्मास में गुरुवार को चौविहार (बिना अन्न जल ) के 56 दिन की तपस्या पूर्ण करने वाले कन्हैयालाल भुगड़ी तथा अक्षय निधि व अन्य तपस्याएं करने वाले तप के तपस्वियों की अनुमोदना की गई।
प्रवचन- गणिवर्य मेहुल प्रभ सागरजी म.सा. ने गुरुवार को प्रवचन में कहा कि पर्युषण अमर बनने की प्रेरणा देता है। राग-द्वेष का त्याग त्यागकर प्राणीमात्र के प्रति मैत्री, करुणा, दया व अहिंसा का भाव रखता है तथा क्षमा कर आत्मा को पवित्र बनाता है, वह अमर होता है। उन्हांने कहा कि आठ कर्म (ज्ञानावरणीय, दर्शनावरणीय, वेदनीय, मोहनीय, आयुष्य, नाम, गोत्र व अंतराय कर्म ) आत्मा को बांधते है तथा मोक्ष के मार्ग में बाधा बनते है। ज्ञानावरणीय कर्म आत्मा के ज्ञान गुण को ढक लेता है, जिससे आत्मा ज्ञान प्राप्त करने में असमर्थ होती है। दर्शनावरणीय कर्म आत्मा के दर्शन गुण को ढक लेता है, जिससे आत्मा देखने, सुनने, आदि इंद्रिय ज्ञान प्राप्त करने में असमर्थ होती है। वेदनीय कर्म में आत्मा को सुख और दुख का अनुभव कराता है। मोहनीय कर्म आत्मा में मोह, राग,द्वेष आदि उत्पन्न करता है जिससे वह अपने आत्म स्वरूप् को भूलजाता है। आयुष्य कर्म आत्मा के जीवन काल को निर्धारित करता है, यानि वह किस योनी में कितन समय तक रहेगी। नाम कर्म आत्मा के शरीर और अंगों की रचना करता है। गोत्र कर्म आत्मा के उच्च या नीच कुल में जन्म लेने का कारण बनता है। अंतराय कर्म लाभ, दान आदि में बाधा डालता है।
गणिवर्य ने कहा कि इन आठ कर्मां में से ज्ञानावरणीय, दर्शनावरणीय, मोहनीय और अंतराय कर्म को घातिया कर्म माना जाता है, क्योंकि ये आत्मा के गुणों का ज्ञात करते है। वेदनीय, आयुष्य, नाम व गौत्र अघातिया कम कहलाते है, क्योंकि ये आत्मा के गुणों का घात नहीं करते । जैन धर्म में इन आठ कर्मों से छुटकारा पाना ही मोक्ष का मार्ग है।
तपागच्छीय पौषधशाला-रांगड़ी चौक की तपागच्छीय पौषधशाला में जैन श्वेताम्बर खरतरगच्छ संघ की साध्वीश्री शंखनिधि के सान्निध्य में 8 दिन की तपस्या करने वाले बालक कृष्णा बैद का अभिनंदन वरिष्ठ श्रावक विजय कोचर, सुरेन्द्र बद्धाणी व मंदिर पदम प्रभु ट्रस्ट के संयुक्त सचिव अजय सेठिया ने किया। साध्वीश्री ने श्रावक-श्राविकाओं के वार्षिक कर्तव्यों यथा साधार्मिक भक्ति, तीर्थ यात्रा, स्नात्रर महोत्सव, देव द्रव्य वृद्धि, महापूजा, धर्म जागरण, ज्ञान पूजा, उद्यापन , तीर्थ प्रभावना, प्रायश्चित व आलोचना का विस्तृत वर्णन किया।
रामपुरिया उपासरा-जैन श्वेताम्बर पार्श्वचन्द्र गच्छ की साध्वीश्री पदम् प्रभा व सुव्रताश्रीजी के सान्निध्य में गुरुवार को पर्युषण पर्व के जप, तप, जिनालय दर्शन वंदन, सामायिक व प्रतिक्रमण आदि अनुष्ठान शुरू हुए। प्रथम दिन साध्वीश्री सुव्रता श्रीजी ने पर्युषण पर्व के महत्व पर विस्तृत जानकारी दी तथा कहा कि काम,का्रेध, लोभ व मोह आदि कषायों, पापकर्मों से बचे तथा पुण्यों का अर्जन करें। जिन शासन के बताए मार्ग पर चलें।
कलश की शोभायात्रा-
बीकानेर के मुनि सम्यक रतन सागर के नेतृत्व में अजमेर में दादा जिनदत्त सूरी की दादाबाड़ी के जीर्णोंद्धार का मुर्हूत 4 सितम्बर को है। जिनेश्वर युवक परिषद के अध्यक्ष संदीप मुसरफ व मंत्री मनीष नाहटा ने बताया कि कलश की शोभायात्रा गुरुवार को रांगड़ी चौक के सुगनजी महाराज के उपासरे से विभिन्न जैन बहुल्य मोहल्लों से तथा आदिनाथजी, चिंतामणिजी आदि जिनालयों के आगे से निकाली गई। कलश को लाभार्थी प्रमोदजी, ललितजी खजांची बग्गी में लेकर बैठे थे। कलश की मार्ग में अनेक स्थानों पर तथा उपासरे में रतन लाल नाहटा, महावीर खजांची सहित अनेक वरिष्ठ श्रावक-श्राविकाओं ने वंदना की तथा कलश में अपना अंशदान डाला। कलश को लेकर गुरुवार को ही जिनेश्वर युवक परिषद के पदाधिकारियों के साथ धीरज बरड़िया, धीरज खटोल, मालचंद बेगानी, पुनेश मुसरफ, अंकित गुलगुलिया आदि श्रावक अजमेर में दादाबाड़ी में प्रतिष्ठा में उपयोग के लिए लेकर अजमेर रवाना हो गए। कलश के तीन दिन प्रवास के दौरान सुगनजी महाराज के उपासरे में बड़ी संख्या में श्रावक-श्राविकाओं ने दर्शन वंदन किया। भक्ति संगीत कार्यक्रम आयोजित किया गया।
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विश्व बंधुत्व दिवस पर रक्तदान शिविर कल
बीकानेर, 21 अगस्त। प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय की राजयोगिनी दादी प्रकाशमणि की पुण्य स्मृति में विश्वविद्यालय के समाज सेवा प्रभाग की प्रेरणा से शुक्रवार को रानीसर बास के पारसमणि स्कूल के पास रक्तदान शिविर आयोजित किया जाएगा। पी.बी.एम.अस्पताल की रक्त बैंक के चिकित्सक व टेक्नीशियन की टीम रक्त का संकलन करेंगी।












