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पीबीएम के एमसीएच में धूल फांक रहे 25 पेशेंट मॉनिटर 80 वेंटिलेटर समेत पांच करोड़ के उपकरण


बीकानेर,चीन के बच्चों में फैल रहे एविएन इनफ्लूएंजा माइकोप्लाज्मा निमोनिया से मुकाबले के लिए पीबीएम हॉस्पिटल सहित जिले के सभी चिकित्सा संस्थानों में कागजों में तो तैयारी कर ली, लेकिन इसे धरातल पर उतारने के लिए काफी मशक्कत करनी होगी।

चीन के बच्चों में फैल रहे एविएन इनफ्लूएंजा माइकोप्लाज्मा निमोनिया को लेकर सरकार ने एडवाइजरी जारी करते हुए कोविड-19 की गाइड लाइन फॉलो करने को कहा है। इसके तहत बुधवार को जिले में पीबीएम हॉस्पिटल सहित सभी चिकित्सा संस्थाओं में मॉकड्रिल के जरिए ऑक्सीजन प्लांट, बेड, आईसीयू, वेंटिलेटर सहित सभी उपकरण और दवाओं की स्थिति को देखा गया।

राहत की बात ये है कि चीन का वायरस देश में कहीं भी रिपोर्ट होने के समाचार अब तक नहीं है। फिर भी कोरोना की पहली वेव को ध्यान में रखते हुए पूर्व तैयारी की जा रही है। पीबीएम हॉस्पिटल में एमसीएच बिल्डिंग को वापस तैयार किया जाएगा, लेकिन इस बिल्डिंग में अभी तीन विभाग चल रहे हैं। इसके ग्राउंड फ्लोर पर महिलाओं में प्रसव पूर्व जांच का केंद्र बनाया हुआ है। इसके अलावा कोविड-19 का आईसीयू भी चल रहा है। इसके लिए चार नर्सेज का स्टाफ है, जबकि वहां कोई काम नहीं होता। बिल्डिंग के फर्स्ट फ्लोर पर दो बड़े हॉल आर्थो को दे दिए हैं। वहां हड्डी रोग विभाग के पेशेंट्स भर्ती किए जा रहे हैं। हालांकि ट्रोमा सेंटर में रिपेयरिंग का काम चलने के कारण मरीजों के लिए यह अस्थायी व्यवस्था की गई है।

कोविड काल में खरीदे गए थे पांच करोड़ के उपकरण

कोरोना काल में एमसीएच की बिल्डिंग को कोविड हॉस्पिटल में तब्दील किया गया था। कोरोना जाने के बाद उसे बंद कर दिया गया, लेकिन बिल्डिंग के कमरों में रखे वेंटिलेटर, आईसीयू बेड, मल्टीपल मॉनिटर, बेड साइड कार्डियक टेबल, ऑक्सीजन सिलेंडर सहित 40 तरह के उपकरणों की सार संभाल ही नहीं की। इनमें प्रधानमंत्री केयर और युवराज फाउंडेशन के उपकरण भी है। सभी पर धूल की गर्त चढ़ गई है। उपकरणों की कीमत 5.40 करोड़ रुपए है। इनमें 2.83 करोड़ के तो वेंटिलेटर और मॉनिटर ही हैं। सभी मेंटिनेंस मांग रहे हैं। बिल्डिंग में करीब 500 आइसोलेशन बेड और 80-90 वेंटिलेटर भी हैं। दान में मिले बैड्स की बेकद्री हो रही है। हालात देखकर लगता है सालों से वहां सफाई नहीं हुई है। पीबीएम प्रशासन को इन सभी को तैयार करना होगा। और यह इतना आसान नहीं है। क्योंकि इक्विपमेंट्स की मेंटिनेंस का काम किर्लोस्कर के पास है, जहां पहले से ही सौ से ज्यादा कॉल पेडिंग हैं।

सरकार की गाइड लाइन के तहत हमने मॉकड्रिल के जरिए सभी तरह की जरूरतों को परखा है। एमसीएच बिल्डिंग को भी जल्दी ही सुधारा जाएगा। वहां रखे इक्विपमेंट्स भी देखे जा रहे हैं। डॉ. पीके सैनी, अधीक्षक, पीबीएम हॉस्पिटल सर्दी का मौसम शुरू होने के साथ ही पीबीएम का बच्चा हॉस्पिटल भरने लगा है। बुखार, सर्दी, जुकाम, खांसी, निमूनिया, हेपेटाइटिस, पीलिया, कनवर्जन आदि बीमारियों के रोज 500 से 600 बच्चे पहुंच रहे हैं। इनमें से 50-60 को भर्ती किया जा रहा है। शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. प्रमोद बेरवाल का कहना है कि इस मौसम में हर साल इतने ही पेशेंट आते हैं। गंभीर बच्चों को तीन-चार दिन भर्ती रखकर छुट्टी दे दी जाती है।

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Prakash Samsukha

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