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मां का दर्जा सबसे ऊंचा-कथावाचक राम प्रसाद महाराज-नानी बाई के मायरे’’ की संगीतमय कथा का समापन 9 फरवरी को’’
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बीकानेर, 8 फरवरी। जस्सूसर गेट के बाहर अमर मार्ग पर स्थित दुर्गामाता के मंदिर में शनिवार को तीन दिवसीय ’’ नानी बाई के मायरे’’ की संगीत मय कथा के दूसरे दिन कथा वाचक जोधपुर के रामप्रसाद महाराज ने कहा कि संसार में मां का दर्जा सबसे ऊंचा होता है। माता-पिता के चरणों में सभी देव, तीर्थ रहते है। माता पिता का तिरस्कार करने वाले, उन्हें प्रताड़ित करने वाले व वृद्ध आश्रमों में छोड़ने वाले कभी परमात्म भक्ति व वास्तविक आत्मिक और भौतिक सुख नहीं प्राप्त कर सकते ।

कथा वाचक राम प्रसाद महाराज ने कहा कि वर्तमान में पाश्चात्य संस्कृति के प्रभाव से लोग पारिवारिक रिश्तों के महत्व और माता-पिता के मान सम्मान को कम करने लगे है। हमारी भारतीय संस्कृति में ’’मातृ-पितृ देवो भव’’ का संदेश दिया गया है। माता-पिता को देव तुल्य सम्मान देकर उनकी सेवा करने व सम्मान देने की बात सभी महापुरुषों, धर्मग्रंथों ने दी है। उन्होंने कहा कि पुत्र-पुत्री अपने पैरों की चमड़ी की जूती पहनाकर माता-पिता को पहनाने से भी उनके ऋण से उऋर्ण नहीं हो सकते। पहली गुरु मां ही होती है। जन्म देने वाली मां व पालन पोषण करने वाले पिता के समान व्यक्ति का कोई दूसरा हित चिंतक नीं हो सकता।
समाज सेवी व बाबा रामदेव के भक्त रामदेव अग्रवाल, मधुसुदन अग्रवाल रामदेवरा के मूल योगी राज दि ने कथावाचक का अभिनंदन का अभिनंदन किया। कथा रविवार अंतिम दिन को दोपहर ढाई बजे से शाम साढ़े पांच बजे तक होगी । शनिवार को दुर्गामाता मंदिर के पीछे के मैदान श्रद्धालुओं से खचाखच भर गया था। कथा के दौरान प्रसंगानुसार भक्ति गीत प्रस्तुत किए गए। कार्यक्रम का लाइव प्रसारण किया गया।

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दिलीप गुप्ता

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