बीकानेर, 29 अप्रैल। किसानों में उर्वरकों के संतुलित एवं वैज्ञानिक उपयोग को बढ़ावा देने के उद्देश्य से कृषि विज्ञान केंद्र (केवीके), बीकानेर के सहयोग से एक व्यापक जागरूकता अभियान आयोजित किया गया। कार्यक्रम में लगभग 70 किसानों ने सक्रिय भागीदारी निभाई।
कार्यक्रम के दौरान डॉ. अनीता मीणा, वरिष्ठ वैज्ञानिक ने मृदा परीक्षण के महत्व, मृदा पोषक तत्वों की रेटिंग, प्रमुख फसलों के लिए अनुशंसित पोषक तत्व मात्रा तथा मृदा परीक्षण आधारित उर्वरक सिफारिशों पर विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि संतुलित एवं आवश्यकता आधारित उर्वरक उपयोग से न केवल फसल उत्पादन में वृद्धि होती है, बल्कि मृदा की उर्वरता भी लंबे समय तक बनी रहती है।
डॉ. एम. के. जाटव, प्रधान वैज्ञानिक ने संतुलित उर्वरक उपयोग एवं एकीकृत पोषक तत्व प्रबंधन (INM) पर विस्तार से जानकारी देते हुए रासायनिक उर्वरकों के साथ जैविक स्रोतों जैसे गोबर की खाद, कम्पोस्ट एवं सूक्ष्म पोषक तत्वों के समन्वित उपयोग पर जोर दिया। उन्होंने उर्वरकों की दक्षता बढ़ाने एवं पोषक तत्वों की हानि कम करने के उपाय बताए।
वहीं, डॉ. मदन लाल रेगर, वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं प्रमुख, केवीके बीकानेर-1 ने जैव उर्वरकों की भूमिका पर प्रकाश डालते हुए कहा कि राइजोबियम, एजोटोबैक्टर एवं फॉस्फेट घुलनशील जीवाणु (PSB) के उपयोग से फसल उत्पादन बढ़ाया जा सकता है तथा रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम की जा सकती है। उन्होंने पर्यावरण अनुकूल उपायों के माध्यम से रासायनिक उर्वरकों के अत्यधिक उपयोग को कम करने के व्यावहारिक सुझाव भी दिए।
इस अभियान के माध्यम से किसानों में उर्वरकों के संतुलित एवं आवश्यकता आधारित उपयोग के प्रति जागरूकता बढ़ी। यह कार्यक्रम सतत कृषि को बढ़ावा देने, मृदा स्वास्थ्य सुधारने एवं फसल उत्पादकता बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण साबित हुआ।













