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जापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय
पांच दिवसीय रक्षा बंधन पर्व, मातृ शक्ति के बांधा रक्षा सूत्र

बीकानेर, 26 अगस्त। प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय के संभागीय केन्द्र सादुल गंज की ओर से रक्षा बंधन पर्व के तहत बुधवार को केन्द्र प्रभारी बी.के.कमल के प्रवचन से शुरू हुआ। मातृ शक्ति का सम्मान करते हुए माताओ बहनों का रोली मोळी से तिलककर मुंह मीठा करवाया तथा कलाई पर रंग-बिरंगी राखी बांधी तथा शुभ संकल्प का करवाया। अपने प्रवचन में बी.के.कमल ने कहा कि रक्षा बंधन का पावन पर्व मानवता के दिव्य संस्कारों को संस्कारों को उदत करता है। रक्षा बंधन का पर्व सनातन संस्कृति की अमूल्य धरोहर है हमारे जीवन में यह पर्व एकता, सहयोग और भातृत्व भावना का संचार करता है। उन्होंने सहनशीलता, नम्रता, मधुरता, धैर्य ,शीतलता के पांच दिव्य गुणों को धारण करने की प्रतिज्ञा दिलवाई। पांच दिवसीय रक्षा बंधन पर्व के तहत गुरुवार को सादुल गंज स्थित केन्द्र में सभी कुलभूषण भाईयों के सुबह सात से नौ बजे तक रक्षा सूत्र बांधा जाएगा। उत्सव में बी.के. हंसमुख भाई, बी.के.रजनी ,बी.के राधा ने भागीदारी निभाई।
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हर काल व परिस्थिति में धर्म आराधना को नहीं छोडे- साध्वीश्री मुक्तांजनाश्रीजी
बीकानेर, 26 अगस्त। बीकानेर के रांगड़ी चौक के सुगनजी महाराज के उपासरे में बुधवार सुरंजनाश्रीजी म.सा. की शिष्या साध्वीश्री मुक्तांजनाश्रीजी ने चातुर्मासिक प्रवचन में कहा कि हर काल व परिस्थिति में धर्म आराधना को नहीं छोड़ें। धर्म-आराधना से कर्मों का बंधन कटता है तथा पुण्यों का संचय होता है।
उन्होंने अमीचंद व जिनमति के कथानक के माध्यम से बताया कि पूर्व में संचित अच्छे बुरे कर्मों को भोगना ही पड़ता है। कर्म मनुष्य को भोगवाने में शर्म नहीं करते । कर्म मन, वचन और शरीर की क्रियाओं तथा कषाय (काम,क्रोध, लोभ व मोह ) आदि करणों से  कर्म बंधन होते ये कर्म बंधन ही विभिन्न प्रकार से व्यक्ति को शारीरिक, मानसिक व आर्थिक पीड़ा, दुःख व कष्ट पहुंचाते है। कर्म के प्रभाव के बढ़ाने से होने वाली पीड़ा व प्रताड़ना से विचलित हुए बिना समता भाव से देव, गुरु व धर्म की शरण में रहते हुए धर्म आराधना करें। इससे कर्म बंधन का प्रभाव कम होगा तथा पुण्यों का संचय व पापों का विसर्जन होगा। 
बीकानेर में पहली बार चातुर्मास कर रही साध्वीश्री मुक्तांजनाश्रीजी साध्वी सुरक्षाजनाश्री सौम्यजनांश्री, चिलेहांजनाश्री व चितक्खरांजनाश्री के सान्निध्य में एकासना, बेला, तेला, अट्ठाई, आयम्बिल आदि की तपस्याएं चल रही है। अगले माह बीस स्थानक पूजा का वृहद आयोजन होगा।

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Gordhan Soni

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