
चंडीगढ़। फतेहगढ़ साहिब में आज शनिवार से शहीदी जोड़ मेला शुरू होने जा रहा है, 26 दिसंबर 1704 में आज के ही दिन गुरुगोबिंद सिंह के दो साहिबजादे जोरावर सिंह और फतेह सिंह को इस्लाम धर्म कबूल न करने पर सरहिंद के नवाब ने दीवार में जिंदा चुनवा दिया था, माता गुजरी को किले की दीवार से गिराकर शहीद कर दिया गया था। उनकी इस शहादत के लिए फतेहगढ़ साहिब में शहीदी जोड़ मेले का आयोजन हर वर्ष किया जाता है।
सरसा नदी पार करते बिछुड़ गए थे दोनों बेटे
दिसंबर 1704 में गुरु गोबिंद सिंह सिखों के साथ मुगलों की सेना चीरते हुए, चमकौर की गढ़ी से जाना पड़ा था। सरसा नदी पार करते समय माता गुजरी अपने दो पोतों, साहिबजादा जोरावर सिंह और फतेह सिंह के साथ थी। गुरु गोबिंद सिंह जी उनसे बिछुड़ गए थे।
पैसों के लालच में करवा दिया था गिरफ्तार
माता गुजरी और गुरु गोबिंद सिंह के दोनों पुत्रों जोरावर सिंह और फतेह सिंह को अपने यहां बीस वर्ष से रसोइए का कार्य करने वाले ब्राह्मण हिन्दू गंगू के घर रहना पड़ा। माता गुजरी के पास गहने और सोने के सिक्के थे। गंगू का मन लालच से भर आया। उसने वह सब कुछ चुराने और पाने की सोची। गंगू मोरिण्डा नगर गया और उसने शहर के कोतवाल बताकर उन्हें गिरफ्तार करवा दिया।
इस्लाम नहीं कबुला दे दी शहादत
जेल में माता गुजरी ने अपने दोनों पोतों को ज्ञान की बातें बताई। आने वाली विपदा के सामने धर्म की लड़ाई कैसे लड़नी है, इसकी शिक्षा दी। सुबह नवाब ने दोनों साहिबजादों को पेश होने का आदेश दिया। दोनों को नवाब ने इस्लाम धर्म कबूल करने के लिए कहा, जब यह दोनों साहिबजादे नहीं माने तो उन्हें दीवार में जिंदा चुनवा दिया गया। माता गुजरी जी को सरहिंद के किले के बुर्ज से गिराकर शहीद किया गया।















