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तपस्वियों का अभिनंदन, रथयात्रा निकलीमुनि श्री सत्व रत्न सागर की तपस्या के अनुमोदनार्थ शांतिधारा अभिषेक


बीकानेर, 26 सितम्बर । जैन श्वेताम्बर खरतरगच्छ के जैनाचार्य जिन पीयूष सागर सूरीश्वरजी के सान्निध्य में गुरुवार को 36 दिन की अपस्या करने वाली श्रीमती अंतर देवी बोथरा व चिराग सुराणा व 11 दिन के तपस्वी ऋषभ सुराणा के तपाभिनंदन महा महोत्सव पर रथ यात्रा निकली। मुनि सत्व रत्न सागर के तपस्या के अनुमोदनार्थ नाहटा चौक के श्री शांतिनाथ जिनालय में श्री शांतिधारा अभिषेक किया गया। शुक्रवार को सुबह पौने सात बजे नाहटा चौक के श्री सुपार्श्वनाथ जिनालय में श्री नमिऊण अभिषेक होगा ।


साध्वीश्री सुजेष्ठाश्रीजी के सांसारिक वीर भ्राता विमल चंद सुराणा ने बताया कि तपस्वी अंतर देवी बोथरा व चिराग और ऋषभ सुनाणा (दोनों भाइ्र्र) पुत्र सारिका व नवरतन सुराणा की शोभायात्रा मावा पट्टी से और रवाना होकर भगवान आदिनाथ, चिंतामणि मंदिर, सुगनजी महाराज का उपासरा होत हुए ढढ्ढा चौक के प्रवचन पंडाल पहुंची। जहां तपस्वियों का अभिनंदन श्री सुगनजी महाराज का उपासरा ट्रस्ट के मंत्री रतन लाल नाहटा, श्री जिनेश्वर युवक परिषद के अध्यक्ष संदीप मुसरफ, मंत्री मनीष नाहटा, श्रीमती संतोष देवी नाहटा, श्रीमती पारख व श्रीमती किरण देवी बेगानी ने किया।


श्री सुगनजी महाराज का उपासरा ट्रस्ट के मंत्री रतन लाल नाहटा ने बताया कि नूतन मुनि सत्वरत्न सागर की तपस्या की अनुमोदना गुरुवार को नाहटा चौक के श्री शांतिनाथ जिनालय में आचार्यश्री पीयूष सागर सूरीश्वरजी व मुनिवृंद ने स्वयं मंत्रोच्चारण करते हुए श्री शांतिधारा अभिषेक करवाया। शुक्रवार को नाहटा चौक के श्री सुपार्श्वनाथ जिनालय में श्री नमिऊण अभिषेक, शनिवार को आदिनाथ जिनालय में भक्तामर अभिषेक, दोपहर को ढाई बजे रांगड़ी चौक के सुगनजी महाराज के उपासरे में श्राविका मंडल की ओर से सांझी महोत्सव व रविवार को भगवान महावीर के मंदिर में विचक्षण महिला मंडल की ओर से पंच कल्याणक पूजा की जाएगी।


आचार्यश्री जिन पीयूष सागर सूरीश्वरजी ने धर्मचर्चा में प्रवचन में कहा कि जैनाचार्य के गुणों के अनुसार 36 दिन की तपस्या करना अनुमोदनीय, अनुकरणीय व जिनशासन की शोभा की श्रीवृद्धि करने वाला है। देव, गुरु व धर्म के आलम्बन व दृढ़ आत्म और संकल्पबल से कर्मों की निर्जरा करने के तपस्याएं की जाती है। बीकानेर के मुनि सम्यक रत्न सागर ने विषय का विस्तार करते हुए कहा कि आत्म शुद्धि के कषायों व इंद्रियों अ नियंत्रण करना चैलेंज व चुनौती भरा कार्य है। पराक्रम व पुरुषार्थ के उदय होने से तपस्या संभव है। अनादि काल से अनंता अनंत जीव का शरीर आहार व पानी लेकर भी तृप्त नहीं है। ऐसे में इंद्रियों का दमन कर आत्मशुद्धि के लिए सम्यक तप करने वालों की अनुमोदना जितनी की जाए उतनी कम है।

ट्रस्टी सम्मेलन 28 व 29 को
जैनाचार्य जिन पीयूष सागर सूरीश्वरजी के सान्निध्य में श्री सुगनजी महाराज का उपासरा ट्रस्ट व श्री जिनेश्वर युवक परिषद के संयुक्त तत्वावधान में 28 व 29 सितम्बर को होगां। श्री सुगनजी महाराज का उपासरा ट्रस्ट के मंत्री रतन लाल नाहटा व श्री जिनेश्वर युवक परिषद के अध्यक्ष संदीप मुसरफ ने बताया कि दो सत्रों मेंं होने वाले ट्रस्टी सम्मेलन में ट्रस्टी बनने की योग्यताएं, कैसी हो जिन मंदिर की व्यवस्था तथा कैसे करें देव, द्रव्य, साधारण खाते की व्यवस्थाएं आदि विषयों पर चर्चा होगी। अधिवेशन में राजस्थान के विभिन्न जिलों के साथ देश के अनेक इलाकों के विभिन्न जिनालयों, दादा बाड़ियों आदि के ट्रस्टी शामिल होंगे।

दादा गुरुदेव की बड़ी पूजा आज
श्रीमती अंतर देवी बोथरा व चिराग सुराणा 36 उपवास व ऋषभ के अनुमोदनार्थ तपाभिनंदन महा महोत्सव के तहत शुक्रवार को रेल दादाबाड़ी सुबह पौने नौ बजे दादा गुरुदेव की बड़ी पूजा व उसके बाद स्वधर्मी वात्सल्य का आयोजन साध्वीश्री सुजेष्ठा श्रीजी के परिजनों वीर पितामाणकचंद, वीरभाई विमलचंद पुष्पादेवी सुराणा परिवार की ओर से रखा गया है।

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Prakash Samsukha

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