नगर की युवा रचनाकार सुश्री कपिला पालीवाल की अपने पिताजी शिवप्रसाद पालीवाल के जीवन पर लिखी पुस्तक ‘विश्राम-एक जीवनी’ पर चर्चा का कार्यक्रम अजित फाउंडेशन सभागार में सफलता के साथ संपन्न हुआ ।
कार्यक्रम समन्वयक संजय श्रीमाली ने बताया कि पुस्तक चर्चा कार्यक्रम की अध्यक्षता वरिष्ठ आलोचक और एम.एस. कॉलेज के पूर्व प्राचार्य डॉ. उमाकांत गुप्त ने की। डॉक्टर गुप्त ने अध्यक्षीय उद्बोधन देते हुए कहा कि जीवनी इतिहास को देखना होता है। हमें जीवनी लिखने से पहले जीवनी पढ़नी चाहिए। पिता पुत्री का रिश्ता बहुत गहरा होता है। बेटी कपिला ने लेखिका होकर अपने पिता एवं अपने दादा को देखा है। पिता अपनी संतान के लिए संघर्ष करता है, पिता कहता नहीं बल्कि करके दिखाता है। विश्राम-एक जीवनी नए संघर्ष का पहला पायदान है। पुस्तक की कई विशेषताएं हैं जिनमें अपने को होना देखना, मूल्य के प्रति आस्था को बार-बार प्रतिस्थापित करना और सबके हित के भाव को संवेदना के स्तर पर वेदना को अनुभूत करना महत्वपूर्ण है। आपने लेखिका कपिला को इस महत्वपूर्ण जीवनी पुस्तक के लिए हार्दिक शुभकामनाएं दीं।
पुस्तक पर मुख्य समीक्षक के तौर पर पूर्व प्रिंसिपल, चिंतक व लेखक डॉ. नरसिंह बिन्नानी ने अपनी विस्तृत टिप्पणी पेश करते वह कहा कि यह पुस्तक पुस्तक नहीं बल्कि ईश्वर का साक्षात स्वरूप है। लेखिका कपिला ने इसे पाठकों के लिए सरल, सरस, पारदर्शी एवं बोधगम्य बना दिया है। एक पिता के जीवन काल में लिखी यह एक ऐसी पुस्तक है जिसमें लेखिका कपिला पालीवाल ने अपने पिता के बचपन, शिक्षा, दीक्षा और जीवन की परेशानियों के बारे में विस्तार से और प्रेरणादायक शब्दों के साथ लिखा है। साथ ही अपने पिता की ईमानदारी और सहनशीलता का मार्मिक विश्लेषण किया है। पुस्तक की भाषा शैली रोचक है। लेखिका ने अपूर्व श्रद्धा एवं विश्वास के साथ इस पुस्तक को लिखा है जो पठनीय एवं संग्रणीय पुस्तक है। यह पुस्तक पाठकों द्वारा भरपूर सराही जाएगी।
कार्यक्रम में सभी आगंतुकों का स्वागत एवं संस्था का परिचय प्रस्तुत करते हुए कार्यक्रम के समन्वयक संजय श्रीमाली ने बताया कि अजीत फाउंडेशन साहित्यिक क्षेत्र में लगातार अच्छा कार्य कर रही है और आगे भी करती रहेगी। अजित फाउंडेशन का मासिक पुस्तक चर्चा कार्यक्रम बहुत पसंद किया जा रहा है। संस्था आगे भी इस तरह के आयोजन करती रहेगी।
कार्यक्रम का संचालन करते हुए वरिष्ठ शायर कहानीकार क़ासिम बीकानेरी ने कहा कि विश्राम एक जीवनी पुस्तक के जरिए कपिला पालीवाल ने पिता के जीवन संघर्षों को बहुत भावनात्मक शब्दों के साथ पेश किया है। जिसे पढ़कर पाठकों की आंखें नम हो जाती हैं । इस पुस्तक के ज़रिए लेखिका कपिला पालीवाल की साहित्य के क्षेत्र में पहचान पुख्ता हुई है। कपिला पालीवाल आगे भी इस तरह की कृतियों के माध्यम से आने वाले समय में अपनी एक अलग पहचान बनाने में कामयाब होगी।
नगर के अनेक रचनाकारों ने इस अवसर पर श्रम एक जीवनी पुस्तक के बारे में अपने विचार प्रस्तुत किए। जिनमें वरिष्ठ कवि कथाकार कमल रंगा,एडवोकेट इसरार हसन क़ादरी, डॉ. मोहम्मद फ़ारुक़ चौहान, विप्लव व्यास,जुगल किशोर पुरोहित, डॉ.शंकर लाल स्वामी, चित्रकार योगेंद्र पुरोहित, अब्दुल शकूर सिसोदिया, गिरिराज पारीक, कवि कथाकार राजाराम स्वर्णकार, डॉ. जगदीश दान बारहठ,गोविंद जोशी,मुक्ता तैलंग मुक्त, शिव दाधीच, शमीम अहमद शमीम एवं उद्योगपति जुगल राठी ने अपने विचार पेश किए।
पुस्तक चर्चा कार्यक्रम में अनेक प्रबुद्ध जन मौजूद थे जिनमें शिवप्रसाद पालीवाल, डॉ. राकेश बिन्नानी, डॉ. कृष्णा गहलोत, प्रियंका मूंधड़ा, व्यवसायी कमल कुमार राठी, जयश्री बिन्नानी, रामकुमार व्यास एवं गौरी शंकर उपस्थित थे। पुस्तक चर्चा कार्यक्रम का संचालन क़ासिम बीकानेरी ने किया। अंत में सभी का आभार ज्ञापन कवि कथाकार राजाराम स्वर्णकार ने किया।
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