पांच महाव्रत धारी साधु-साध्वी से प्रेरणा ले-गणिवर्य मेहुल प्रभ सागर
बीकानेर, 17 सितम्बर। गणिवर्य मेहुल प्रभ सागर, मुनि मंथन प्रभ सागर, बाल मुनि मीत प्रभ सागर, साध्वी दीपमालाश्रीजी, शंखनिधि श्रीजी के सान्निध्य में 19 सितम्बर, शुक्रवार को रांगड़ी चौक के सुगनजी महाराज के उपासरे में सुबह साढ़े छह बजे से साढ़े आठ बजे तक दादा गुरुदेव के इकतीसे का सामूहिक पाठ होगा। रविवार को डागा, सेठिया, पारख मोहल्ले के महावीर भवन में सामूहिक इकतीसा का पाठ होगा।
खरतरगच्छ युवा परिषद की बीकानेर इकाई के अध्यक्ष अनिल सुराणा ने बताया कि दादा गुरुदेव के इकतीसा की रचना ं गुरु भक्त गोपालजी ने अश्विन कृष्ण तेरस को की थी। । गुरु इकतीसा में कहा गया है ’’सतगुरु का स्मरण रहे, धरे सदा जो ध्यान। प्रातः पहले पढ़े, होय कोटी कल्याण। सुनो रतन चिंतामणि सतगुरु देव महान। वंदन श्रीगोपाल का, लीजै विनय विधान। दीपक एकासना में श्रावक-श्राविकाएं दीपक के प्रज्जवलित रहने दिन में एक समय आहार ग्रहण कर सकेंगी।
प्रवचन- गणिवर्य मेहुल प्रभ सागर म.सा. ने बुधवार को रांगड़ी चौक के सुगनजी महाराज के उपासरे में बुधवार को चातुर्मासिक प्रवचन में कहा कि पांच महाव्रत सत्य,अहिंसा, अचौर्य, अपरिग्रह व ब्रह्मचर्य धारण कर साधु-साध्वी संयम धर्म की पालना करने वालों से प्रेरणा ले तथा अपने जीवन को संयम भाव के साथ मोक्ष के लक्ष्य की और अग्रसर करें। उन्होंने कहा कि केवल कपड़े पहनने से कोई साधु नहीं बन जाता, उसका चाल चलन, चरित्र, साधना आराधना, देव गुरु व धर्म के प्रति भक्ति, संघ व समाज के प्रति निष्ठा को देखकर साधु का सम्मान करें। कई बहरुपिए व ठग साधु का वेश धारण कर अपने स्वार्थ सिद्धि के लिए लोगों को गुमराह करते है तथा उनसे ठगी करते है। ऐसे तथा कथित साधुओं से श्रावक-श्राविकाओं से दूर रहना चाहिए। उन्होंने कहा कि पुण्य से मिले मानव जीवन व धर्म पर प्रयास व पुरुषार्थ कर हम आत्मा को भव से तार सकते है। प्रवचन में जिनवाणी के श्रवण के समय हर शब्द के सही अर्थ को समझने से ज्ञान का बोध होता है।
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