






बीकानेर, 7 जुलाई। आचार्यश्री जिन पीयूष सागर सूरिश्वरजी, बीकानेर के मुनि सम्यक रत्न सागर आदिठाणा, साध्वीश्री चिद्यशा आदि ठाणा के सान्निध्य में रविवार को नाल गांव में दादाबाड़ी के पास स्थित भगवान मुनिव्रत स्वामी के प्राचीन मंदिर की मूर्तियों को नए मंदिर में स्थापित किया गया।
श्री जैन श्वेताम्बर ओसवाल श्री संघ खरतरगच्छ ट्रस्ट के अध्यक्ष रतन लाल नाहटा ने बताया कि आचार्यश्री के सान्निध्य में शिखरबंद जिनालय तीर्थंकर भगवान मुनि मुनिव्रत स्वामी के महामंगलकारी गर्भगृह प्रवेश के दौरान शुक्र उत्सव, स्नात्र पूजा नवग्रह, दशदिग्पाल, अष्ट मंगल, क्षेत्रपाल सहित अधिष्ठायक व सह-देवी देवताओं का पूजन स्वयं आचार्यश्री ने मंत्रोच्चारण से करवाया।
उन्होंने बताया कि र् धरमपुर गुजरात के श्रीमद् राजचंद्र मिशन के संस्थापक गुरुदेवश्री राकेश भाई जवेरी की प्रेरणा व सहयोग से बीकानेर के सुश्रावक पुरखचंद, धनराज, दीपचंद डागा परिवार के वीरमती देवी धर्म पत्नी स्वर्गीय भंवर लालजी डागा परिवार के बीकानेर निवासी मुंबई प्रवासी अभय डागा-साधना देवी डागा परिवार ने नये मंदिर का निर्माण करवाया है।
आचार्यश्री जिन पीयूष सागर सूरीश्वरजी ने मंगल संदेश में कहा कि प्रतिदिन जिनालयों में दर्शन वंदन करने का नियम बनाएं। उन्होंने शांति पाठ सुनाया तथा सबके मंगलमय जीवन की कामना की। मुनि श्री सम्यक रत्न सागर ने कहा कि देव, गुरु व धर्म के कार्य को समर्पण भाव से करें। समारोह में वरिष्ठ श्रावक गणेश बोथरा, नरेन्द्र सुराणा, अशोक सुराणा, श्री चिंतामणि जैन मंदिर प्रन्यास के अध्यक्ष निर्मल धारीवाल, संतोक चंद मुसरफ श्री जिनेश्वर युवक परिषद के अध्यक्ष संदीप मुसरफ, मंत्री मनीष नाहटा व अन्य पदाधिकारी व सदस्य तथा मंदिर निर्माण में सहभागी बने डागा परिवार के अनेक परिजन मौजूद थे।
नाल गांव में दो जैनाचार्यों का मिलन
बीकानेर, 7 जुलाई। नाल गांव में श्री मुनिव्रत स्वामी के नूतन मंदिर मेंं प्रतिष्ठा पर पहुंचे जैन श्वेताम्बर खरतरगच्छ के आचार्यश्री पीयूष सागर सूरीश्वरजी, बीकानेर के मुनिश्री सम्यक रत्न सागर व मुनिवृंद का दादाबाड़ी कुशलायतन परिसर में जैनाचार्य श्रीपूज्य जिनचन्द्र सूरि, का मिलन हुआ।
जैनाचार्य श्री पूज्य जिनचन्द्र सूरि सत्य साधना, आचारंग सूत्र के अध्ययन व प्रशिक्षण और प्रवचन के बारे में बताया। उन्होंने बताया कि आचारंग सूत्र जैन धर्म का अति प्राचीन ग्रंथ है, इसमें जैन भिक्षुओं की ओर से पालन किए जाने वाले आचारण व नियमों का उल्लेख है। इस सूत्र में कहा गया है कि पृथ्वीकायिक जीवों को उतना ही कष्ट होता है, जितना कि एक जन्मान्ध, गूंगे, बहरे? विकलांग व्यक्ति के अंगों को काटने से होता है।
प्रवर्तिनी साध्वीश्री शशि प्रभा की स्मृति में
गुणानुवाद सभा 9 को
बीकानेर, 7 जुलाई। जैन श्वेताम्बर खरतरगच्छ के आचार्यश्री जिन पीयूष सागर सूरीश्वरजी व साध्वीवृंद के सान्निध्य में मंगलवार को सुबह नौ बजे रांगड़ी चौक के सुगनजी महाराज के उपासरे में मंगलवार सुबह नौ बजे प्रवर्तिनी साध्वीश्री शशि प्रभा की स्मृति में गुणानुवाद सभा व अंतराय कर्म पूजा की जाएगी।
श्री सुगनजी महाराज का उपासरा ट्रस्ट के मंत्री रतन लाल नाहटा ने बताया कि बीकानेर में कई बार चातुर्मास कर चुकी साध्वीश्री शशि प्रभा म.सा. ने अनेक मंदिरों, दादा बाड़ियों का जीर्णोंद्धार करवाया। हजारों किलोमीटर की यात्रा कर श्रावक-श्राविकाओं धर्म-ध्यान से जोड़ा।
पांचू के तीर्थंकर भगवान अभिनंदन स्वामी
के मंदिर जीर्णोंद्धार का शिलान्यास 10 को
बीकानेर, 7 जुलाई। जैन श्वेताम्बर खरतरगच्छ के आचार्यश्री जिन पीयूष सागर सूरीश्वरजी की प्रेरणा से पांच गांव के छह शताब्दी प्राचीन तीर्थंकर भगवान अभिनंदन स्वामी के मंदिर के जीर्णोंद्धार का शिलान्यास 10 जुलाई को होगा।
श्री जिनेश्वर युवक परिषद के अध्यक्ष संदीप मुसरफ व मंत्री मनीष नाहटा ने बताया कि आचार्यश्री ने अपने तीन सहवृति मुनियों को पांचू भेजा है। वे रविवार को पैदल विहार करते हुए पहुंच गए। बीकानेर से 10 जुलाई को विशेष बस से श्रावक-श्राविकाओं का समूह पांचू जाएगा।














