




दादा गुरु देव की भक्ति संगीत के साथ पूजा, श्राविकाओं का शिविर आज
’’ मेरे सिर पर रख दो दादा अपने दोनों हाथ’’
बीकानेर, 07 अगस्त। गणिवर्य श्री मेहुल प्रभ सागर म.सा., मंथन प्रभ सागर, बाल मुनि मीत प्रभ सागर, साध्वी दीपमाला श्रीजी व शंखनिधि के सान्निध्य रविवार को ढढ्ढा कोटड़ी में ’’दादा दत सूरी’’ तप के उपलक्ष्य में क्रिया, इकतीसा का सामूहिक पाठ व भक्ति संगीत के साथ पूजा की गई। शुक्रवार को श्राविकाओं का दोपहर दो बजे से साढ़े तीन बजे तक ढढ्ढा कोटड़ी में शिविर होगा।
श्री सुगनजी महाराज का उपासरा ट्रस्ट, अखिल भारतीय खरतरगच्छ युवा परिषद की बीकानेर इकाई की ओर से सकल श्रीसंघ के सहयोग से आयोजित चातुर्मास में पहली बार ’’दादा दत्त सूरी’’ तप के दौरान हुई पूजा में बड़ी संख्या में श्रावक-श्राविकाओं ने हिस्सा लिया।
अखिल भारतीय खरतरगच्छ युवा परिषद की बीकानेर इकाई के सचिव विक्रम भुगड़ी ने बताया कि इसके अलावा सिद्धि तप, आयम्बिल, एकासना, बयासना, अटठाई आदि की साधना चल रही है। वरिष्ठ श्रावक कन्हैयालाल भुगड़ी की बिना अन्न जल के (चौविहार तप ) की 42 वें दिन की गई। भुगड़ी पिछले वषों में र् भी 8 से 51 दिन की चौविहार तपस्याएं कर चुके हैं।
दादा गुरुदेव की पूजा में विचक्षण मंडल, अखिल भारतीय खरतरगच्छ महिला परिषद की बीकानेर इकाई की सदस्याओं ने विभिन्न राग व तर्जों के भजन, दोहे व मंत्रोंच्चारण के साथ न्हवण, चंदन, पुष्प, धूप, दीप,अक्षत, नेवैद्य, फल, वस्त्र इत्र, ध्वजा व इत्र पूजा की। पूजा के दौरान ’’ देना है तो दीजिये जन्म-जन्म का साथ, मेरे सिर पर रख दो दादा अपने दोनों हाथ’’, ’ओ गुरु सा ’’,’’ दत नाम दुख भंजन हारा आदि भजन तथा स्तुति ’’गुरु देव दयाल को , मन मेंं ध्यान लगाय, अष्ट सिद्धि नवनिधि मिले, मन वांछित फल पाय। ’’, ’’श्री गुरु चरण शरण में आयो, देख दरस मन अति सुख पाया’।
प्रवचन-गणिवर्य मेहुल प्रभ सागर म.सा. ने गुरुवार को ढढढा कोटड़ी में नियमित प्रवचन में कहा कि धर्म के तीन प्रमुख आधार अहिंसा, संयम व तप है। संयम व तप की साधना करने वालों की धर्म साधना में मंगलमय हो जाता है। तप के साथ देव, गुरु की भक्ति से आत्मबल मजबूत होता है।
प्रतिष्ठा मुर्हूत बधाई उत्सव के पत्रक का विमोचन
बीकानेर, 7 अगस्त। गंगाशहर में गोल मंदिर श्री पार्श्व नाथ जिन प्रासाद, के अंजनशलाका प्रतिष्ठा मुहूर्त बधाई उत्सव की तिथि की घोषणा 10 अगस्त को बाड़मेर में आचार्यश्री जिन मणि प्रभ सूरीश्वरजी म.सा. करेंगे। गणिवर्य मेहुल प्रभ सागर म.सा., मंथन प्रभ सागर, बाल मुनि मीत प्रभ सागर, साध्वीश्री दीपमाला व शंखनिधि के सान्निध्य में गुरुवार को ढढ्ढा कोटड़ी में प्रतिष्ठा मुर्हूत बधाई उत्सव के पत्रक का विमोचन किया गया।
पत्रक का विमोचन 42 दिन से चौविहार तपस्या करने वाले वरिष्ठ श्रावक कन्हैयालाल भुगड़ी, श्री चिंतामणि जैन मंदिर प्रन्यास के उपाध्यक्ष महावीर डागा, श्री सुसवाणी माताजी मंदिर ट्रस्ट मोरखाणा के उपाध्यक्ष महादेव सुराणा, भगवान पार्श्वनाथ जीर्णोद्धार मंदिर ट्रस्ट के मंत्री मनोज कुमार बांठिया, कोषाध्यक्ष रविन्द्र कुमार बांठिया आदि ने करवाया। फौजराज बांठिया परिवार के 180 वर्ष प्राचीन भगवान पार्श्वनाथ मंदिर ट्रस्ट के ट्रस्ट के सदस्य गुलाब चंद, पारस कवीन्द्र कुमार, अरिहंत बांठिया आदि इस अवसर पर मौजूद थे।
भगवान पार्श्वनाथ जीर्णोद्धार मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष धनपत सिंह बांठिया ने बताया कि मंदिर का निर्माण करने फौजदार बांठिया परिवार के सदस्य व भगवान पार्श्वनाथ जीर्णोद्धार मंदिर ट्रस्ट के पदाधिकारी व सदस्य 9 अगस्त को रवाना होकर 10 अगस्त को बाड़मेर में पहुंचकर आचार्य श्री जिन मणि प्रभ सूरीश्वरजी की वंदना करेंगे तथा मंदिर प्रतिष्ठा के मुर्हूत की विनती करेंगे।
बांठिया ने बताया कि करीब 51 फीट गुंबज वाले सफेद संगमरमर के मंदिर का निर्माण कार्य 2022 से निरन्तर चल रहा है। मंदिर में भगवान पार्श्वनाथ के साथ वासुपुज्य स्वामी, पद्म प्रभु, भगवान आदिनाथ व शांतिनाथ की खडगाषन मूर्ति, भगवान महावीर स्वामी, गौतम स्वामी, पार्श्वचन्द्र सूरी, शांति गुरुदेव, देवी पदमावती, सरस्वती, चक्रेश्वरी माता, षिखरजी भोमिया व बटुक भैरव की प्रतिमाएं लगेगी । मंदिर का निर्माण अहमदाबाद के ऋषभ सोमपुरा की देखरेख में पिछले तीन वर्षों से चल रहा है। जैन संस्कृति व शैली के अनुसार मंदिर के सफेद संगमरमर के घड़ाई व बारीक कोरनी का कार्य मकराना के प्रसिद्ध कारीगर कर रहे है। फौज राज बांठिया परिवार की ओरसे निर्मित इस गोल मंदिर में भगवान पार्श्वनाथ प्रतिमा की प्रतिष्ठा 180 वर्ष पूर्व आचार्य जिन सौभाग्य सूरी ने करवाई थी।












