

गणधर गौतम प्रभु के रास का वांचन आज
आत्म-परमात्म स्वरूप को जानने वाला जैनी-गणिवर्य मेहुल प्रभ सागर म.सा.
बीकानेर, 21 अक्टूबर। गणिवर्य मेहुल प्रभ सागर म.सा, मुनि मंथन प्रभ सागर, बाल मुनि मीत प्रभ सागर, साध्वी दीपमाला व शंखनिधिश्रीजी के सान्निध्य में भगवान महावीर के मोक्ष कल्याणक दिवस पर मंगलवार को रांगड़ी चौक के सुगनजी उपासरे में तथा अनेक श्रावक-श्रावकाओं ने अपने घरों में मंत्र जाप किया।
गणिवर्य, मुनि व साध्वीवृंद के सान्निध्य में बुधवार को सुगनजी महाराज के उपासरे में सुबह छह बजे भगवान महावीर के प्रमुख गणधर गौतम के रास का वांचन, सप्त स्मरण व भक्तामर, शांति स्तोत्र का पाठ होगा। पाठ के बाद गणिवर्य म.सा. के सान्निध्य मेंं श्रावक-श्राविकाएं डागों के महावीर जी मंदिर में भगवान महावीर के निर्वाण का लड्डू चढ़ाएंगे। मंगलवार को साध्वी शंखनिधि म.सा. के सांसारिक वीर सतीश भंसाली, वीर माता मंजूला, बहिन गरिमा, प्राची, भाई मानव का अभिनंदन वरिष्ठ श्रावक विजय चंद पारख, कृष्ण लूणिया व पंकज सिंघवी, वीर श्राविका पुष्पा कोचर व पुष्पा बोथरा ने किया।
प्रवचन- वीर प्रभु महावीर की अंतिम देशना व पुण्यपाल राजा के स्वप्नों का वर्णन किया। उन्हांने ’’जैन शब्द’’ की व्याख्या करते हुए कहा कि आत्म-परमात्म स्वरूप को पहचानने वाला तथा देव, गुरु व धर्म तथा परमात्मा के शासन की आज्ञाओं का पालन करने वाला जैनी कहलाता है। परमात्मा का शासन शेर जैसा है, उसमें प्रवेश करने पर कल्याण है।
उन्होंने कहा कि वर्तमान मेंं कुछ लोग देव, गुरु व धर्म की आराधना को बोसिरा (त्याग) कर अपना आत्मिक अनर्थ कर रहे है। देव पूजा से हमारा संसार हरा भरा रहता है। सांसारिक आपतियां टल जाती है तथा अनुकुलताएं मिलती है। देव पूजा से व्यवहार, संस्कार अच्छे मिलते है तथा आत्म सुख व मोक्ष का मार्ग मिलता है। उन्होंने पुण्यपाल राजा के 5 व 6 वें स्वप्न तथा पांचवें आरे की स्थिति का वर्णन करते हुए कहा संसार दुखमय तथा मोक्ष ही अनंत सुखमय है।










