


साहित्यकार आचार्य देवेन्द्र देव को मिला स्व. रामरतन कोचर स्मृति पुरस्कार
एक ट्राइसाइकिल, 11 महिलाओं को सिलाई मशीनें व 3४ बच्चों को विद्यालय पौशाक वितरित की गई
बीकानेर। 44 वर्ष बाद भी जिनके नाम से सद्कार्य हो रहे हैं और जिनकी पहचान पीढिय़ों को सद्मार्ग दिखाती रहे ऐसी शख्सियत अमर हो जाती हैं। स्व. रामरतन कोचर एक ऐसा व्यक्तित्व हैं जो देशभक्ति, धर्म और समाज सेवा के क्षेत्र में सर्वोच्च नजर आते हैं। यह उद्गार पूर्वमंत्री डॉ. बीडी कल्ला ने कोचर सर्किल पर आयोजित समारोह को सम्बोधित करते हुए व्यक्त किए। 8 मार्च 2026, रविवार को स्व. रामरतन कोचर की 44वीं पुण्यतिथि को सद्भावना दिवस के रूप में मनाते हुए सम्मान समारोह का आयोजन किया गया। पूर्व मंत्री डॉ. कल्ला ने अपने सम्बोधन में कहा कि स्व. कोचर न केवल स्वतंत्रता सेनानी रहे बल्कि आजाद भारत में भी शिक्षा व चिकित्सा सहित अनेक क्षेत्रों में विकास हेतु संघर्षरत रहे। उनके द्वारा किए गए कार्य आज मील का पत्थर साबित हो रहे हैं, खासतौर बीकानेर में वेटरनरी कॉलेज व मेडिकल कॉलेज की स्थापना में भाईजी का महत्वपूर्ण योगदान रहा। डॉ. कल्ला ने कहा कि स्व. कोचर का देश व समाज के प्रति समर्पण जन-जन के लिए प्रेरणादायी है। समारोह में मुख्य अतिथि पूर्व मंत्री डॉ. बीडी कल्ला, विशिष्ट अतिथि पूर्व मंत्री भंवरसिंह भाटी, रायसिंहनगर विधायक सोहन नायक, मुख्यवक्ता प्रो. सतीश कुमार वाराणसी (उत्तर प्रदेश) रहे। समारोह को सम्बोधित करते हुए पूर्व मंत्री भंवर सिंह भाटी ने कहा कि स्वतंत्रता सेनानी, समाजसेवी, पूर्व विधायक के रूप में स्व. रामरतन कोचर सुभाषचन्द्र बोस की प्रेरणा को मानने वाले तथा गांधीजी के अनुयायी स्व. कोचर द्वारा बीकानेर में मलेरिया महामारी के समय जरुरतमंदों को दवाइयां देना तथा अनाज की आपूर्ति करवाने का भी सेवा कार्य किया गया। स्व. कोचर ने अकाल के समय राजस्थान रिलीफ सोसायटी का गठन कर किसानों व ग्रामीणों के लिए तन-मन-धन से कार्य किया। यही कारण है कि वे जनमानस में आज भी लोकप्रिय हैं
समारोह में विशिष्ट अतिथि रायससिंहनगर विधायक सोहन नायक ने अपने उद्बोधन में कहा कि स्व. कोचर के संस्कारों की ही देन है कि उनके पुत्र वल्लभ कोचर को भी रायसिंहनगर में भाईजी के रूप में पहचान मिली है। विधायक सोहन नायक ने कहा कि जिस व्यक्ति के प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरु से आत्मीय संबंध रहे हों वह केवल परिवार के नहीं बल्कि पूरे देश के विकास की बात करते थे। मुख्य वक्ता सतीश कुमार वाराणसी ने कहा कि काशी की अंजलि से उस महान् व्यक्तित्व को श्रद्धांजलि अर्पित कर गौरवान्वित महसूस कर रहे हैं और वर्षों बाद भी स्व. कोचर के विचार आज भी जीवित हैं जो उनकी विद्वता को दर्शाते हैं।
समारोह में साहित्यिक क्षेत्र में आचार्य देवेन्द्र देव को सम्मानित किया गया। आचार्य देवेन्द्र देव को 21 हजार रुपए नगद राशि, शॉल, साफा, श्रीफल एवं प्रशस्ति पत्र से सम्मानित किया गया। श्रद्धा महनोत एवं याशिका कोचर ने आचार्य देवेन्द्र देव का तिलक कर अभिनंदन किया। पुरस्कार समिति के जानकीनारायण श्रीमाली ने आचार्य देवेन्द्र देव की साहित्यिक यात्रा के बारे में जानकारी प्रदान की। आचार्य देवेन्द्र देव ने कविताओं के माध्यम से श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि स्व. रामरतन कोचर के विचार आज भी जीवित हैं। श्रेष्ठता तो इस बात की है कि उनकी पीढिय़ां उन विचारों को आगे बढ़ा रही है और उनके बताए मार्ग पर अग्रसर हो रही है। इससे पूर्व अमित कोचर, उपेन्द्र कोचर एवं रौनक कोचर ने मंगलाचरण, स्वागत गीत की प्रस्तुति दी। समिति के संतोष जैन ने बताया कि सद्भावना स्वरूप एक विकलांग को ट्राईसाईकिल, ग्यारह महिलाओं को सिलाई मशीन एवं 34 छात्र-छात्राओं को विद्यालय पोशाक दी गई। कार्यक्रम का संचालन सरोज कोचर, जितेन्द्र कोचर व सुमित कोचर ने किया। आगन्तुकों का आभार समिति की ओर से विधायक सोहन नायक द्वारा व्यक्त किया गया। अतिथियों का स्वागत डॉ. धनपत कोचर, गणेश बोथरा, जयचंदलाल डागा, बसंत नौलखा, विनोद बाफना, कन्हैयालाल बोथरा, वरिष्ठ पत्रकार प्रकाश पुगलिया, टेकचन्द बरडिय़ा, सुमति बांठिया, सुनील बोड़ा, अरविन्द मिढ्ढा, अमित कोचर, इंद्रमल सुराना, बि_ल बिस्सा, दिलीप चौधरी, महेन्द्र पुगलिया, मुकेश जोशी, सुधीर मेघवाल, निर्मल बिश्नोई, मदनगोपाल मेघवाल, शशिकला राठौड़, यशपाल गहलोत, सलीम भाटी, राहुल जादूसंगत, मनोज चौधरी, जयदीप जावा, मैक्स नायक, शर्मिला पंचारिया, आशा देवी स्वामी, कैलाश गहलोत, सांगीलाल वर्मा, शिवरी चौधरी, अब्दुल रहमान लोदरा, गोरधन मीणा, मगन पाणेचा, कुशल बाफना, हेमन्त सिंगी, किशोर बांठिया, सत्यनारायण डागा, विश्वजीत गौड़, तिलोकचंद कोचर, जेठमल सुराना, नरेन्द्र राखेचा, रामप्रताप डेलू, हंसराज बिश्नोई, आनन्दमल मणोत, रूपाराम गोदारा, पन्नालाल महनोत, देवेन्द्र सोनी, सिद्धार्थ सोनी, मानमल सेठिया सहित सैकड़ों जनों ने स्व. कोचर को पुष्पांजलि अर्पित की।


























