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बीकानेर: चारों और गहरी चुप्पी! – जरा सी बारिश ने सड़को को किया बेहाल:सड़के बनी दरिया
फाइल फोटो

✍️——- मनोहर चावला

14अगस्त को हमने विभाजन विभीषिका पर लाखो- करोड़ो बेघर हुए, मरे- कटे लोगो को श्रद्धांजलि दी और उस समय के नेताओ को ही विभाजन का दोषी ठहराया। हमने तिरंगा यात्रा भी निकाली। 15 अगस्त को देश ने आज़ादी की 79वी वर्षगांठ भी धूमधाम से मनाई। लालकिले से प्रधानमंत्री ने ओजस्वी भाषण दिया। हमारे अपने बीकानेर नगर में मंत्री सुमित गोदारा ने झंडा फहराया और परेड की सलामी ली। प्रतिभाओं कों सम्मानित किया। फिर हमने जन्माष्टमी मनाई। लगातार तीन- चार छुटिया होने से सरकारी कम- काज ठप्प रहा। इसी बीच मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा का बीकानेर आगमन हुआ। उन्होंने खाजूवाला बॉर्डर पर बीएसएफ के जवानों की हौंसला अफजाई की। विभाजन विभीषिका गोष्ठी कों भी संबोधित किया। वे जहाँ जहाँ से निकले, वहाँ रातो- रात सड़के बन गई। बाक़ी पूरा शहर टूटी और खड्डों वाली सड़को में तब्दील रहा। यहाँ कोई भी विभाग सड़क बनने का बीड़ा नहीं उठा रहा है टूटी सड़के, चारों और बिखरे हुवे नुकीले कंकड़ रोजाना एक्सीडेंट को न्योता दे रहे है। कई लोग इन टूटी सड़को के कारण मौत के ग्रास बन चुके है। लेकिन न तो यहाँ के जन- प्रतिनिधि कुछ करते है और न ही प्रशासन इसमें कोई दिलचस्पी लेता है। देखते और सहते हुए चुप्पी साधना यहाँ के लोगो की प्रवर्ती है। दुर्घटनाये होती रहेगी, मरने वाले मरते रहेंगे। जरा सी बारिश क्या हुई बीकानेर में लगा मानो बाढ़ आ गई हो। चारों और पानी ही पानी। आवागमन बंद। इन्हें कोई फ़र्क़ नहीं पड़ता। बस इन नेताओ कों अखबारों में अपने फ़ोटो छपते हुए दिखने चाहिए। पूरा बीकानेर आज गंदगी से सड़ रहा है। जगह जगह कचड़े के ढेर और कीचड़ से बुदबु मारते बीकानेर में कोई भी पर्यटक आना पसंद नहीं करता। यहाँ रहने वाले लोग तो नारकीय जीवन बिताने में ही विवश है। जगह जगह सड़को पर विचरण करते आवारा पशु , पागल कुत्तो ने भी लोगो का जीना हराम कर रखा है। ट्रेफिक व्यवस्था यहाँ की बेहाल है। शहर के बीचो— बीच दिन में कई बार बंद होते रेल फाटको ने यहाँ के लोगो के जीवन को ठप्प कर रखा है रेल का दोहरीकरण करने एवम अंडर ग्राउंड ब्रिज बनाने का शगूफा सरकार ने छेड़ ही रखा है। जिसके लिए कुछ दुकानों को अवाप्त कर तोड़कर अंडर ग्राउंड ब्रिज और रेल दोहरीकरण की सनसनी शहर में तैर रही है। सारे शहर का विकास मानो थम सा गया है। फुटपाथ न होने और ट्रेफिक की रेल- पेल से घर से बच्चों और बुजुर्गों का बाहर निकलना खतरे से खाली नहीं रहा है। यहाँ के लोग अब भगवान भरोसे है वो जिस हाल में रखेगा, उसकी मर्जी? कोई आंदोलन नहीं, कोई धरना नहीं, कोई अनशन नहीं— नेताओ , प्रशासन और पब्लिक को मानो साँप सूंघ गया हो। बीकानेर हर स्तर पर अन्य जिलों की अपेक्षा विकास में सबसे नीचे के पायदान पर है। सब की जुबा पर एक ही सवाल है कि वो सुबह कभी तो आएगी?? जब बीकानेर विकास में सबसे आगे और ऊँचे पायदान पर होगा।

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दिलीप गुप्ता

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