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बीके कमल ने मेडिकल विद्यार्थियों को दिया ‘मन को मास्टर करने’ का मंत्र, तनाव प्रबंधन के बताए व्यावहारिक सूत्र

एसपी मेडिकल कॉलेज में नवप्रवेशित एमबीबीएस विद्यार्थियों के लिए विशेष सत्र, बीके कमल रहे मुख्य वक्ता

बीकानेर। सरदार पटेल मेडिकल कॉलेज, बीकानेर में नवप्रवेशित एमबीबीएस विद्यार्थियों के लिए आयोजित तनाव प्रबंधन एवं मानसिक स्वास्थ्य पर विशेष प्रेरक सत्र में मुख्य वक्ता आध्यात्मिक प्रेरक वक्ता एवं मानसिक स्वास्थ्य प्रशिक्षक बीके कमल आकर्षण का केंद्र रहे। उन्होंने विद्यार्थियों से सीधा संवाद करते हुए मेडिकल की चुनौतीपूर्ण पढ़ाई के बीच मन को शांत, एकाग्र और सकारात्मक रखने के व्यावहारिक सूत्र साझा किए।

बीके कमल ने विद्यार्थियों को समझाया कि मेडिकल शिक्षा में पाठ्यक्रम का दबाव, परीक्षाओं की चिंता, प्रतिस्पर्धा और स्वयं से अधिक अपेक्षाएं कई बार मानसिक तनाव का कारण बन सकती हैं। ऐसे समय में परिस्थितियों से घबराने के बजाय अपने मन और विचारों को संभालने की कला सीखना जरूरी है। उन्होंने ध्यान, सकारात्मक सोच, आत्मचिंतन, भावनात्मक संतुलन और व्यवस्थित दिनचर्या को तनाव प्रबंधन का प्रभावी माध्यम बताया।

‘परिस्थितियों से पहले अपने मन को संभालना सीखें’

बीके कमल ने विद्यार्थियों को प्रेरित करते हुए कहा कि जीवन की प्रत्येक परिस्थिति हमारे नियंत्रण में नहीं हो सकती, लेकिन उस परिस्थिति को देखने का हमारा नजरिया और उस पर हमारी प्रतिक्रिया काफी हद तक हमारे हाथ में होती है। उन्होंने विद्यार्थियों को दूसरों से अनावश्यक तुलना करने के बजाय अपनी क्षमताओं को पहचानने और प्रतिदिन स्वयं का बेहतर रूप बनने पर ध्यान देने का संदेश दिया।

उन्होंने मेडिकल विद्यार्थियों के लिए मानसिक स्वास्थ्य को विशेष रूप से महत्वपूर्ण बताते हुए पढ़ाई और व्यक्तिगत जीवन में संतुलन, पर्याप्त विश्राम, एकाग्रता और भावनाओं को स्वस्थ तरीके से व्यक्त करने पर जोर दिया। सत्र के दौरान बीके कमल ने विद्यार्थियों को तनाव से निपटने और मन को शांत रखने से जुड़े व्यावहारिक अभ्यास भी करवाए।

स्वस्थ और प्रसन्न रहेंगे तभी बेहतर चिकित्सक बनेंगे : प्रचार्य डॉ. सुरेंद्र कुमार

कॉलेज के प्राचार्य एवं नियंत्रक डॉ. सुरेंद्र कुमार ने नवप्रवेशित विद्यार्थियों का स्वागत करते हुए कहा कि एमबीबीएस में प्रवेश एक बड़ी उपलब्धि के साथ जिम्मेदारीपूर्ण यात्रा की शुरुआत है। विद्यार्थी यहां केवल डॉक्टर बनने नहीं आए हैं, बल्कि उन्हें संवेदनशील, धैर्यवान और जिम्मेदार इंसान भी बनना है।

उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि किसी परीक्षा, अंक या कठिन दिन को अपने भविष्य पर हावी न होने दें। अपनी दिनचर्या व्यवस्थित रखें, पर्याप्त नींद लें और परेशानी होने पर मित्रों, शिक्षकों, मेंटर्स तथा परिवार से खुलकर बात करें। स्वयं स्वस्थ और प्रसन्न रहेंगे, तभी भविष्य में मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सेवा दे पाएंगे।

कार्यक्रम में डॉ. गौरव शर्मा एवं डॉ. रेखा आचार्य की भी सहभागिता रही। विशेष सत्र में विद्यार्थियों ने बीके कमल के साथ संवाद करते हुए मानसिक तनाव और मेडिकल शिक्षा से जुड़ी चुनौतियों को समझा। आयोजन का उद्देश्य मेडिकल शिक्षा की शुरुआत से ही विद्यार्थियों में मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता, आत्मविश्वास और तनाव से सकारात्मक तरीके से निपटने की क्षमता विकसित करना रहा।

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Gordhan Soni

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