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रमक झमक में गणगौर उत्सव गणगौर की प्रासंगिकता पर परिचर्चा में महिलाओं ने खुलकर रखे विचार और पढ़ी कविताएं

बीकानेर। रमक झमक परिसर में चल रहे ‘म्हारी गणगौर’ उत्सव के दूसरे दिन महिला कवि सम्मेलन एवं ‘वर्तमान में गणगौर पूजन की प्रासंगिकता’ विषय पर परिचर्चा रखी गई।
रमक झमक के अध्यक्ष प्रहलाद ओझा ‘भैरुं’ ने परिचर्चा का विषय प्रवर्तन किया।
परिचर्चा में अतिथि वक्ता के रूप में लेखक श्रीमती मंजू मंडोर ने कहा कि गणगौर पूजन न केवल हमारी आस्था से जुड़ा बल्कि जन्म से हमारे सस्करों में शामिल है। कितना ही समय परिवर्तन हो जाए बालिकाओं एवं महिलाओं का इससे दूर हो जाना सिर्फ कल्पना हो सकती है क्योंकि गणगौर पूजन एवं उत्सव से हमें आत्मिक खुशी मिलती है जो आधुनिक सुविधाओं से नहीं मिल सकती।
मुख्य वक्ता के रूप में सामाजिक सरोकार व लेखन क्षेत्र से जुड़ी श्रीमती मनीषा आर्य सोनी ने कहा कि गणगौर पूजन की वर्तमान प्रासंगिकता और बढ़ जाती है जब गणगौर पूजन करने वाली महिलाएं बेटी के जन्म पर आंसू बहाती नज़र आती हैं । इस दोहरे चरित्र से बाहर आने की आवश्यकता है । एक तरफ हम कहते हैं कि गणगौर पूजन की संस्कृति को बढ़ावा मिलना चाहिए तो ये भी सोचने का विषय है कि यदि कन्या भ्रूण हत्या नहीं थमी तौ गणगौर पूजन करेगा कौन। गणगौर न सिर्फ श्रृंगार का पर्याय है अपितु स्त्री स्वाभिमान का प्रतीक भी है।गणगौर संस्कृति के विस्तार के लिए इस विषय पर गम्भीरता से विचार होना जरूरी है।
आस्था छंगाणी ने कहा कि हम कितना ही मोबाइल टीवी देखलें लेकिन 16 दिन का प्रेक्टिकल पूजन कर जब भोलावनी होती है तो रोना आ जाता है।शिक्षिका शोभा व्यास ने कहा कि देर रात तक जगना और सुबह लेट उठने वाली बालिकाएं सुबह जल्दी उठकर व नहा धोकर पूजन करती है जो स्वास्थ्य की दृष्टि से महत्वपूर्ण है।मंजू सारस्वत ने कहा कि मोबाइल के जमाने में एक कमरे में भी सब अकेले अकेले होते है लेकिन यह उत्सव बालिकाओं व महिलाओं को सुबह पूजन व दोपहर बासा जैसे कार्यक्रम में समूह में बैठना सीखाता है जिससे एंजाइटी नहीं होती।
परिचर्चा में वरिष्ठ सामाजिक कार्यकर्ता राजकुमारी व्यास,कृष्णा पालीवाल,डिम्पल सोनी,बबिता शर्मा,सीमा भाटी,लक्ष्मी ओझा एवं भंवरी देवी,प्रियंका चुरा आदि ने भी विचार रखे। परिचर्चा की अध्यक्षता श्रीमती पदमा व्यास ने की।

गणगौर पर कवयित्रियों ने पढ़ी कविताएं
बटोरी तालियां
रमक झमक म्हारी गणगौर उत्सव में महिला कवि सम्मेलन हुआ । कवि समनेलन में युवा कवयित्री ज्योति स्वामी ने गणगौर को केंद्र में रख ‘आपाणे आप रे उनियारे जिसी लागे गणगौर, फुट री फुटरी दिखे गणगौर’,कपिला पालिवाल ने ‘आ छोटी सी गणगौर म्हारी घणी फुठरी लागे,आ घेर घुमाती चाले, आ चुनङ ओढती चाले’,मनीषा पुरोहित ने ‘नारी पर अंकुश क्यों है’,आर वी टीना ने ‘घाघरा चुनी ओढ़नी मेरा परिधान मेरा गौरव’,सुधा सारस्वत ने ‘लाड-कोड में करूँ मनुवार्’या सा,म्हारे आंगणियै थै भळै पधार्’या ओ राज’, कविताएं तथा राजकुमारी व्यास एवं अनिता मोहता ने गवर पर गीत प्रस्तुत किया।कवि सम्मेलन में वरिष्ठ कवयित्री ज्योति वधवा’रंजना’ ने ‘मां तुम कैसी हो मैं सोचती भी नहीं,तुम पूरी कर देती हो’, सुनाकर वाह वाह लूटी और तालियां बटोरी। कवि सम्मेलन का संचालन कपिला पालीवाल,अध्यक्षता श्रीमती रामकंवरी ओझा ने की रमक झमक की ओर से आभार बाबूलाल छंगाणी ने किया तथा प्रहलाद ओझा ‘भैरुं’ व लक्ष्मी ओझा ने नवोदित कवयित्रियों को स्मृति चिन्ह भेंट कर प्रोत्साहित किया।

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दिलीप गुप्ता

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