बीकानेर, 19 अगस्त। अखिल भारतीय साधुमार्गी जैन संघ के हुक्म संघ के नवम पट्टधर आचार्य प्रवर 1008 रामलाल जी म.सा.,व उपाध्याय प्रवर राजेश मुनि के चातुर्मास (समर्पण महोत्सव-2026 ) के तहत छबीली घाटी के सेवा सदन में चल रही श्राविकाओं की विशेष कार्यशाला ’’अब नहीं तो फिर कब’’ में बुधवार को मधुर मुनि का विशेष व्याख्यान हुआ।
साधुमार्गी महिला मंडल अध्यक्ष ललिता बांठिया ने बताया कि मधुर मुनि ने कहा कि कहा कि ’’मां जाने बाप को और मन जाने पाप को’’ । उन्होंने कहा कि पत्नी पति को जितना जानती है, उतना दूसरा कोई नहीं जान सकता । इसी तरह जाने-अन्जाने में हुए पाप कर्म को मन से अधिक कोई नहीं जान सकता । मन को मजबूत करें तथा सभी तरह के पाप कर्मों से बचें। उन्होंने कहा कि जीव अपनी अल्प आयु व पाप का तीन कारणों से बंधन करता है, जीव हिंसा करके, झूठ बोल के तथा संत-साध्वी वृंद को झूठ बोल कर आहार पानी देने से । मनुष्य को चाहिए कि पापों से बचे तथा पुण्यों का संचय करें। उन्होंने सामायिक में तीन बार गुरु वंदना की विधि को विस्तार से बताया।












