
बीकानेर _ जस्सुसर गेट श्री लक्ष्मीनाथ जी मन्दिर में श्रीमद् भागवत कथा के अष्टम दिवस में सुदामा चरित्र के माध्यम से भगवान ने गरीबी अमीरी से ऊपर उठकर मित्रता को महत्व दिया। सूर्य ग्रहण के समय कुरुक्षेत्र में वासुदेव जी ने यज्ञ किया, उस समय 100 वर्षों के पश्चात राधा कृष्ण का मिलन हुआ। सुभद्रा हरण की कथा के बाद भस्मासुर की कथा सुनाते हुए यह बताया गया कि किस प्रकार ब्राह्मणों की परीक्षा लेने से यदुवंश को श्राप लगा। स्वधाम जान से पहले भगवान ने उद्धव जी को अवधूत गीता एवं दत्तात्रेय के 24 गुरुओं का महत्व समझाया, नौ योगेश्वरों की कथा के साथ भिच्छुक गीता का मरण समझाया गया। इसके बाद सुखदेव जी का पूजन तथा कलयुग गीता का वर्णन करते हुए वेदों और पुराणों की कथा का विस्तार करते हुए समझाया गया। अंत में भागवत उत्थानिका का वर्णन किया। श्रीमद् भागवत के माध्यम से सरलता, सहजता और सजगता के द्वारा जीवन की सफलता का संदेश दिया गया।
व्यवस्थापक एवं पूर्व पार्षद श्याम सुंदर चांडक ने बताया कि धार्मिक सामान्य ज्ञान परीक्षा में प्रथम स्थान पर रहे श्रीमती सरोज बिहानी एवं श्रीमती प्रेमलता कोठारी के सहित अन्य 10 परीक्षार्थियों को सेठ शिवप्रताप उद्योदास सुंदरलाल चांडक परिवार की तरफ से पुरस्कार एवं मानस वेदांग मीमांसालय की तरफ से संयुक्त प्रमाण पत्र दिया गया। अंत में धूमधाम से शोभा यात्रा निकाली गई एवं प्रसाद का वितरण किया गया। सभी आगंतुकों का धन्यवाद ज्ञापित किया गया।














