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*माँ से बड़ा संसार में कोई नहीं -कथा व्यास राजेशजी महाराज* *शिव पार्वती विवाह व ध्रुव -चरित्र की कथा सुनाई*

नोखा। धर्म नगरी नोखा में वीर तेजाजी मंदिर के समीप 4 अक्टूबर से 10 अक्टूबर तक चल रही सामूहिक संगीतमयी सप्त दिवसीय श्रीमद भागवत कथा ज्ञान यज्ञ के तीसरे दिन रविवार को दोपहर 1 बजे से सांय 5 बजे तक व्यासपीठ पर विराजित कथा व्यास शास्त्री राजेश सारस्वत (कवलीसर) ने दर्शक श्रोताओं को ज्ञान गंगा में डुबकिया लगाते हुए श्रीमद भागवत कथा रस पान करवाया। इंद्र चंद मोदी ने प्रेस नोट जारी कर बताया की कथा के तीसरे दिन महाराज श्री ने माँ की महिमा, शिव विवाह -चरित्र, धुर्वचरित्र आदि प्रसंगों पर बड़े ही मधुर वाणी से प्रकाश डाला | प्रसंगानुसार जसवन्त गढ़ के झांसी कलाकार द्वारा शिव विवाह और धूर्व चरित्र की संजीव झखियो के मंचन से दर्शक श्रोताओं को आनन्दित कर दिया। कथा-व्यास जी ने माँ की महिमा पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए उनकी ममता का गान करते हुए कहा कि संसार में माँ से बढ़‌कर कोई नहीं है। माँ एक ऐसा शब्द है जिसमे पूरी दुनिया समा सकती है माँ का दर्जा भगवान से भी बड़ा बताते हुए कहा कि माँ के लिए उसकी सन्ताना कितनी ही बड़ी क्यों न हो जाये लेकिन माता के लिए वो हमेशा बच्चा ही हैं। जन्म से पहले व जन्म के बाद ममतामयी माँ अपनी सन्तान के लिए अनेको कष्ट सहकार बच्चों का पालन पोषण करती है। इन्सान कभी भी माँ के ऋण से मुक्त नहीं हो सकता है।
शिव विवाह और पुत्र के चरित्र पर प्रकाश डालते हुए महाराज ने कहा कि उम्र के पिता दक्ष प्रजापति के यहां यज्ञ का आयोजन हो रहा था तब शिवजी के लिए कोई आसन नहीं देखा जबकि शिव की कृपा बिना कोई मुझ सफल नहीं हो सकता और आयोजन में विघ्न पड़ा। महाराज ने कहा अहंकार के आँखे नहीं होती। दक्ष का अंहकार समाप्त होने पर भगवान शंकर की कृपा से आयोजन सफल हुआ। इसके बाद शिव पार्वती विवाह व बरात का वर्णनन किया शिवजी ने सती उमा को पार्वती के रूप में विवाह करके स्वीकार किया। ध्रुव के संवाद पर कास्त्रीजी ने कहा कि ध्रुव के समान अच्छे संस्कारों का निर्माण करें। 5 वर्ष क छोटे से बालक ध्रुव ने भगवान को नहीं देखा लेकिन भगवान तो ध्रुव को देख रहे हैं। भक्त भगवान के दर्शनों के लिए दौड़ते है लेकिन यहाँ ती भगवान ध्रुव के साँगने कपड़े को भुल की असे खुलने की प्रतिक्षा करते है। 5 वर्ष की उमर में ध्रुव कठिन तपस्या व अपनी माता सुनीता व सौतेली माता • सुरीची और सद्गुरू नारदजी के द्वारा बताया गया मंत्र ओम नमो भगवते वासुदेवाय नमः से प्रभु को प्राप्त कर लिया और प्रभु चरणों में पड़कर भगवान से प्रार्थना की कि प्रभो आपकी कथाओं में रुचि बनाई रखे आपकी कृपा बनी रहे कथा के तीसरे दिन घनश्याम दास स्वामी सपत्निक आसन के सामने प्रथम पंक्ति में बैठ कर कथा पान कर रहे थे। कथा में राधेश्याम महाराज मूल भागवत का पठन कर रहे है। संगीत वादक राकेश एंड पार्टी द्वारा भजनों की प्रस्तुति एवं संगीत से कथा को रोचक बना रहे थे
कथा के दौरान मदनलाल सियाग, श्याम पारीक, भंवर राणा, मोटाराम खाती, हरगनलाल कस्वा, धनराज छींपा, भागीरथ गिरी, भंवर, छीपा, भागीरथ भार्गव, रेवन्त जोगी, मूलचन्द तिवाड़ी, गोपाल प्रजापत, रामरख सारण, गणपतराम तरड़, तेजाराम सारण, सुरजाराम छिम्पा, अशोक राठी आदि व्यवस्थाओं में सहयोग कर रहे है।

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दिलीप गुप्ता

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