
108 कुंडीय श्रीरामचरित मानस महायज्ञ का हुआ आगाज़
अग्निमंथन से प्रकट हुई अग्नि, मंत्रों की गूंज से पवित्र हुई धर्मनगरी

हजारों श्रद्धालुओं ने लगाई हवन परिक्रमा, सुनी संतों की वाणी
बीकानेर। बीकानेर में रविवार की सुबह सूर्य भगवान ने धर्म और अध्यात्म की किरणें बिखेरनी प्रारंभ की और सूर्य ढलने तक हर कोई धर्म के रंग में रंगा हुआ था। यह सब दृश्य था सुजानदेसर गंगाशहर-भीनासर गौचर भूमि पर बसे सियारामनगर का। रामझरोखा कैलाशधाम के पीठाधीश्वर श्रीसरजूदासजी महाराज ने बताया कि रविवार को 108 कुंडीय श्रीरामचरित मानस महायज्ञ यज्ञाचार्य पं. जुगलकिशोर ओझा के आचार्यत्व में प्रारंभ हुआ। यज्ञ ब्रह्मा पं. अशोक ओझा ने बताया कि श्रीगणेश पूजन से अनुष्ठान प्रारंभ किया गया। इसके बाद सभी यज्ञवेदियों पर देवताओं का आह्वान स्थापन किया गया। मातृका वेदी, वास्तु वेदी, योगिनी क्षेत्रपाल वेदी, नवग्रह वेदी, रुद्र कलश पूजन किया गया। इसके बाद भगवान श्रीरामदरबार का पूजन किया गया। इसके कुष्कुंडिका, अग्नि मंथन द्वारा अग्नि प्रकट और अग्निस्थापन किया गया। 108 कुंडीय यज्ञ में 429 यजमानों ने आहुतियां दी। खास माहौल तब दिखा जब सैकड़ों श्रद्धालुओं द्वारा हवन स्थल की परिक्रमा लगाई जाती।
श्रीसरजूदासजी महाराज को दी अखिल भारतीय संत संतति के राष्ट्रीय मंत्री पद एवं प्रदेश संरक्षक की जिम्मेदारी
महंत भगवानदासजी महाराज ने बताया कि संत सम्मेलन को सम्बोधित करते हुए श्रीश्री जगद्गुरु शंकराचार्य भगवान वासुदेवानंद सरस्वती ने कहा कि जब भी धर्म के कार्य और धार्मिक अनुष्ठान हो तो समझ लेना ईश्वर की कृपा हो रही है।













