

मोमासर में उमड़ा सेवा का सैलाब: सात समंदर पार से आए विशेषज्ञों ने चमकाई 1200 ग्रामीणों की मुस्कान
मोमासर। सेवा जब सीमाओं को लांघती है, तो बदलाव की एक नई इबारत लिखी जाती है।
कुछ ऐसा ही नजारा बीकानेर के मोमासर गाँव में देखने को मिला, जहाँ सुरवि चैरिटेबल ट्रस्ट के सौजन्य से आयोजित निःशुल्क डेंटल कैंप ने आधुनिक चिकित्सा और अंतरराष्ट्रीय सेवा भाव की अनूठी मिसाल पेश की।
बेल्जियम की टीम ने संभाला मोर्चा
कैंप का मुख्य आकर्षण बेल्जियम से आए विशेषज्ञ डॉ. मर्लिन, अनायास और लीसा रहे।
इन विदेशी विशेषज्ञों ने अत्याधुनिक मशीनों के जरिए ग्रामीणों के दांतों की जटिल समस्याओं का समाधान किया।
कैंप के समापन पर ट्रस्ट के प्रतिनिधियों द्वारा इन विशेषज्ञों को शॉल ओढ़ाकर और स्मृति चिह्न भेंट कर राजस्थानी परंपरा के साथ सम्मानित किया गया।
आंकड़ों में कैंप की सफलता:
कुल लाभान्वित: 1223 से अधिक ग्रामीण एवं बच्चे।
स्कूली बच्चे: आदर्श विद्या मंदिर और इचरच देवी पटावरी स्कूल के 723 बच्चों की स्क्रीनिंग व उपचार।
ग्रामीण: मोमासर और आसपास के ढाणियों से आए 500 से अधिक लोग
तकनीक और सेवा का संगम कैंप में केवल जांच ही नहीं, बल्कि दांतों का निष्कासन (Extraction), फिलिंग (मसाला भरना) और ओरल हाइजीन की ट्रेनिंग भी दी गई साथ ही, मरीजों को उपचार के बाद निःशुल्क दवाएं वितरित की गईं।
स्थानीय विशेषज्ञों में डॉ. ओमप्रकाश, डॉ. अरविंद, डॉ. विजय और मोहम्मद जफर ने बेल्जियम की टीम के साथ मिलकर कंधे से कंधा मिलाकर अपनी सेवाएं दीं।
इन्होंने निभाया सेवा का संकल्प
कैंप को सफल बनाने में किशनलाल जी पटावरी, विपिन जी जोशी, जुगराज जी संचेती, बजरंग लाल जी सोनी, जगत जी पटावरी और राजेश रोहिल्ला के द्वारा डॉक्टर और स्वयं सेवकों का ट्रस्ट का प्रतीक चिन्ह देकर सम्मानित किया गया साथ ही, व्यवस्थाओं को सुचारू बनाने के लिए संजय सुथार, सांवरमल शर्मा, निशि उपाध्याय,बाबू लाल गर्ग और युवा स्वयंसेवकों की टीम को भी सर्टिफिकेट देकर नवाजा गया।
निष्कर्ष: यह कैंप केवल उपचार का केंद्र नहीं, बल्कि मानवता और अंतरराष्ट्रीय मित्रता का प्रतीक बनकर उभरा। मोमासर के ग्रामीणों ने विदेशी डॉक्टरों को भारी मन और ढेर सारी दुआओं के साथ विदा किया।


























