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आज बीकानेर में महिलाओं ने मने धूमधाम से बछ बारस पुत्र की मनोकामनाक लिए

*बीकानेर लाइव न्यूज़ रिपोर्टर दाऊ लाल कल्ला**बीकानेर में आज बछ बारस पर महिलाओं ने की गौ-वत्स की पूजा, पुत्र की लंबी आयु के लिए मांगा आशीर्वाद**बीकानेर।* आज बछ बारस के पावन पर्व पर बीकानेर में महिलाओं ने सामूहिक रूप से गाय और बछड़े की पूजा-अर्चना की। मान्यता है कि इस दिन गाय-बछड़े की पूजा करने से पुत्र की लंबी आयु होती है और पुत्र प्राप्ति की मनोकामना पूरी होती है।महिलाओं ने बताया कि बछ बारस की कथा के अनुसार प्राचीन काल में एक गांव में एक साहूकार रहता था। साहूकार की पत्नी ने अपनी पुत्रवधू से कहा कि मैं मंदिर पूजा करके आती हूँ, तब तक तुम _गवाला पककर_ रख लेन ग्रामीण भाषा में गवाला को कुछ जगह गाय का बछड़ा भी कहते हैं। पुत्रवधू ने इसे गलत समझ लिया और उसने गाय के बछड़े को हांडी में डालकर पका दिया। थोड़ी देर बाद जब सास लौटी तो उसने पूछा कि गाय का बछड़ा कहाँ है, गाय की पूजा करनी है। तब पुत्रवधू ने कहा कि मैंने तो बछड़े को पका दिया।यह सुनकर पुत्रवधू को अपनी गलती का एहसास हुआ और उसने गौ माता के आगे हाथ जोड़कर प्रार्थना की – हे गौ माता, आज मेरी लाज रख लो, जिस बछड़े को मैंने अनजाने में पका दिया है, उसे जीवित कर दो।कहा जाता है कि उसकी सच्ची प्रार्थना से गौ माता प्रसन्न हुई और बछड़े को जीवित कर दिया। तभी से यह मान्यता है कि बछ बारस के दिन हर महिला पुत्र की मंगल कामना के लिए गाय-बछड़े की पूजा करती है और गौ माता से प्रार्थना करती है कि जिस प्रकार उसने उस बछड़े को जीवनदान दिया, वैसे ही सबको पुत्र सुख प्रदान करे।महिलाओं ने बताया कि आज के दिन गेहूं से बनी हुई किसी वस्तु का सेवन नहीं किया जाता भैंस के दूध भैंस का दही भैंस का घी इतिहास वस्तुओं से आज भोजन किया जाता है और बासी भोजन किया जाता है

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