परिवार में हर उत्सव सनातन संस्कृति के अनुरूप हो,रमक झमक इसको प्रोत्साहित करें-संत भावनाथ

बीकानेर। पाश्चात्य की होड़ छोड़ जन्म दिन मनाए जिससे मौलिक संस्कार सस्कृति कायम रहे ये उदगार संस्कार सस्कृति के लिये समर्पित रमक झमक संस्थान के अध्यक्ष प्रहलाद ओझा ‘भैरुं’ ने रमक झमक आवासीय परिसर में 5 वर्षीय नियति के जन्म उत्सव पर व्यक्त किये। प्रहलाद ओझा ‘भैरुं’ ने कहा केक काटना,केंडल की अग्नि को फूंक मारकर बुझाना गलत है और जिनका जन्म दिन है उसके लिये हानिकारक है। हमारे बुजुर्गों ने जो परम्पराएं बनाई वो बौद्धिक व आध्यात्मिक उन्नति करती है।हमारी परम्परा व सस्कृति शतप्रतिशत विज्ञान समत है। अग्नि को फूंक मारकर सामग्री को झूठा खिलाना इससे फैलने वाले बैक्ट्रिया या एक दूसरे की नेगेटिव एनर्जी परिवर्तित होती है। तथाकथित मॉर्डन बने लोगों यह जानले की विज्ञान हाइजेनिक या स्वच्छता की बात करता है वो हमारी परम्परा में शामिल है लेकिन पाश्चात्य देखा देखी होड़ और दिखावे में लोग अपनी परम्परा को छोड़ रहे है।
रमक झमक में नियति के 5 जन्म वर्ष पूर्ण कर छठे वर्ष में प्रवेश पर उसकी पड़ दादी 82 वर्षीय श्रीमती रामकवरी ओझा,दादी मां लक्ष्मी ओझा ने संत भावनाथ महाराज की पावन उपस्थिति में 5 तेल व 1 घी का दीपक प्रज्ज्वलित कराया तथा गौ शाला में गायों को भोजन के रूप में गुड़ खिलाया। मन्दिर में धोक पूजन किया। नियति ने बड़ो का चरण स्पर्श कर आशीर्वाद प्राप्त किया। इस अवसर पर संत भावनाथ महाराज ने कहा कि ऐसे आयोजन का प्रचार प्रसार मौखिक या अन्य माध्यमों से अधिक से अधिक हो ताकि बड़ो से होते हुवे ये संस्कार बचों तक ट्रान्सफर हो ।परिवार में हर उत्सव सनातन संस्क्रति के अनुरूप हो। इन आयोजनों का लाभ क्या है इसका महत्व क्या है और केक परम्परा व अग्नि बुझाने का नुक्सान क्या है ये बात भी ‘रमक झमक’जन जन तक पहुचानी चाहिये व ऐसे आयोजनों में जाकर उनको प्रोत्साहित करना चाहिये।








