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कैलाश मानसरोवर यात्रा पूरी कर बीकानेर पहुंचे मूलचंद गहलोत, ढोल-नगाड़ों के साथ हुआ भव्य स्वागत बीकानेर।

“मेरे बाबा से मिलना आसान नहीं है, उनके दरबार तक पहुंचने के लिए कुछ कष्ट उठाना पड़ता है।” भगवान शिव के प्रति अपनी आस्था व्यक्त करते हुए कैलाश मानसरोवर की पवित्र यात्रा पूरी कर बीकानेर पहुंचे कैलाशी मूलचंद गहलोत का पूर्व कैलाशियों एवं परिजनों ने ढोल-नगाड़ों और पुष्पवर्षा के साथ भव्य स्वागत किया।कैलाश मानसरोवर की यात्रा पूर्ण कर रविवार को बीकानेर पहुंचे मूलचंद गहलोत के आगमन पर माहौल भक्तिमय हो गया। पूर्व कैलाशियों ने ढोल-नगाड़ों के साथ उनका स्वागत किया और भगवान भोलेनाथ के जयकारों से वातावरण गूंज उठा। इस अवसर पर परिवार के सदस्यों और शुभचिंतकों ने उनका माल्यार्पण कर अभिनंदन किया।मूलचंद गहलोत के बीकानेर पहुंचने के साथ ही इस वर्ष बीकानेर से कैलाश मानसरोवर की पवित्र यात्रा पर गए सभी कैलाशियों की यात्रा पूर्ण हो गई। इस अवसर पर पूर्व कैलाशियों ने यात्रा के अनुभव साझा करते हुए कहा कि कैलाश मानसरोवर की यात्रा केवल एक धार्मिक यात्रा नहीं, बल्कि आस्था, तपस्या और आत्मिक अनुभूति का अद्भुत संगम है।स्वागत समारोह के दौरान पूर्व कैलाशी अजय खत्री ने भगवान शंकर के प्रति अपनी आस्था व्यक्त करते हुए स्वयं द्वारा रचित भजन प्रस्तुत किया। “मेरे बाबा से मिलना आसान नहीं, कुछ कष्ट उठाना पड़ता है” भाव से रचित इस भजन ने उपस्थित लोगों को भाव-विभोर कर दिया। भजन के दौरान पूरा माहौल शिवमय हो गया और श्रद्धालु भाव-विभोर होकर भगवान शिव का स्मरण करते नजर आए।इस अवसर पर पूर्व कैलाशी योगेश झा, उर्मिला राजपुरोहित, बाबूराम जी राजपुरोहित तथा के.के. पारिख केसुराम सहित अन्य श्रद्धालुओं ने मूलचंद गहलोत का भव्य स्वागत किया। सभी ने उन्हें कैलाश मानसरोवर की सफल यात्रा पूरी करने पर शुभकामनाएं दीं और भगवान भोलेनाथ से उनके स्वस्थ एवं सुखी जीवन की कामना की।मूलचंद गहलोत के घर पहुंचने पर परिवार के सभी सदस्यों की आंखों में खुशी के आंसू छलक पड़े। लंबे समय बाद यात्रा पूरी कर घर लौटे परिजन को देखकर भावुक हो गए। परिवार की महिलाओं एवं अन्य सदस्यों ने भगवान भोलेनाथ के भजनों पर नृत्य कर खुशी मनाई। घर में उत्सव जैसा माहौल नजर आया और पूरा परिवार भोलेनाथ की भक्ति में डूबा दिखाई दिया।
परिजनों ने कहा कि कैलाश मानसरोवर की यात्रा उनके लिए बेहद भावुक और आध्यात्मिक अनुभव रही। यात्रा से लौटे मूलचंद गहलोत ने भी भगवान शिव के प्रति अपनी श्रद्धा व्यक्त करते हुए यात्रा को जीवन का अविस्मरणीय अनुभव बताया।

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Gordhan Soni

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