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गाय गीता और गायत्री को बचाने में मातृशक्ति सबसे आगे है.. बिहारीलाल बिश्नोई
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गाय गीता और गायत्री सहित भारतीय सनातन संस्कृति की रक्षा भारत की मातृशक्ति कर रही है। हमारे देश की मातृशक्ति संस्कारों, त्योहारों, व्रत, उपवास के माध्यम से पूरे विश्व में सनातन संस्कृति को आगे बढ़ाने का कार्य कर रही है इनकी जितनी प्रशंसा की जाए वह कम है यह विचार रविवार को मोहनपुरा टंकी के पास स्थित ईश्वर राम बाबू लाल सोनी परिवार द्वारा आयोजित की जा रही श्रीमद्भागवत कथा के समापन समारोह में स्थानीय विधायक बिहारीलाल बिश्नोई ने व्यक्त किए।
विधायक विश्नोई ने धर्म प्रेमी श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए कहा कि ताकतवर की सहनशीलता को हमें अपने जीवन में अपनाना चाहिए उन्होंने भगवान विष्णु को भृगु ऋषि द्वारा गुस्से में ठोकर मारने और लक्ष्मी जी द्वारा नाराज होने और भगवान विष्णु जी द्वारा जब नींद से जागने और ऋषि से पूछा कि आपके पैरों में चोट नहीं लगी यह होती है ताकतवर की सहनशीलता इस प्रकार के वृतांत को भागवत कथा में मौजूद धर्म प्रेमी लोगों के सामने व्यक्त किए। हम अपने जीवन में संबंध तो किसी से भी बना सकते हैं लेकिन रिश्तो की काबिलियत भी बनाए रखनी जरूरी होती है।
रविवार को श्रीमद् भागवत कथा के अंतिम दिन व्यासपीठ पर विराजमान धर्मेश जी महाराज ने कृष्ण सुदामा के चरित्र का विस्तार से वर्णन किया इस अवसर पर “अरे द्वारपालों कन्हैया से कह दो दर पे सुदामा गरीब आ गया है” भजन पर श्रोता भावविभोर होकर नृत्य करने लगे। अंतिम दिवस पंडाल खचाखच भर गया।
आयोजक परिवार द्वारा कथावाचक और उनके साथ शामिल रहे संगीतमय भागवत कथा में शामिल अन्य कलाकारों का सम्मान किया गया।
श्रीमद् भागवत कथा के समापन के बाद विशाल शोभायात्रा निकाली गई जो कस्बे के विभिन्न मार्गो से होती हुई आरकेस्वर महादेव मंदिर तहसील रोड पहुंची जहां कथा का विसर्जन किया गया।

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Gordhan Soni

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