बीकानेर अपूरणीय क्षति
हिंदी- राजस्थानी कवि, शिक्षाविद् , संपादक, कुशल मंच संचालक, बीकानेर के चलते- फिरते एनसाइक्लोपीडिया
भवानी शंकर व्यास ‘विनोद’
नहीं रहे।वे आज हमसे बहुत दूर चले गए। साहित्य के वटवृक्ष आदरणीय भवानीशंकर जी व्यास “विनोद” का आज सवेरे 11.30 बजे उदयपुर में स्वर्गवास हो गया।साहित्य की एक बड़ी धरोहर समाप्त सी हो गई। वे एक उत्कृष्ट कवि और साहित्यकार थे उन्होंने कई पुस्तकें लिखी। वे बीकानेर शहर की रौनक थे। १९५८-६० में मैं और सत्र न्यायाधीश लीलाधर स्वामी उनके शिष्य थे। वे हमे डाँटते- फटकारते, भी थे और प्यार भी बहुत करते थे। उनकी शिक्षा की बदोलत हम आज़ कुछ बन सके। वे पवनपुरी में हमारे पड़ोसी भी थे उनके सपुत्र डॉ.राकेश केंसर रोग के विशेषक्ष थे इलाज के दौरान उन्होंने मेरा काफ़ी साहस बढ़ाया। वे अब उदयपुर में मेडिकल कैंसर यूनिवर्सिटी के हेड है । आदरणीय गुरुजी श्री भवानीशंकर व्यास विनोद उमर के आख़िरी पड़ाव पर अपने पुत्र डा. राकेश के साथ उदयपुर रह रहे थे। वे ९० वर्ष के थे और साहित्य और लेखन में काफ़ी सक्रिय रहे। अपने समय में उनका अपना एक लोकप्रिय कवि परिवार था। हरीश भदानी, मोहम्मद सद्दीक, धनंजय वर्मा, भीम पण्ड्या महेश जोशी के साथ जयहिंद होटल में हमेशा शाम को इनकी महफिल सजतीथी । वे मुझे भी हमेशा लिखने के लिए प्रेरित करते और वक्त आया कि मेरे पत्र बीकानेर एक्सप्रेस में इनकी रचनायें छपती। सही मायने में उनका हमे छोड़कर चले जाना बीकानेर के साहित्यवर्ग की बहुत बड़ी क्षति हैं जिसकी कभी पूर्ति नहीं हो सकती। ईश्वर उनकी आत्मा को शांति दे। उन्हें मेरा शत शत नमन। ——— मनोहर चावला





























