
भारत के केन्द्रीय संस्कृति मंत्रालय, नई दिल्ली द्वारा आयोजित अन्तराष्ट्रीय काँन्फ्रंेस में पाण्डुलिपि धरोहर के माध्यम से भारत परम्परा का पुनः अधिग्रहण पर राजस्थान प्राच्य विद्या प्रतिष्ठान के वरिष्ठ अधिकारी डा. नितिन गोयल ने किया बीकानेर का प्रतिनिधित्व
भारत सरकार संस्कृति मंत्री, श्री गजेन्द्र शेखावत, संस्कृतिराज्य मंत्री,श्री राव राजेन्द्र संस्कृति सचिव श्री विवेक की उपस्थिति में प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के द्वारा भारत ज्ञान पोर्टल का लोकार्पण नई दिल्ली के विज्ञान भवन में किया। इस अन्तराष्ट्रीय काँन्फ्रंस में देश के विभिन्न राज्यों के साथ-साथ 7 देशों से भी विद्वानजन आये। प्रधानमंत्री द्वारा अपने उद्घाटन भाषण में कहा पाण्डुलिपियों को नेशनल टेªजर के रुप में सहजना आवश्यक है। भारतीयता के निरन्तर प्रवाह को पाण्डुलिपियों में देखा जा सकता है। उन्होनें यह भी कहा कि जैसे-जैसेे पाण्डुलिपियों का संरक्षण, डिजिटाईजेशन होगा वैसे-वैसे शोध बढे़गा, जिससे भविष्य का नया अध्याय शुरु होगा जिसका सामथ्र्य आने वाले पीढ़ियों तक बना रहेगा। उक्त काँन्फ्रंेस के पश्चात केन्द्रीय संस्कृति मंत्री श्री गजेन्द्र सिंह शेखावत द्वारा दिल्ली संकल्प पत्र भी जारी किया जिसमें पाण्डुलिपि के संरक्षण हेतु 12 बिन्दुओं का संकल्प लिया गया।
इस अन्तराष्ट्रीय काँन्फ्रंेस में सांस्कृतिक पुर्नजागरण की दृष्टि से भारत की बौद्धिक धरोहर संरक्षण के साथ भारतीय ज्ञान परम्परा के पुर्नस्थापना हेतु ज्ञान भारतम जन अभियान प्रारम्भ किया है। इसी उद्देशय से भारतीय ज्ञान की थाती पाण्डुलिपियों का सर्वेक्षण, सिक्रप्ट एवं विषय अध्ययन, परिरक्षण, ए.आई. आधारित डिजिटाईजेशन, मेटाडाटा, नीतिविषयक संरक्षण, पाठ-सम्पादन, विदेशिक कुटनीति सम्बन्धों आधारित बिन्दुओं का समावेश कर कार्य को राज्यों में प्रारम्भ किया जायेगा।
उक्त अन्तराष्ट्रीय काँन्फ्रंेस में राजस्थान प्राच्य विद्या प्रतिष्ठान में पाण्डुलिपियों, उनकी भाषा एवं नवीन तकनीक के उपयोग को डा. नितिन गोयल ने साझा किया। डा. गोयल ने राजस्थान में ऐतिहासिक पाण्डुलिपियों के विषय एवं उनमें समाहित भारतीय ज्ञान को उजागर करने हेतु ए. आई. एवं एच.टी.आर. के उपयोग हेतु भाषाविद् की आवश्यकता को साझा किया। इस हेतु राज्य सरकार द्वारा बजट घोषणा किये जाने वाले प्रयासों को भी प्रभावी रुप से लागू करने के लिये विभिन्न उपादनों की आवश्यकता पर बल दिया।
डा. गोयल के अनुसार विकसित राजस्थान 2047 के दीर्घकालीन उद्देशय प्राप्ति हेतु राजस्थान सरकार द्वारा पाण्डुलिपि संरक्षण हेतु बजट घोषणा में प्रावधान किया गया है। इसके अन्र्तगत राजस्थान के जैन भण्डारों, शोध संस्थानों, राज परिवार पुस्तकालयों, व्यापारिक घरानों में संधारित पाण्डुलिपियों का सर्वेक्षण कर आधुनिक ए.आई. तकनीक का प्रयोग एवं भाषा विद्वानों के माध्यम से मेटा डेटा एवं डिजिटाईजेशन किया जायेगा।
आजादी के पश्चात प्रथम बार देश में इतने विहंगम स्तर पर भारतीय ज्ञान परम्परा पुर्नस्थापना उद्देशय से पाण्डुलिपि औत-प्रौत इन जन अभियान की शुरुआत की जायेगी। अभियान के सफलता के लिये जनता को व्यक्तिगत पाण्डुलिपि संग्रह की सुरक्षा एवं आधुनिक संरक्षण के लिये उपलब्धता के साथ अग्रसर होना होगा।












