दिनांक 14 जुलाई 2024, बीकानेर।
अजित फाउण्डेशन द्वारा आयोजित मासिक संवाद श्रृंखला की इस कड़ी में ‘‘भारतीय दर्शन एवं सूफीमत’’ विषय पर व्याख्यान कार्यक्रम आयोजित हुआ। कार्यक्रम की अध्यक्ष्यता करते हुए प्रो. भंवर भादानी, ने कहा कि सूफीजम में समरसता और प्रेम की भाषा है, जो मानवीय मूल्यों को प्रदर्शित करती है। उन्होंने बताया कि जहां भी सूफी संत हुए उन्होंने उस स्थान विशेष की परिस्थितियेां के अनुसार योगदान दिया। उसका उदाहरण हमें कई कव्वालियों के द्वारा सुनने को मिलता है। जब हम इन कव्वालियों को सुनते है तो देखते है कि इनमें चयन किए गए शब्द बहुत ही उम्दा होते है।
संवाद के मुख्य वक्ता दर्शनशास्त्री एवं शिक्षाविद् डॉ. मनमोहन सिंह ने अपने व्यक्तव्य में कहा कि दर्शन में यह कहा गया है कि स्वयं को जानने की प्रक्रिया ही ‘दर्शन’ है। दर्शन का कोई विभाजन नहीं होता। दर्शन को देश काल की सीमा में बांधा नहीं जा सकता, इसका व्यापक और गहरा प्रभाव देखने को मिलता है। आत्मा के विचार को भारतीय दर्शन में प्रमुखता से रेखांकित किया गया है।
डॉ. यादव ने कहा कि सूफीजम ‘ईश्वर’ को प्रेमिका के रूप में देखता है। जिसका अर्थ यह लगाया जा सकता है कि ईश्वर एवं उसको चाहने वाले के बीच कोई बिचौलियां नहीं होता है। उन्होंने बताया कि सूफीजम नसीहत नहीं देती बल्कि नृत्य और गायन के द्वारा अपने को स्थापित करती है। सूफीजम ने ही हिन्दू एवं मुस्लिम कटरता को तोड़ने हेतु प्रयास किए है जिसके कई उदाहरण इतिहास में है और वर्तमान में भी हम देख सकते है।
सुप्रसिद्ध कथाकार एवं साहित्यकार नदीम अदहम ‘नदीम’ ने कार्यक्रम के अंत में सभी को धन्यवाद देते हुए कहा कि डॉ. मनमोहन सिंह यादव ने दर्शन और सूफीमत जैसे जटिल विषय को बहुत ही सरल तरीके से हमारे सामने रखा। तथा दर्शन एवं सूफीमत से किस प्रकार हमारा समाज प्रभावित रहा उसके सटीक व्याख्या आपने यहा की।
संस्था समन्वयक संजय श्रीमाली ने कार्यक्रम के शुरूआत में संस्था की नवीनतम गतिविधियों के बारे में बताते हुए कहा कि इस तरह के संवाद आयोजनों से युवाओं में नवीन सोच का विकास होता है तथा उनकी सोच को नए रास्ते मिलते है।
डॉ. मनमोहन सिंह यादव व्यक्तत्वय के प्श्चात डॉ. फारूक चौहान, चित्रकार योगेन्द्र पुरोहित एवं कवि जुगल पुरोहित आदि ने अपनी जिज्ञासाएं रखी जिनका समाधान बेहद ढंग से डॉ. यादव ने किया।
कार्यक्रम में मोहम्मद फारूक, जुगल किषोर पुरोहित, योगेन्द्र पुरोहित, ओम सोनगरा, डॉ. अजय जोशी, अशफाक कादरी, गिरिराज पारीक, बाबूलाल छंगाणी, अजय सहगल, डॉ. रीतेश व्यास, गोविन्द जोशी, डॉ. कृष्णा आचार्य, राजाराम स्वर्णकार, जाकिर अदीब, संजय जनागल, मोहम्मद हनीफ उस्ता, समीउल हसन कादरी, आत्माराम भाटी, हरीश भोजक एवं असद अली ‘असद’ आदि की गरिमामयी उपस्थित रहे।
सधन्यवाद।
भवदीय
संजय श्रीमाली
कार्यक्रम समन्वयक
अजित फाउण्डेशन
मो. 7014198275
—
Sanjay Shrimali
coordinator
Ajit Foundation
Acharyo ki Dhal
Bikaner
Mo- 7014198275
(W) 9509867486














