
दीपावली का पर्व धनतेरस से शुरू होता है और भैया दूज तक चलता है, पांच दिन के इस पर्व का हर दिन विशेष महत्व रखता है।

भाई दूज कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को मनाया जाने वाला हिन्दू धर्म का पर्व है जिसे यम द्वितीया भी कहते हैं। यह दीपावली के दो दिन बाद आने वाला ऐसा पर्व है, जो भाई के प्रति बहन के स्नेह को अभिव्यक्त करता है एवं बहनें अपने भाई की खुशहाली के लिए कामना करती हैं।

हिंदू पौराणिक कथाओं के अनुसार, राक्षस नरकासुर को मारने के बाद, भगवान कृष्ण अपनी बहन सुभद्रा से मिलने गए, जिन्होंने उनका गर्मजोशी से स्वागत किया। उन्होंने भगवान कृष्ण के माथे पर तिलक भी लगाया और तब से यह दिन भाई दूज के रूप में मनाया जाता है।
भाई दूज यानी यम द्वितीया पर यमराज को प्रसन्न करने के लिए बहनें व्रत भी रखती हैं. भाई दूज के दिन यमराज के साथ उनके सचिव चित्रगुप्त की भी पूजा की जाती है.
बहनें अपने भाइयों को तिलक लगाकर उनकी लंबी उम्र और सुख समृद्धि की कामना करती हैं. वहीं भाई शगुन के रूप में बहन को उपहार भेंट देते हैं. भाई दूज के दिन मृत्यु के देवता यमराज का पूजन भी किया जाता हैशोभन और सौभाग्य योग में मनाई जायेगी भाई दूज।















