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बीकानेर तुलसी साधना केंद्र में ज्ञानशाला का वार्षिक उत्सव मनाया

बीकानेर तुलसी साधना केंद्र में ज्ञानशाला का वार्षिक उत्सव मनाया

बीकानेर। बीकानेर तुलसी साधना केंद्र तेरापंथ भवन में एकादशमधिशास्ता आचार्य श्री महाश्रमण जी की सुशिष्या शासन श्री द्वय साध्वी मंजू प्रभा जी व साध्वी कुंथु श्री जी के सानिध्य में ज्ञानशाला का वार्षिक उत्सव मनाया गया

ज्ञानशाला दिवस बड़े उत्साह और विविधताओं से मनाया गया ।

साध्वी श्री मंजू प्रभा जी ने फरमाया बालक भगवान के रूप होते हैं सरल होते हैं ज्ञानशाला का लक्ष्य है बच्चों को संस्कारी ज्ञानवान और अच्छा इंसान बनाती है ।

ज्ञानशाला बच्चों के बाह्य व्यक्तित्व का विकास करती है आत्मविश्वास बढ़ती है साध्वी कुंथु श्री जी ने फरमाया गुरुदेव श्री तुलसी का महनीय उपक्रम है ज्ञानशाला यह संस्कार निर्माण की प्रयोगशाला है प्रत्येक व्यक्ति के जीवन में तीन अवस्थाएं बचपन, यौवन, बुढ़ापा । बचपन में ज्ञानार्जन यौवन में धनार्जन व बुढ़ापे में धर्माजन किया जाता है । जिसका बचपन सदसंस्कारो से भावित हो जाता है उसकी युवावस्था व बुढ़ापा भी अच्छी तरह व्यतीत होता है बच्चे कच्ची मिट्टी के समान होते हैं उन्हें जिस रूप में ढाला जाए ढल जाते हैं बालक की प्रथम शिक्षिका मां होती है तत्पश्चात ज्ञानशाला माध्यम बनती है संस्कारनिर्माण में जो अभिभावक बच्चों को ज्ञानशाला भेजते हैं उन बच्चों का भविष्य संवर जाता है ज्ञानशाला का जब इतना महत्व है तो ज्ञानशाला में प्रशिक्षिकाओं का दायित्व कितना अधिक होता है कुशल प्रशिक्षिक से बच्चों को प्रशिक्षण भी अच्छी तरह मिल सकता है दोनों साध्वी श्री जी ने प्रशिक्षिकाओं के श्रम और समय नियोजन की सराहना की ।

वार्षिकोत्सव के अवसर पर ज्ञानार्थियों ने ज्ञानशाला में गतिशील विविध गतिविधियों की जानकारी प्रस्तुत की । आचार्य भिक्षु के त्रिशताब्दी वर्ष के अंतर्गत स्वामी जी के जीवन को अनेक दृश्यों के माध्यम से बताया । आचार्य भिक्षु के प्रमुख श्रावक गेरू लाल जी व्यास, टीकम जी डोसी,भिक्षुभक्त शोभ जी, विजय चंद जी पटवा की भूमिका निभाकर उनके परिचय का इतिवृत प्रस्तुत किया ।आमेट की श्राविका चंदू बाई का परिचय दिया l सभा अध्यक्ष श्रीमान सुरपत जी बोथरा ने अपने विचार व्यक्त किए । सभी बच्चों को उत्साह वर्धन करते हुए सम्मानित किया । एक नन्हे बालक आर्यन बैंगानी ने तेले की तपस्या की उसका भी सम्मान किया गया कार्यक्रम का कुशल संचालन ज्ञानशाला संयोजिका शांताबाई भूरा ने किया ।

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Prakash Samsukha

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