
कैसे कहूं बजट है रंगीन !चौथा स्तंभ सामाजिक सुरक्षा पेंशन के लायक भी नहीं !!?
-मोहन थानवी
राजस्थान में निकट भविष्य में कोई चुनाव नहीं होने का खमियाजा राजस्थान के पत्रकार, युवा, महिलाएं और मध्यम से लेकर निम्न आय वर्ग के लोगों को उठाना पड़ रहा है । बीते दिनों जिन राज्यों में चुनाव हुए वहां-वहां राजनीतिक दलों ने घोषणा से ही विभिन्न वर्गों के लोगों की झोलियां भर दी । लेकिन राजस्थान में 2026 का पेश किया गया बजट महज आंकड़ों का पुलिंदे की मानिंद सामने आया है। इसमें ना तो पत्रकारों के लिए कोई विशेष सुविधा की घोषणा है ना महिलाओं के लिए । न ही ऐसे ही उल्लेखित किए गए किसी अन्य वर्ग के लिए। विडंबना तो यह है कि बीते वर्षों में अधिस्वीकृत पत्रकारों को आरजीएचएस में शामिल करने की घोषणा प्रक्रिया के मुताबिक पूरी तो कर दी गई लेकिन लाभार्थियों में से प्रभावित चंद ऐसे पत्रकार जो अभी तक सरकार से सहायता राशि प्राप्त करने के पात्रता पूरी नहीं कर सके हैं, उनकी सामाजिक सुरक्षा योजना की पेंशन आरजीएचएस में शामिल किए जाने के बाद से बंद कर दी गई है। इस बजट में फिर से उन्हें राहत देने का जिक्र नहीं किया गया है । ऐसे पत्रकारों में अधिकांश ऐसे आयु वर्ग के हैं जिनकी आय अर्जित न कर पाने से उत्पन्न परेशानी सहज ही समझ में आ जाती है। लेकिन जिन्होंने बजट तैयार किया उन्हें वह परेशानी भी समझ नहीं आई । अब जाहिर बात है शासन-संबंधित प्रचार तंत्र बजट की खूबियों को पाठकों तक प्रस्तुत आवश्यक रूप से करेगा और करना भी चाहिए लेकिन जिन लोगों को झुनझुना तक नहीं थमाया गया उनके बारे में कौन लिखेगा !! पत्रकारों के संबंध में इस बजट में कुछ भी नहीं होना चौथे स्तंभ को नकारने के समान माना जा रहा है ।



























