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राष्ट्रीय डेंगू दिवस पर जिले भर में हुई जनजागरण और एंटी-लार्वा गतिविधियां, जिला स्तरीय दल पहुंचा शोभासर गांव


बीकानेर, 16 मई। राष्ट्रीय डेंगू दिवस के अवसर पर शनिवार को जिले भर के स्वास्थ्य केंद्रों, विद्यालयों एवं सार्वजनिक स्थानों पर व्यापक स्तर पर एंटी-लार्वा और जनजागरण गतिविधियां आयोजित की गईं। इस वर्ष अभियान की थीम “डेंगू नियंत्रण के लिए जनभागीदारी; जांच करें, साफ करें और ढकें” के तहत आमजन को जागरूक किया गया। इसी क्रम में डिप्टी सीएमएचओ स्वास्थ्य डॉ. लोकेश गुप्ता जिला स्तरीय टीम के साथ शोभासर गांव पहुंचे, जहां विभिन्न क्षेत्रों में सघन अभियान चलाया गया।

*शोभासर गांव में सघन अभियान और समझाइश:*
जिला स्तरीय दल द्वारा शोभासर गांव के प्रमुख मंदिरों, चौपालों, चौकों और बस स्टैंड आदि सार्वजनिक क्षेत्रों में सघन एंटी-लार्वा गतिविधियां संचालित की गईं और ग्रामीणों को समझाइश दी गई। इसके साथ ही राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय शोभासर में एक विशेष कार्यशाला आयोजित कर विद्यार्थियों तथा स्टाफ को डेंगू रोग के कारण और निवारण की विस्तृत जानकारी दी गई।

*मच्छर के जीवन चक्र और गंबूशिया मछली का प्रदर्शन:*
कार्यशाला में डॉ. लोकेश गुप्ता, डाटा मैनेजर प्रदीप चौहान तथा सहायक मलेरिया अधिकारी अशोक व्यास ने मौके पर गंबूशिया मछली और मच्छरों के लार्वा का प्रदर्शन कर बेहद रोचक तरीके से मच्छर नियंत्रण को समझाया। डॉ. गुप्ता ने बताया कि डेंगू बुखार चितकबरी धारियों वाले मादा एडीज एजिप्टी मच्छर के काटने से फैलता है, जिसे ‘टाइगर मच्छर’ भी कहा जाता है। यह मच्छर केवल साफ पानी में अंडे देता है। उन्होंने अंडे से लेकर वयस्क मच्छर बनने के सात दिवसीय जीवन चक्र को समझाते हुए कहा कि यदि हम हर सात दिन में रुके हुए साफ पानी को हटा दें या सूखा दें, तो इस चक्र को तोड़ा जा सकता है।

*हर रविवार मनाएं ‘ड्राई डे’, पक्षियों के परिंडे और कबाड़ की करें सफाई:*
डॉ. गुप्ता ने सभी बच्चों और ग्रामीणों से अपील की कि वे हर रविवार की सुबह को ‘ड्राई डे’ के रूप में मनाएं और अपने घर व आस-पड़ोस में ठहरे हुए पानी के स्रोतों को साफ कर सुखाएं। प्रदीप कुमार चौहान ने घर और आसपास पानी जमा होने वाले प्रमुख 25 स्थानों को चिन्हित करते हुए विशेष रूप से फ्रिज की ट्रे, एसी के पाइप, छत पर रखे कबाड़, टायर और पक्षियों के परिंदों की नियमित सफाई पर जोर दिया।

*चिकित्सक की सलाह से ही लें दवा:*
उन्होंने बताया कि मानसून से पहले इस सूखे मौसम में यदि एंटी-लार्वा गतिविधियां कर ली जाएं, तो मानसून के बाद डेंगू के प्रसार की संभावना बेहद कम हो जाती है। डॉ. गुप्ता ने स्वास्थ्य सलाह देते हुए कहा कि डेंगू बुखार में सामान्यतः पैरासिटामोल का उपयोग होता है, इसलिए लक्षण दिखने पर चिकित्सक को दिखाकर जांच कराएं। बिना डॉक्टरी सलाह के स्वयं एंटीबायोटिक या अन्य दवाइयां लेना नुकसानदायक हो सकता है। इस अवसर पर विद्यालय की प्रधानाचार्या श्रीमती आशा खत्री, जीएनएम जावेद, सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी किरण, एएनएम मुकेश कुमारी, आशा सहयोगिनी रुकमा सहित विद्यालय स्टाफ और ग्रामीण उपस्थित रहे।

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Gordhan Soni

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