


आंखों में भरे सपने.. गड़े लाज शर्म कुछ बचा नहीं..
गलती हुई या गलती नजर में आई..! मतलब काम तो हुआ है।
स्वास्थ्य एवं साहित्य संगम… राष्ट्रीय कवि चौपाल 582 वीं श्रंखला *रक्षाबंधन.. सर्वत्र चन्दन* को समर्पित रही आज़ के कार्यक्रम की अध्यक्षता में श्री मती सरोज भाटी मुख्य अतिथि में प्रमोद शर्मा, कमल किशोर पारीक, विशिष्ट अतिथि में सरदार अली परिहार, कृष्णा वर्मा आदि मंच सुशोभित हूए कार्यक्रम शुभारम्भ करते हुए रामेश्वर साधक ने स्व बौद्धिक में कहा कि वर्तमान परिप्रेक्ष्य में रक्षा बंधन की महत्ता गुणात्मक बढ़ जाती है जो रक्षा संस्कृति की, चरित्र अस्मिता की, धर्म संरक्षण की हो इससे पूर्व सरोज भाटी ने ही मां सरस्वती की आराधना प्रार्थना संदर्भ मौलिक रचना सुनाकर कार्यक्रम को गति दी
कार्यक्रम अध्यक्षा श्रीमती सरोज भाटी ने बताया कि अनुशासन-आदर्श स्थायित्व करना साहित्यकार प्रथम साहित्य धर्म होता है स्व रचना में काळी काळी दिखै बादळी टेढी मेढी जावै रै, प्रमोद शर्मा : क्षमा करना मेरी बहना क्षमा करना… आंखों में भरे सपने.. गड़े लाज शर्म कुछ बचा नहीं.. कमल किशोर पारीक : कल्पना में आज़ भी है, बचपन बहन से झगड़ा, भाई से तकरार फिर प्यार… कृष्णा वर्मा : रक्षा बंधन का पर्व रक्षा सुत्र का अटूट बंधन,भाई बहन के स्नेह का दिल से जुड़ता बन्धन … सरदार अली परिहार : भाई बहन की सुरक्षा करें तो ही संसार चलेगा, चलता चल तूं भाई चलता चल कर्मठ पुरुषार्थी व्यक्तित्व पर शानदार कविता सुनाकर सदन में वाहवाही बटोरी
शिव दाधीच बीकानेरी : मैं शब्दों का क़लम सिपाही, गीत भावों से गाता हूं। अपने सारे दर्द छुपाकर गीत वतन के गाता हूं.. रामेश्वर साधक : गलती हुई या गलती नजर में आई, मतलब काम तो हुआ है। क्रांति – कीर्ति की ओझमयी लपटें निकलेगी,..गलती तो कर्म यज्ञ का शुरुआती धुंआ है नरेश नाथ : कागज़ का पन्ना उड़ता जा रहा, कोई उसके आगे कोई उसके पीछे जा रहा.. धर्मेंद्र राठोड़ धन्नजय : तूं खुद का नहीं.. फिर कैसे होगा मेरा.. कैलाश दान चारण : सुखिया सब संसार भांडा घड़े कुम्हार .. राधा किशन सोनी : सुनों मेरे बंधु रै सुनों मेरे मितवा .. पवन चड्ढ़ा : बंधा हुआ है धागे भाई बहन का प्यार राखी धागों का त्योंहार
आज़ के कार्यक्रम में साहित्य वृंद ने 17 प्रस्तुतियां दी गई आज़ कार्यक्रम में भवानी शंकर सुथार, ओमप्रकाश भाटी, छोटू खां खोखर, घनश्याम सौलंकी, नत्थू, अब्दुल करीम, शिव प्रकाश शर्मा, आदि कई गणमान्य साहित्यानुरागी मौजूद रहे कार्यक्रम संचालन आध्यात्म संवाद के रामेश्वर साधक ने किया
सूचना संवाहक रामेश्वर साधक
9672990496












