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पर्युषण के रंग ज्ञान ध्यान के संग आदि धार्मिक-आध्यात्मिक कार्यक्रम 8 सितम्बर से

बीकानेर, 05 सितम्बर। अखिल भारतीय साधुमार्गी जैन संघ के हुक्म संघ के नवम पट्टधर आचार्यश्री रामलालजी, उपाध्याय प्रवर राजेश मुनि व बीकानेर सहित देश के विभिन्न इलाकों में चातुर्मास कर रहे मुनि व साध्वीवृंद के सान्निध्य में पर्युषण पर्व पर 8 से 15 सितम्बर तक पर्युषण के रंग ज्ञान ध्यान के संग’ सहित अनेक धार्मिक-आध्यात्मिक आयोजन अखिल भारतवर्षीय साधुमार्गी युवा संघ के तत्वावधान में होगी। बड़ी संख्या में श्रावक-श्राविकाएं 7 सितम्बर से  9 दिन की तपस्याएं शुरू करेंगे।
नौ दिन की तपस्याएं 7 से 15 सितम्बर तक
साधुमार्गी सेवा समिति के मीडिया प्रभारी अमित गोलछा ने बताया कि 7 से 15 सितम्बर को कर्म निर्जरा व आत्म कल्याण के लिए 9 दिन की तपस्या करने वालों को चारित्रआत्माओं ने 6 सितम्बर रविवार को सूर्यास्त से पहले ही चौविहार तप के साथ तपस्या शुरू करने का सुझाव दिया है।
पर्युषण पर्व के दौरान राष्ट्रीय स्तर पर प्रतियोगिता
श्री अखिल भारतवर्षीय साधुमार्गी जैन संघ के तत्वावधान में समता युवा संघ की ओर से पर्युषण पर्व पर ’पर्युषण पर्व के रंग ज्ञान, यान के संग ’’प्रतियोगिताएं आयोजित की जाएगी। श्री साधुमार्गी सेवा समिति के कार्यवाहक अध्यक्ष सुरेन्द्र दस्साणी, मंत्री सुरेश बच्छावत व समता युवा संघ के मंत्री अंकित बांठिया ने बताया कि  ’’कर्म स्वरूप व कर्मबंध और हमारा जीवन’’ विषय के तहत 8 सितम्बर को ज्ञानावरणीय व दर्शनावरणीय कर्म, 9 सितम्बर को वेदनीय कर्म, 10सितम्बर को मोहनीय कर्म, 11 सितम्बर को आयुष्य कर्म, 12 सितम्बर को नाम कर्म, 13 सितम्बर को गोत्र कर्म, 14 सितम्बर को अंतराय कर्म पर तथा 15 सितम्बर को सम्पूर्ण विषयों की परीक्षा होगी। अंतिम दिन 15 सितम्बर को  40 से अधिक अंक प्राप्तकरने वाले सभी परीक्षार्थियों को डिजिटल प्रमाण पत्र दिया जाएगा। किसी भी आयु वर्ग के इच्छुक श्रावक-श्राविकाएं इसमें हिस्सा ले सकेंगे।
श्री साधुमार्गी सेवा समिति के अध्यक्ष कन्हैयालाल बैद ने बताया कि प्रतियोगिता में प्रथम पुरस्कार 11 हजार एक रुपया, द्वितीय पुरस्कार 7 हजार एक, तृतीय पुरस्कार 5 हजार एक रुपए प्रदान किया जाएगा। राष्ट्रीय स्तर पर चयनित 61 प्रतिभागियों को 301 रुपए का प्रोत्साहन पुरस्कार सहित 100 पुरस्कार दिए जाएंगे। आंचलिक स्तर पर प्रथम को 11सौ एक, द्वितीय को 701व तृतीय को 501 का नकद पुरस्कार दिया जाएगा । सभी प्रश्नो के उतर साधुमार्गी संघ की मान्यताओं के अनुरूप् मान्य होंगे।  (कर्म स्वरूप….कर्मबंध और हमारा जीवन) जैन पाठ्यक्रम के अनुसार प्रश्नो के उतर देने होंगे।
समता युवा संघ के अध्यक्ष दिव्येश सुखलेचा ने बताया कि  प्रश्न पर देश की विभिन्न स्थानों की समता युवा संघ, साधुमार्गी संघ अध्यक्ष व मंत्री से प्राप्त किए जा सकेंगे। दिनांक 8 से 14 सितम्बर तक के पेपर स्थानीय स्तर पर जांचें जाएंगे व 15 सितम्बर के पेपर राष्ट्रीय स्तर पर जांचे जाएंगे व परिणाम जारी किए जाएंगे।
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फ्रेण्डस क्लब संस्था के कार्यालय का उद्घाटन आज
बीकानेर, 5 सितम्बर। रामदेवरा पैदल यात्रियों के लिए फ्रेण्डस क्लब सेवा संस्थान पाबू चौक गंगाशहर के मुख्य कार्यालय का उद्घाटन रविवार को सुबह नौ बजे चौक के ही रामदेवजी मंदिर परिसर में नगर विकास न्यास के पूर्व अध्यक्ष महावीर रांका के भाई समाज सेवी, जैन यूथ क्लब के कार्यालय के लिए भूमि दान करने वाले दानवीर  हनुमान मल रांका, सोनी समाज युवा अध्यक्ष मदन लावट सोनी व गंगाशहर के गणमान्य नागरिक के आतिथ्य में होगा।  संस्थान के कोषाध्यक्ष जय किशन सोनी (रोडा) ने बताया कि रामदेवरा पैदल यात्रियों के लिए बीकानेर से 110 किलोमीटर दूर  भव्य सेवा शिविर लगाया जाएगा जिसमें पैदल यात्रियों को चाय, नाश्ता, भोजन, विश्राम, स्नान व चिकित्सा आदि की सुविधा सुलभ करवाई जाएगी। 
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खतूरिया कॉलोनी के मन मंदिर में
मथुरा के कलाकरों व स्थानीय महिलाओं ने की रास लीला
बीकानेर, 5 सितम्बर। शिवबाड़ी के लालेश्वर महादेव मंदिर के अधिष्ठाता स्वामी विमर्शानंद गिरि महाराज च उनके गुरुभाई संवित् सच्चिदानंद गिरि महाराज के आतिथ्य में खतूरिया कॉलोनी के मनमंदिर में शुक्रवार को जन्माष्टमी पर शाम से देर रात तक  विविध आयोजन हुए। पंचामृत से भगवान कृष्ण का स्नान करवाकर बेसकीमती आभूषणों व वस्त्रों का श्रृंगार किया गया। भगवान कृष्ण की लीलाओं, 12 ज्योतिलिंग, भगवान जगन्नाथ, बलभद्रजी व देवी सुभद्राजी की विशेष झांकी प्रदर्शित की गई। मंदिर में विशेष रोशनी की गई।
मंदिर के संस्थापक सुरेश गुप्ता ने बताया कि शिवबाड़ी, व्यास कॉलोनी, पवनपुरी, शास्त्री नगर व खतूरिया कॉलोनी के बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने झांकियों के दर्शन किए तथा मथुरा के कलाकारों व स्थानीय महिलाओं की ओर से प्रस्तुत रास लीला में भक्ति गीतों के साथ नृत्य व रास लीला की । अनेक बालक-बालिकाओं ने भगवान कृष्ण व राधा का स्वरूप् धारण किया। मथुरा के भजन गायक नारायण की भजन मंडली ने ब्रज, हिन्दी व राजस्थानी भाषा में भगवान कृष्ण के भजनों की प्रस्तुतियां सचेतन झांकियों के साथ दी। खतूरिया कॉलोनी की महिलाओं ने भी कान्हा के भजनों को गाते हुए श्रीमती रेखा गुप्ता के नेतृत्व में रास-लीला के भक्ति नृत्यों की प्रस्तुतियां दी। मंदिर के पुजारी  तरुण सेवग ने भगवान कृष्ण व मंदिर के देवी-देवताओं का पूजन मंत्रोच्चारण के साथ किया।
स्वामी विमर्शानंद गिरि महाराज ने प्रवचन में कहा कि जनमाष्टमी अन्याय पर न्याय, असत्य पर सत्य, दुरुचार पर सदाचार की जीत का पर्व है।  भगवान श्री कृष्ण का जन्म रात्रि में इसलिए होता है जब समाज में अत्यधिक अंधेरा छा जाता है, तब ज्ञान के प्रकाश को फैलाने व धर्म की रक्षा के लिए अधर्म के नाश के लिए  एक दैदीप्यमान नक्षत्र मानवीय काया में आकर अपनी कथनी और करनी से समाज के हर वर्ग को आकर्षित एवं प्रभावित करता है। अधर्म का नाश व धर्म की रक्षा करता है। श्रीकृष्ण का मतलब सबको आकर्षित करने वाला, धर्म की रक्षा करने वाला होता है। दोनों महात्माओं का गुप्ता परिवार व मंदिर के पुजारी तथा कार्यक्रम में उपस्थित गणमान्य लोगों ने स्वागत वंदन किया।
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प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय में
सचेतन झांकियों के दर्शनार्थ श्रद्धालुओं की कतार
बीकानेर, 5 सितम्बर। प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय के क्षेत्रीय सेवा केन्द्र सादुल गंज में  शुक्रवार को जन्माष्टमी पर बीकानेर में सर्वश्रेष्ठ सचेतन झांकियां प्रदर्शित की गई। झांकियों के दर्शन के लिए श्रद्धालुओं की शाम आठ बजे से लेकर रात बारह बजे तक श्रद्धालुओं की कतार लगी थी। सेवा केन्द्र में विशेष रोशनी की सजावट की गई।
क्षेत्रीय केन्द्र प्रभारी बी.के.कमल ने बताया कि भगवान विष्णु, कुरुक्षेत्र में भगवान श्री कृष्ण, अर्जुन के रथ का सारथी बने हुए, कंस दरबार,  सुदर्शन चक्रधारी भगवान श्री कृष्ण, भगवान कृष्ण की बाल लीलाओं की झांकियां प्रदर्शित की गई। झांकियों में करीब 25 बालक-बालिकाओं व युवतियांं ने हिस्सा लिया। अनेक दर्शनार्थियों ने सेवा केन्द्र के आध्यात्मिक संग्रहालय को देखा तथा सराहा।
सेवा केन्द्र प्रभारी बी.के.कमल ने कहा कि श्री कृष्ण जन्माष्टमी केवल ऐतिहासिक एवं धार्मिक या पारम्परिक पर्व नहीं बल्कि स्वयं के आंतरिक परिवर्तन और कलयुग से सतयुग की और परिवर्तन का गहरा संदेश देने वाला आध्यात्मिक पर्व है। केवल श्रीकृष्ण की प्रतिमा को झूले में झुलाना, झांकियां सजाना वास्तविक रूप् से जन्माष्टमी के पर्व का मर्म नहीं है। सच्चे रूप् में जन्माष्टमी पर्व को मनाने के लिए सर्वगुण समपन्न, सोलह कला से परिपूर्ण तथा पूर्ण अहिंसक बनने के संकल्प के साथ भगवान कृष्ण की साधना, आराधना व भक्ति करनी सार्थक रहती है। हमें उनके सौन्दय और पवित्रता की प्रशंसा करते हैं तो हमें अपने विचारों और कमों में भी वैसी पवित्रता लाने के लिए प्रयास व पुरुषार्थ करना चाहिए।  वर्तमान समय संमयुग (कलयुग का अंत और सतयुग की शुरुआत) का है। श्री कृष्ण सतयुग (स्वर्ग) के पहले राजकुमार है। उनका जन्म रात के घोर अंधकार (अज्ञानता और विकारों के अंधकार) के बाद नए दिव्य संसार के उदय का प्रतीक है। जन्माष्टमी पर कंस के वध की परम्परा का निर्वहन किया जाता है। वास्तव में हमारे अंदर के विकारों (काम,क्रोध, लोभ, मोह व अहंकार) का वध करना है। आंतरिक बुराइयों पर विजय प्राप्त करने पर ही आत्मा में सत, चित आनंद स्वरूप भगवान श्री कृष्ण रूप् में जन्म लेगा तथा हम सतयुग की ओर अग्रसर होंगे।

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Shiv Soni(SK)

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