आवारा कुत्तों व गोवंश के आतंक से निजात दिलाने को लेकर न्यायालय में वाद दायर नगर निगम एवं जिला कलेक्टर को नोटिस जारी
बीकानेर ।
शहर में लगातार बढ़ रहे आवारा कुत्तों एवं खुले घूम रहे गोवंश के कारण हो रही दुर्घटनाओं, गंभीर चोटों एवं जनहान ि की घटनाओं को लेकर बीकानेर के सिविल न्यायाधीश संख्या 3 के न्यायालय में प्रस्तुत वाद पर संज्ञान लेते हुए नगर निगम एवं जिला कलेक्टर को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है। यह चिरस्थाई निषेधाज्ञा एवं आज्ञापक व्यादेश का वाद परिवादी अशोक कुमार व्यास, केशव व्यास, एडवोकेट्स सहित अन्य की ओर से अधिवक्ता महेश व्यास एवं नरेश आचार्य द्वारा न्यायालय में प्रस्तुत किया गया। इस वाद में शहर की सड़कों, कॉलोनियो ं एवं सार्वजनिक स्थलों पर आवारा कुत्तों के बढ़ते हमलों तथा खुले घूम रहे गोवंश के कारण आमजन को हो रही क्षति एवं जान माल के नुकसान की ओर न्यायालय का ध्यान आकृष्ट कराया गया।
वाद के दौरान वकील परिवादी ने प्रस्तुत दस्तावेजो ं के जरिये बताया गया कि पीबीएम अस्पताल, बीकानेर में आरटीआई के तहत प्राप्त जानकारी के अनुसार हर माह औसतन 300 से 400 लोग आवारा कुत्तों के काटने का शिकार हो रहे हैं। ये केवल रिपोर्टेड आंकडे है, यद ि गैर- रिपोर्टेड मामलों को भी जोडा जाए तो यह संख्या लगभग 700 है। ना तो कोई व्यक्ति रात्रि मे ं सुरक्षित निकल सकता है और ना ही घरों के बाहर छोटे बच्चे और महिलाए ं इन आवारा कुत्तों और गोवंशो ं से सुरक्षित रह सकती है। न्यायालय में दैनिक अखबार में प्रकाशित खबरों को प्रस्तुत कर दलील दी गई कि अनके मामलो ं में गंभीर चोटें, स्थायी विकलांगता और वहीं कुछ मामलो ं मे ं मृत्यु तक कारित हो जाती है और रात्रि के समय एवं व्यस्त मार्गों पर अचानक गोवंश के आ जान े से वाहन चालकों को गंभीर हादसो ं का सामना करना पड़ रहा है, जिसस े जान माल का नुकसान हो रहा है। परिवादी पक्ष ने नगर निगम की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि आवारा पशुओं की रोकथाम, नसबंदी, शेल्टर होम की व्यवस्था एवं गोवंश प्रबंधन नगर निगम की वैधानिक जिम्मेदारी है, लेकिन इस दिशा में प्रभावी कदम नही ं उठाए जा रहे हैं। न्यायालय ने परिवादी द्वारा प्रस्तुत दस्तावेजों, न्यूज पेपर रिपोर्ट्स एवं आरटीआई के माध्यम से प्राप्त तथ्यों को गंभीरता से सुनते हुए नगर निगम बीकानेर एवं जिला प्रशासन को नोटिस जारी किया है। मामले की अगली सुनवाई 6 मार्च को नियत की गई है। इस जनहित याचिका के वाद से आमजन में रूल ऑफ कोर्ट की एक आशा की किरण निश्चित रूप से जागृत होती है कि शायद अब शहर को आवारा कुत्तों एवं खुले गोवंश के आतंक से शीघ्र राहत मिलेगी और प्रशासन इस दिशा में ठोस एवं प्रभावी कदम उठाएगा।


























