
राष्ट्र निर्माण में शिक्षा की भूमिका महत्वपूर्ण, शैक्षणिक विकास में सहयोग देने वालों का योगदान सराहनीय: जिला कलक्टर
बीकानेर, 29 जून। तीसवां जिला स्तरीय भामाशाह सम्मान समारोह सोमवार को जिला परिषद सभागार में आयोजित हुआ। समारोह के दौरान 13 भामाशाहों और 9 प्रेरकों का सम्मान किया गया।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि जिला कलक्टर श्री निशान्त जैन थे। उन्होंने कहा कि राष्ट्र निर्माण में शिक्षा की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण होती है। वहीं शिक्षा के विकास में सहयोग देना अपने आप में अनुकरणीय है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार द्वारा 30 वर्षों से ऐसे भामाशाहों का सम्मान किया जाता है। इससे दूसरों को प्रेरणा मिलती है। उन्होंने कहा कि मां के बाद शिक्षक ही ऐसा व्यक्ति होता है, जो अपने शिष्य को खुद से बेहतर बनाने का काम करता है। हमें ऐसे शिक्षकों के प्रति कृतज्ञ होना चाहिए।
जिला कलक्टर ने कहा कि बीकानेर में भामाशाहों की लम्बी श्रृंखला है। इनमें से अनेक लोग शिक्षा के क्षेत्र में अपना सहयोग दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि आगामी सालों में इस संख्या में और अधिक इजाफा करने के प्रयास हो। उन्होंने प्रेरकों की भूमिका को भी महत्वपूर्ण बताया। जिला परिषद की मुख्य कार्यकारी अधिकारी श्रीमती शैलजा पांडे ने कहा कि बच्चों का शिक्षा का बेहतर वातावरण मिलेगा तो वे और अधिक अच्छा परिणाम दे सकेंगे। उन्होंने आह्वान किया कि बेटियों को भी शिक्षा के भरपूर अवसर दें।
माध्यमिक शिक्षा निदेशालय की संयुक्त निदेशक डाॅ. सुनीता चावला ने बताया कि राज्य सरकार द्वारा प्रतिवर्ष एक करोड़ या इसे अधिक राशि का सहयोग करने वाले भामाशाहों को शिक्षा विभूषण, 30 लाख या इससे अधिक और एक करोड़ से कम राशि का सहयोग करने वालों को राज्य स्तर पर शिक्षा भूषण सम्मान से सम्मानित किया जाता है। इसी प्रकार एक लाख से लेकर 29 लाख 99 हजार 999 रुपए का सहयोग करने वालों को जिला स्तर पर शिक्षा श्री सम्मान दिया जाता है। इसी प्रकार 50 लाख से अधिक राशि के योगदान के लिए भामाशाह को प्रेरित करने वाले प्रेरक को राज्य तथा 5 से 50 लाख रुपए तक की राशि के योगदान के लिए भामाशाह को प्रेरित करने वाले प्रेरक को जिला स्तर पर सम्मानित किया जाता है।
जिला शिक्षा अधिकारी श्री किशन दान चारण ने बताया कि प्रदेश में भामाशाहों द्वारा अब तक 1155.48 करोड़ तथा इस वर्ष 318 करोड़ रुपए शैक्षणिक उन्नयन के लिए दान किया गया है। उन्होंने बताया कि इस बार प्रदेश स्तर पर 154 भामाशहों और 99 प्रेरकों को सम्मानित किया गया है। उन्होंने स्वागत उद्बोधन दिया और कार्यक्रम की रूपरेखा बताई।
श्री श्याम पंचारिया ने कहा कि भामाशाहों और प्रेरकों का सम्मान श्रेष्ठ परम्परा है। इससे दूसरों को प्रेरणा मिलती है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री श्री भजन लाल शर्मा के नेतृत्व में प्रदेश में शैक्षिक उन्नयन की दिशा में उल्लेखनीय कार्य किया जा रहा है। भामाशाहों और दानदाताओं के सहयोग से इसमें और अधिक गति आई है।
डाॅ. सत्यप्रकाश आचार्य ने कहा कि राजस्थान भामाशाहों और दानदाताओं का प्रदेश है। सदियों पूर्व भामाशाह द्वारा दिया गया दान और उनकी दानशीलता देश और दुनिया में विशेष पहचान रखती है। उन्होंने कहा कि शिक्षा के लिए दिया गया दान कभी निष्फल नहीं जाता।
शिक्षा विभाग के पूर्व संयुक्त निदेशक डाॅ. विजय शंकर आचार्य ने कहा कि अपनी कमाई के धन को परहित, विशेषकर बच्चों की शिक्षा के लिए व्यय करना अत्यंत पुण्यदायी और फलदाई होता है। इसके लिए सभी भामाशाह साधुवाद के पात्र हैं। इससे पहले जिला कलक्टर सहित सभी अतिथियों ने मां सरस्वती और भामाशाह के चित्र के समक्ष दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम की शुरूआत की।
*इन भामाशाहों और प्रेरकों का हुआ सम्मान*
कार्यक्रम के दौरान श्री अनिल कुमार गोरा, श्री बजरंग लाल राघानी, श्री बलजीत सिंह बाजवा, श्री चंद्रेश हर्ष, श्री मंगतूराम जोशी, श्री पूनम चंद सुथार, श्रीमती रचना शर्मा, श्री रामलाल, श्री रामलक्ष्मण गोदारा, श्री संजय कुमार, श्रीमती सीमा शर्मा, श्री सिराजुद्दीन और श्री सुरेन्द्र कुमार को भामाशाह के रूप में सम्मानित किया गया। इसी प्रकार प्रेरक के रूप में श्री मनेाज कुमार, श्री किशनाराम कांटिया, श्री भंवर सिंह बीका, श्री सांवरमल गोदारा, श्री बहादुर सिंह, श्री पवन कुमार मोदी, श्री रामस्वरूप जोशी, श्री श्रीकृष्ण चौधरी और श्रीमती सुनीता चौधरी को प्रेरक के रूप में सम्मान दिया गया।
*इनकी रही मौजूदगी*
कार्यक्रम के दौरान सेवानिवृत्त संयुक्त निदेशक डाॅ. ओमप्रकाश सारस्वत, मुख्य जिला शिक्षा अधिकारी डाॅ. महेन्द्र शर्मा, एडीपीसी श्री कृष्णकुमार बिश्नोई, उप जिला शिक्षा अधिकारी श्री अनिल बोड़ा, श्री रवि आचार्य सहित अनेक लोग मौजू रहे। कार्यक्रम का संचालन श्री चंडीदान चारण ने किया।














