
बीकानेर बना वृंदावन धाम, भक्तों ने लिया भक्ति का आनंद
वृंदावन धाम थीम पर हुई विशेष सजावट, पंचामृत अभिषेक, 56 भोग, कीर्तन और सांस्कृतिक प्रस्तुतियां बनीं आकर्षण का केंद्र
बीकानेर। “हरे कृष्ण… हरे कृष्ण…” और “नंद के घर आनंद भयो, जय कन्हैया लाल की…” के जयघोष से 4 सितंबर को बीकानेर भक्तिमय वातावरण में सराबोर हो गया। भगवान श्रीकृष्ण के जन्म के साथ ही श्रद्धालुओं ने बधाई भजन गाकर एक-दूसरे को जन्माष्टमी की शुभकामनाएं दीं। अंतरराष्ट्रीय कृष्णभावनामृत संघ (इस्कॉन) तथा रोटरी क्लब ऑफ बीकानेर रॉयल्स के संयुक्त तत्वावधान में वृंदावन रीजेंसी होटल में भव्य श्रीकृष्ण जन्माष्टमी महोत्सव का आयोजन किया गया।
इस वर्ष आयोजन की विशेष थीम “वृंदावन धाम” रखी गई थी। इसके माध्यम से बीकानेरवासियों को शहर में ही वृंदावन जैसा आध्यात्मिक, धार्मिक और भक्तिमय वातावरण उपलब्ध कराने का प्रयास किया गया। कार्यक्रम स्थल की विशेष सजावट श्रद्धालुओं के लिए आकर्षण का प्रमुख केंद्र रही।
वृंदावन धाम की दिखी झलक
इस्कॉन बीकानेर के केंद्र प्रभारी श्रीमान संकर्षण प्रिय प्रभुजी ने बताया कि जन्माष्टमी महोत्सव को लेकर भक्तों द्वारा कई दिनों से विशेष तैयारियां की जा रही थीं। कार्यक्रम स्थल पर सजावट के माध्यम से वृंदावन धाम की सुंदर झलक प्रस्तुत की गई।
सजावट में श्री यमुना जी, भगवान श्रीकृष्ण की माखन-मटकियां तथा वृंदावन के रमणीय स्थलों को आकर्षक रूप में दर्शाया गया। पूरे परिसर को इस प्रकार सजाया गया कि श्रद्धालुओं को बीकानेर में रहते हुए भी वृंदावन धाम में भगवान श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव मनाने का अनुभव हो।
मधुर कीर्तन से शुरू हुआ भक्तिमय कार्यक्रम
इस्कॉन भक्त श्रीमान श्यामसुंदर जीवन प्रभुजी ने बताया कि जन्माष्टमी के अवसर पर शाम 5 से 6 बजे तक हरिनाम संकीर्तन एवं मधुर कीर्तन का आयोजन किया गया। कीर्तन के दौरान भक्त भगवान श्रीकृष्ण की भक्ति में झूमते नजर आए और पूरा वातावरण कृष्णमय हो गया।
इसके बाद शाम 6 से 8 बजे तक विभिन्न सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक कार्यक्रम आयोजित किए गए। इनमें भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं पर आधारित नृत्य, श्लोक उच्चारण, नाट्य प्रस्तुतियां और अन्य सांस्कृतिक कार्यक्रम शामिल रहे।
कार्यक्रम में बड़ी संख्या में बच्चे-बच्चियां श्रीकृष्ण और राधारानी के रूप में सजकर पहुंचे। नन्हे बच्चों की मनमोहक प्रस्तुतियों ने श्रद्धालुओं का मन मोह लिया। इन प्रस्तुतियों के माध्यम से भगवान श्रीकृष्ण के जीवन, उनकी बाल लीलाओं और उनके आध्यात्मिक संदेश को सरल एवं आकर्षक रूप में प्रस्तुत किया गया।
पंचामृत अभिषेक रहा प्रमुख आकर्षण
इस्कॉन भक्त श्रीमान भक्तवत्सल निमाई प्रभुजी ने बताया कि शाम 8 से 10 बजे तक भगवान श्री श्री राधा-कृष्ण जी का भव्य पंचामृत अभिषेक किया गया। वैदिक मंत्रोच्चार, भक्ति संगीत और जयघोष के बीच भगवान का विशेष पूजन किया गया।
पंचामृत अभिषेक के दौरान श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह देखने को मिला। भक्तों ने श्रद्धा और भक्ति के साथ भगवान के दर्शन किए तथा जन्माष्टमी के इस पावन अवसर पर सुख-समृद्धि एवं मंगल की कामना की।
श्रीकृष्ण की दिव्य कथा ने बांधा समां
पंचामृत अभिषेक के बाद रात 10 से 11 बजे तक भगवान श्रीकृष्ण की दिव्य कथा का आयोजन किया गया। कथा के माध्यम से भगवान श्रीकृष्ण के जीवन, उनकी विभिन्न लीलाओं और उनके आध्यात्मिक संदेश पर प्रकाश डाला गया।
कथा के दौरान श्रद्धालुओं ने भगवान श्रीकृष्ण की लीलाओं का श्रवण किया और उनके जीवन से जुड़े आध्यात्मिक संदेशों को समझने का प्रयास किया।
आधी रात के बाद आरती और 56 भोग के हुए दर्शन
भगवान श्रीकृष्ण की दिव्य कथा के बाद जन्माष्टमी के पावन अवसर पर भगवान की विशेष आरती की गई। आधी रात के बाद जैसे ही भगवान श्रीकृष्ण के जन्म का उल्लास छाया, पूरा परिसर “नंद के घर आनंद भयो, जय कन्हैया लाल की” के जयघोष से गूंज उठा।
इसके बाद श्रद्धालुओं को भगवान के 56 भोग के दर्शन करवाए गए। विभिन्न प्रकार के व्यंजनों से भगवान को भोग अर्पित किया गया। कार्यक्रम में शामिल भक्तों के लिए प्रसाद की भी व्यवस्था की गई।
आध्यात्मिक खेल और ज्ञानवर्धक गतिविधियां भी हुईं
जन्माष्टमी महोत्सव के दौरान श्रद्धालुओं के लिए विभिन्न प्रकार के आध्यात्मिक खेल एवं ज्ञानवर्धक गतिविधियां भी आयोजित की गईं। इन गतिविधियों में बच्चों और श्रद्धालुओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। प्रतियोगिताओं में विजेता प्रतिभागियों को पुरस्कार देकर सम्मानित किया गया।
आयोजकों के अनुसार इस आयोजन का उद्देश्य केवल जन्माष्टमी मनाना ही नहीं, बल्कि भगवान श्रीकृष्ण के जीवन, उनकी शिक्षाओं और भक्ति के संदेश को समाज तक पहुंचाना भी था।
5 सितंबर को नन्दोत्सव और व्यास पूजा
जन्माष्टमी महोत्सव की श्रृंखला में 5 सितंबर को नन्दोत्सव एवं व्यास पूजा का आयोजन किया जाएगा। भगवान श्रीकृष्ण के जन्म की खुशी में नन्दोत्सव मनाया जाएगा, जिसमें भक्तजन बधाई गीतों और कीर्तन के माध्यम से भगवान के जन्म की खुशियां साझा करेंगे।
इसके साथ ही व्यास पूजा का भी आयोजन होगा। इस अवसर पर भक्तजन गुरु परंपरा के प्रति श्रद्धा एवं सम्मान व्यक्त करेंगे और आध्यात्मिक मार्गदर्शन के महत्व को समझेंगे।
आयोजकों ने बताया कि जन्माष्टमी महोत्सव के माध्यम से बीकानेर में भक्तों को भगवान श्रीकृष्ण की भक्ति से जोड़ने, भारतीय संस्कृति एवं सनातन परंपराओं को नई पीढ़ी तक पहुंचाने तथा समाज में आध्यात्मिक वातावरण को मजबूत करने का प्रयास किया गया। पूरे आयोजन के दौरान श्रद्धालुओं में खासा उत्साह रहा और बीकानेर मानो वृंदावन धाम में परिवर्तित नजर आया।
५ तारीक को प्रभुपाद जी का व्यास पूजा उत्सव भी वृंदावन होटल में मनाया जाएगा
यह प्रभुपाद जी की १३० वी व्यास पूजा है
प्रभुपाद ही इस्कॉन के संस्थापक आचार्य है और ७० वर्ष की आयु में वो विदेश गए और हरे कृष्ण महामंत्र के प्रचार से विदेश और भारत में क्रांति लाए और हर जगह भगवान की भक्ति का प्रचार किया@all













